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कैबिनेट बैठक: दूरसंचार कंपनियों को AGR मामले में मिली राहत, ऑटो सेक्टर के लिए PLI योजना को मंजूरी
Wed, 15 Sep 2021 02:58 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Wed, 15 Sep 2021 02:58 PM IST
सार
आज कैबिनेट की बैठक में सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र को राहत देने के लिए फैसला लिया। इसके अलावा ऑटो सेक्टर के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी मिली।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
आज यानी बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कई अहम फैसले लिए। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में ऑटोमोबाइल सेक्टर और टेलीकॉम सेक्टर को राहत मिली। संकट से गुजर रहे टेलीकॉम सेक्टर को लंबे समय से राहत पैकेज का इंतजार था।
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दूरसंचार क्षेत्र को मिली राहत
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि दूरसंचार क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने पैकेज को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार टेलीकॉम उद्योग के लिए एक लंबी अवधि के राहत पैकेज पर काम कर रही थी। बता दें कि देश में कुछ टेलीकॉम कंपनियां इस समय वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का भारी एजीआर बकाया है। इससे पहले आठ सितंबर 2021 को हुई पिछली बैठक से भी दूरसंचार क्षेत्र को राहत की उम्मीद थी। लेकिन तब इस पर फैसला नहीं लिया गया।
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टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि क्षेत्र में नौ बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म हुए हैं। एजीआर बकाए की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा। कंपनियों के मासिक ब्याज दर को अब सालाना कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त पेनाल्टी पर भी राहत दी गई है। स्पेक्ट्रम की अवधि भी 20 साल से बढ़कर 30 साल हो गई है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स बकाए को लेकर मोरेटोरियम की सुविधा ले सकेंगे। ये चार साल तक के लिए दिया गया है। जो टेलीकॉम ऑपरेटर मोरेटोरियम का विकल्प चुनते हैं, उन्हें सरकार को ब्याज भी देना होगा। इसके लिए ब्याज दर एमसीएलआर रेट के साथ दो फीसदी है।
इतना ही नहीं, सरकार ने नॉन टेलीकॉम रेवेन्यू को एजीआर से हटाया है। सरकार ने टेलीकॉम में 100 फीसदी एफडीआई को भी मंजूरी दे दी है। यानी अब विदेशी कंपनियां भारत में किसी कंपनी में अपना पूरा शेयर लगा सकेंगी या किसी भारतीय कंपनी को पूरी तरह से खरीद भी सकेंगी। इन फैसलों का असर तब दिखेगा जब 5G मोबाइल नेटवर्क का ऑक्शन आएगा। सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर टावर का इंस्टालेशन होगा। 1953 के नोटिफिकेशन के हिसाब से लाइसेंस राज खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी फरवरी 2022 में होने की उम्मीद है और सरकार कोशिश कर सकती है कि यह प्रक्रिया जनवरी में पूरी कर ली जाए।
सिम कार्ड के लिए फिजिकल फॉर्म का झंझट खत्म
सरकार ने डिजिटल KYC को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सिम कार्ड के लिए दस्तावेज का वेरिफिकेशन डिजिटल रूप में ही होगा। सरकार का कहना है कि टेलीकॉम कंपनियों के पास 400 करोड़ से कागजों का अंबार जमा हुआ है। ऐसे में अब नए मोबाइल कनेक्शन के लिए डिजिटल KYC कराने का फैसला लिया गया है।
टेलीकॉम शेयरों में जोरदार उछाल
इस खबर के बाद टेलीकॉम शेयरों में तेज उछाल आया है। संकट से जूझ रही वोडाफोन आइडिया का शेयर 0.24 अंक यानी 2.76 फीसदी बढ़कर 8.93 पर बंद हुआ। मौजूदा समय में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 25,660.70 करोड़ रुपये है। भारती एयरटेल की बात करें, तो यह 31.45 अंक यानी 4.53 फीसदी की तेजी के साथ 725.55 पर बंद हुआ। मौजूदा समय में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 3,98,474.04 करोड़ रुपये है।
ऑटो व ड्रोन सेक्टर को भी मिली राहत
इसके अलावा ऑटो और ड्रोन सेक्टर को भी राहत मिली है। ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि पीएलआई योजना में 26,058 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है। ऑटो सेक्टर के लिए 25,938 करोड़ रुपये और ड्रोन उद्योग के लिए 120 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। योजना में 20 उत्पादों को शामिल किया गया है, जिसमें इलेक्ट्रिकल और कन्वेंशनल व्हीकल में लगने वाले कंपोनेंट, दोनों शामिल हैं। पीएलआई योजना के मुताबिक, केंद्र अतिरिक्त उत्पादन पर प्रोत्साहन देगी और कंपनियों को भारत में बने उत्पादों को निर्यात करने की अनुमति मिलेगी। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना है। ठाकुर के मुताबिक इससे एडवांस ऑटोमोबाइल सेक्टर को बूस्ट मिलेगा और सात लाख सात हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
ऑटो कंपनियों को स्कीम का फायदा उठाने के लिए अगले पांच सालों में 2000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। पीएलआई योजना के तहत पांच वर्षों में 42,500 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश होगा और 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन होगा।