Biz Updates: आरबीआई इस साल दे सकता है अपना सबसे बड़ा डिविडेंड, अमेरिका में थोक महंगाई ने तोड़ा रिकॉर्ड
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस साल केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश (डिविडेंड) सौंपने की तैयारी कर रहा है। यह भारी-भरकम भुगतान सरकार को एक मजबूत राजकोषीय कुशन (वित्तीय सहारा) प्रदान करेगा, जिससे वैश्विक संकटों से उत्पन्न होने वाली आर्थिक चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सकेगा।
इस महीने होने वाली अपनी महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक में रिजर्व बैंक इस लाभांश की अंतिम राशि पर मुहर लगाएगा। सूत्रों के हवाले से यह स्पष्ट हुआ है कि यह रकम ऐतिहासिक होने वाली है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी आरबीआई ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था, जो कि उससे पिछले वर्ष ट्रांसफर किए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। इस बार यह आंकड़ा और भी ऊंचे स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है, जो सरकारी खजाने को बड़ी मजबूती देगा।
अमेरिका में थोक महंगाई ने तोड़ा रिकॉर्ड, कंपनियों पर बढ़ा दाम बढ़ाने का दबाव
अमेरिका में थोक महंगाई ने पिछले महीने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उत्पादक कीमतें एक साल पहले की तुलना में 6 फीसदी बढ़ गईं, जो दिसंबर 2022 के बाद सबसे अधिक वृद्धि है। ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर ग्राहकों के लिए दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।
श्रम विभाग ने बुधवार को बताया कि उसका उत्पादक मूल्य सूचकांक अप्रैल में 1.4 फीसदी उछला, जो मार्च 2022 के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। यह सूचकांक उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले महंगाई को मापता है। मार्च से अप्रैल के बीच ऊर्जा की कीमतें 7.8 फीसदी बढ़ीं और एक साल पहले की तुलना में 22.7 फीसदी अधिक हो गईं। पेट्रोल 15.6 फीसदी और डीजल 12.6 फीसदी महंगा हुआ। खाद्य और ऊर्जा लागत को छोड़कर, मुख्य उत्पादक कीमतें मार्च से 1 फीसदी और अप्रैल 2025 से 5.2 फीसदी बढ़ीं। ये सभी आंकड़े अर्थशास्त्रियों की उम्मीद से कहीं अधिक थे। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) की महंगाई से लड़ने की रणनीति बदल गई है। अमेरिकी पहले से ही बढ़ती जीवन लागत से परेशान हैं। यह मुद्दा 3 नवंबर को होने वाले चुनावों में अहम हो सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट आने पर चुकाने होंगे पैसे
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA ) ने उत्तर प्रदेश में बन रहे हवाईअड्डे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नियामक संस्था- एरा ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री विकास शुल्क निर्धारित कर दिए हैं। यह शुल्क वित्तीय वर्ष 2027 के लिए तय किए गए हैं। घरेलू प्रस्थान करने वाले यात्रियों के लिए यह शुल्क 490 रुपये होगा। अंतर्राष्ट्रीय प्रस्थान करने वाले यात्रियों को 980 रुपये का शुल्क देना होगा। घरेलू आगमन करने वाले यात्रियों के लिए 210 रुपये का शुल्क तय किया गया है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय आगमन करने वाले यात्रियों को 420 रुपये का भुगतान करना होगा। एरा ने हवाई अड्डे के शुरुआती वर्षों के लिए परिवर्तनीय टैरिफ योजना को भी मंजूरी दी है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 15 जून से अपना वाणिज्यिक परिचालन शुरू करेगा।
आंध्र के लिए नई रेल परियोजना
आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम से सांसद वल्लभनेनी बालशौरी ने बताया कि 2,816 करोड़ रुपये की नई मछलीपट्टनम-रेपल्ले रेलवे लाइन परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। यह 47.60 किलोमीटर लंबी ब्रॉड-गेज लाइन मछलीपट्टनम से रेपल्ले तक बनेगी। प्रशासनिक मंजूरी जल्द मिलने की उम्मीद है और इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है। अंतिम स्थान सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है। इसमें छह रेलवे स्टेशन, 70 पुल और 24 रेलवे अंडरब्रिज शामिल होंगे।
भारत का हवाई कार्गो क्षेत्र रिकॉर्ड ऊंचाई पर, 2024-25 में 3.72 मिलियन मीट्रिक टन पहुंचा
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का हवाई कार्गो क्षेत्र रिकॉर्ड 3.72 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। देश के लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे कार्गो सेक्टर में पिछले एक दशक में 47 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस कारण भारत वैश्विक लॉजिस्टिक्स में मजबूत खिलाड़ी की तरह उभरा है। 2014-15 में 2.53 मिलियन मीट्रिक टन माल ढुलाई हुई थी। दिसंबर 2025 तक, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में आंकड़ा 2.98 मिलियन मीट्रिक टन दर्ज किया गया। एक वर्ष में ये रिकॉर्ड उछाल है।
वर्तमान में, देश के 74 हवाई अड्डों पर कार्गो संचालन होता है। सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण भंडारण क्षमता बढ़ा रहे हैं और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। जेवर और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार ने 2024-25 से 2026-27 तक 27 हवाई अड्डों पर सीमा शुल्क कर्मियों की तैनाती की लागत की प्रतिपूर्ति करने की नीति शुरू की है। इसमें 15 समर्पित कार्गो टर्मिनल शामिल हैं, जिससे छोटे शहरों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।