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GST पंजीयन प्रक्रिया को और सख्त करने जा रही है सरकार, धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
Wed, 18 Nov 2020 11:25 AM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Wed, 18 Nov 2020 11:25 AM IST
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वस्तु एवं सेवा कर
- फोटो : iStock
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केंद्र और राज्य सरकारें फर्जी बिल के मामलों में हो रही वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के पंजीयन की प्रक्रिया और कानूनी उपाय कठिन बनाने पर काम कर रही हैं। इस संदर्भ में वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इन मामलों पर चर्चा करने के लिए जीएसटी की विधि समिति की बुधवार को एक बैठक बुलाई गई है। जीएसटी परिषद की विधि समिति में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ कर अधिकारी शामिल हैं।
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इन मुद्दों पर होगी चर्चा
समिति फर्जी बिलों से की जाने वाले धोखाधड़ी तथा जीएसटी पंजीयन की प्रक्रिया को जटिल बनाने पर चर्चा करेगी। इसके अलावा फर्जी बिलों पर लगाम लगाने के लिए जीएसटी अधिनियम में आवश्यक संशोधन समेत विभिन्न न्यायिक कदमों पर भी चर्चा करेगी।
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निलंबन से संबंधित प्रावधान भी होंगे दुरुस्त
सूत्र ने कहा कि पंजीकरण के निलंबन से संबंधित प्रावधान को भी दुरुस्त किया जा सकता है, ताकि निलंबन व रद्द करने की प्रक्रिया को अधिक कुशल और तेज बनाया जा सके। यह अंतत: समय पर धोखाधड़ी करने वालों को रोकने में मदद करेगा। सूत्र ने यह भी कहा कि धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में संलिप्त करदाताओं की पहचान करने के लिए डाटा का विश्लेषण करने वाली प्रौद्योगिकियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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1,180 कंपनियों के मामले दर्ज
हाल ही में महानिदेशालय ने कर चोरी और फर्जी बिल के मामले में बड़ी कार्रवाई की थी। देशभर में सिर्फ चार दिनों तक की गई कार्रवाई में 1,180 कंपनियों के खिलाफ 350 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, इस मामले में 25 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। फिलहाल, फर्जी बिल और हवाला रैकेट को देखते हुए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और सख्त कर दी गई है।
महानिदेशालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ये गिरफ्तारियां कचरे और अलौह धातुओं के मलबे, रेडीमेड कपडे़, कृषि उत्पाद, दूध उत्पादों, मोबाइल, मानव श्रम आपूर्ति सेवाएं, विज्ञापन, सोना, चांदी और निर्माण सेवाओं में फर्जी बिल जारी करने को लेकर की गई हैं। इस मामले में शामिल लोगों और संस्थाओं पर जीएसटी चोरी, आयकर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुडे़ आरोप हैं।
ऐसे होता है खेल
फर्जी कंपनियां नकली बिल बनाती हैं। कोई वस्तु भेजे बिना ही फर्जी ई-वे बिल भी तैयार किए जाते हैं और उसके बाद सरकार से आईटीसी का दावा किया जाता है। जीएसटी के तहत कच्चे माल और दूसरी खरीद पर दिए गए कर की वापसी होती है।