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Biz Updates: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सोने-चांदी की कीमतें गिरी; भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बढ़ा

Mon, 04 May 2026 09:01 PM IST
Pavan बिजनेस अपडेट, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस अपडेट, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 04 May 2026 09:01 PM IST
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Business Updates Of 4 May: Business News, Crude Oil, Gold Sliver Price,
बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स - फोटो : amarujala.com
अमेरिका-ईरान युद्ध में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के चलते सोमवार के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली, और उच्च मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बनी चिंताओं ने सुरक्षित निवेश विकल्पों के आकर्षण को कम कर दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जून डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 1,239 रुपए यानी 0.82 प्रतिशत गिरकर 1,50,113 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 4,863 रुपए यानी 1.94 प्रतिशत गिरकर 2,46,074 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई।
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इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, 999 प्यूरिटी वाले सोने का भाव सोमवार को 1,48,100 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा, जो पिछले गुरुवार (30 अप्रैल) के 1,50,263 रुपए से 2,163 रुपए की गिरावट को दर्शाता है। वहीं 999 प्यूरिटी वाली चांदी की कीमत सोमवार को 2,40,120 रुपए प्रति किलोग्राम रही, जो पिछले गुरुवार के 2,40,331 रुपए से 211 रुपए कम है। वैश्विक बाजारों में भी सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहा। भारतीय समयानुसार शाम 7.47 बजे तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत करीब 4,569 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी, जिसमें लगभग 1.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, कॉमेक्स चांदी के भाव में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह लगभग 74.28 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
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अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। बाजार होर्मुज जलडमरूमध्य से विदेशी जहाजों को सुरक्षित निकालने की अमेरिकी योजनाओं के साथ-साथ अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में हो रही प्रगति के संकेतों पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए बाध्य हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, आमतौर पर सोने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इससे कोई प्रतिफल नहीं मिलता। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से सोने की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.12 प्रतिशत बढ़ा
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह यानी नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में स्थिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.12 प्रतिशत बढ़कर 23,40,406 करोड़ रुपए हो गया। वहीं, इस वित्त वर्ष में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह यानी ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 28,11,936 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 27,03,107 करोड़ रुपए के मुकाबले 4.03 प्रतिशत ज्यादा है।

यह बढ़ोतरी कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स सेगमेंट दोनों से आए बेहतर कलेक्शन के कारण संभव हुई है, जो अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधियों और बेहतर टैक्स अनुपालन को दर्शाता है। कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जो बढ़कर 13,81,606 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,72,542 करोड़ रुपए था। नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन, जिसमें व्यक्तिगत करदाता, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), फर्म और अन्य संस्थाएं शामिल हैं, 13,72,474 करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 13,73,905 करोड़ रुपए के मुकाबले थोड़ा कम है।

इस दौरान सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) से कलेक्शन बढ़कर 57,522 करोड़ रुपए हो गया। वित्त वर्ष के दौरान जारी किए गए टैक्स रिफंड में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो 1.09 प्रतिशत घटकर 4,71,531 करोड़ रुपए रह गया, जबकि पिछले साल यह 4,76,732 करोड़ रुपए था। रिफंड में कमी आने से नेट टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ को बढ़ावा मिला है, क्योंकि कुल कलेक्शन का बड़ा हिस्सा सरकार के पास बना रहा। यह आंकड़े एक संतुलित टैक्स संरचना की ओर इशारा करते हैं, जहां कॉरपोरेट और व्यक्तिगत करदाता दोनों ही राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, नेट टैक्स कलेक्शन में यह स्थिर बढ़ोतरी बेहतर टैक्स संग्रह क्षमता और कुशल प्रशासन को दर्शाती है, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच। हालांकि, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में हल्की गिरावट व्यक्तिगत आय में उतार-चढ़ाव या टैक्स प्लानिंग के रुझानों को दर्शा सकती है, जबकि कॉरपोरेट टैक्स में बढ़ोतरी विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर मुनाफे की ओर संकेत करती है। इस बीच, आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आंकड़े जारी करते हुए कहा कि '31 मार्च 2026 तक वित्त वर्ष 2025-26 के ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, रिफंड और नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं।'

रिकॉर्ड गिरावट, अब 95 रुपये का हो गया एक डॉलर
रुपया सोमवार को डॉलर के मुकाबले 39 पैसे टूटकर पहली बार 95 के स्तर से नीचे 95.23 पर बंद हुआ। रुपये की गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, पश्चिम एशिया के तनाव ने कच्चे तेल को फिर महंगा कर दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ती है। दूसरा, विदेशी निवेशकों की निकासी जारी है। इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों और बॉन्ड से करीब 20 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। तीसरा, मजबूत डॉलर और वैश्विक जोखिम से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव है। इस गिरावट के साथ रुपया इस साल अब तक 5.5 फीसदी टूट चुका है। इस गिरावट से पहले रुपया 29 अप्रैल को 94.88 के सार्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।

एक अनुमान के मुताबिक, रुपये की विनिमय दर में 10 फीसदी गिरावट थोक महंगाई को करीब एक फीसदी अंक तक तक बढ़ा सकती है। आगे रुपये की चाल कच्चा तेल, विदेशी निवेश, आरबीआई के हस्तक्षेप और डॉलर इंडेक्स से तय होगी। फिलहाल संकेत साफ है...रुपये की गिरावट बाजार की नहीं, घरेलू बजट की भी चिंता है।

चांदी की कीमत 6,800 रुपये बढ़ी, सोने में 2,000 गिरावट
विदेशी बाजारों में कीमतों पर दबाव के बावजूद आभूषण विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों की मजबूत खरीदारी से सोमवार को दिल्ली सराफा बाजार में चांदी 6,800 रुपये महंगी होकर 2,49,500 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पहुंच गई। हालांकि, सोना 2,000 रुपये सस्ता होकर 1,52,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव बंद हुआ। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच सोने की कीमत में गिरावट आई। वैश्विक बाजार में सोना 49.27 टूटकर 4,565.68 डॉलर प्रति औंस रहा। 

लगातार तीसरे महीने तेल उत्पादन बढ़ाएगा ओपेक
वैश्विक क्रूड बाजार में मचे उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने रविवार को कच्चे तेल के उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। यह लगातार तीसरा महीना है, जब समूह ने उत्पादन कोटा बढ़ाने का निर्णय लिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात के समूह से बाहर होने के बावजूद ओपेक प्लस ने अपनी विस्तार योजनाओं को जारी रखा है।

ओपेक प्लस का यह कदम वैश्विक बाजार को संदेश देने की कोशिश है कि वह आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब युद्ध के बादल छटेंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता खुलेगा।

समूह के सात प्रमुख देश जून में तेल उत्पादन लक्ष्य को 1,88,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं। इस बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाखस्तान और ओमान शामिल हुए। बाजार विशेषज्ञों एवं तेल व्यापारियों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाने का यह फैसला फिलहाल काफी हद तक कागजी या सांकेतिक ही रहेगा।

उधर, आपूर्ति में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर को पार कर गई थीं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगले एक से दो महीनों में दुनियाभर में विमान ईंधन की भारी कमी हो सकती है और वैश्विक महंगाई में तेज उछाल आ सकता है। 

विनिर्माण गतिविधियों पर ईरान संघर्ष का असर वृद्धि दर चार साल में दूसरी बार सबसे कमजोर
देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में नए कारोबार और उत्पादन वृद्धि के मामले में अप्रैल में मामूली सुधार देखने को मिला। हालांकि, वृद्धि दर चार वर्ष में दूसरी बार सबसे कमजोर रही। एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च के 53.9 से मामूली बढ़कर बीते महीने 54.7 के स्तर पर पहुंच गया। 

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, पीएमआई के दो सबसे बड़े घटक नए ऑर्डर और उत्पादन मार्च की तुलना में जरूर बढ़े, लेकिन पिछले साढ़े तीन साल के स्तर से पीछे रहे। विज्ञापन एवं मांग की मजबूती ने बिक्री और उत्पादन को सहारा दिया, लेकिन ईरान संघर्ष, प्रतिस्पर्धा की स्थिति और ग्राहकों के लंबित कोटेशन मंजूर करने में हिचक के कारण वृद्धि प्रभावित हुई। उत्पादन, निर्यात सहित नए ऑर्डर और रोजगार में मध्यम वृद्धि दर्ज हुई, जो विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है।

लागत का दबाव 44 महीने में सर्वाधिक
कीमतों के मोर्चे पर विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों ने कहा, ईरान युद्ध की वजह से महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है। कच्चे माल की लागत और तैयार माल की कीमतें क्रमशः 44 महीने एवं छह महीने में सबसे तेज दर से बढ़ीं।

इस साल जनवरी-मार्च तिमाही की शुरुआत में नए निर्यात ऑर्डर मिलने की रफ्तार सात माह में सबसे ज्यादा रही। अतिरिक्त भर्तियों के कारण रोजगार सृजन की दर 10 महीने में सबसे मजबूत रही।
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