Biz Updates: पीएसयू बैंकों ने पांच साल में खोलीं 6,255 शाखाएं, बंद कीं 4,093; जानें भारत की रेटिंग कितनी सुधरी
सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में 6,255 नई शाखाएं खोली हैं। इसी अवधि में उन्होंने 4,093 शाखाएं बंद भी की हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों का हवाला दिया।
बंद की गई शाखाओं में वित्तीय वर्ष 2021-22 में सर्वाधिक 2,564 शाखाएं थीं। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 में 700 शाखाएं बंद हुईं। वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में क्रमशः 556, 146 और 127 शाखाएं बंद की गईं। शाखाएं खोलने के मामले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक 1,967 शाखाएं खोली गईं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1,823 शाखाएं खोली गई थीं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1,057 और वित्तीय वर्ष 2022-23 में 932 शाखाएं खुलीं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में सबसे कम 476 शाखाएं खोली गई थीं।
क्या है जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों का आंकड़ा?
मंत्री ने बताया कि आरबीआई जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों का कंपनी-वार विवरण नहीं रखता है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 तक 15,930 जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर 25 लाख रुपये या उससे अधिक का बकाया था। यह कुल बकाया राशि 2,85,015 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, बैंकों द्वारा जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) फंड में स्थानांतरित न की गई जमा राशि भी बढ़ी है। 30 जून 2025 तक यह राशि 90,545 करोड़ रुपये थी। 31 जनवरी 2026 तक यह बढ़कर 98,073 करोड़ रुपये हो गई।
दो भूटानी कंपनियों के खिलाफ एडवाइजरी जारी
व्यापारिक विवादों को लेकर सरकार ने दो भूटानी कंपनियों के खिलाफ एडवाइजरी जारी की है। वाणिज्य मंत्रालय ने एडवाइजरी में निर्यातकों, ईसीजीसी, बैंकों और अन्य हितधारकों को भूटान स्थित दो फर्मों, लेगॉय पॉवरस्पोर्ट्स और ड्रुक एजेड स्टोर के साथ व्यापार करते समय संभावित व्यापारिक जोखिमों के कारण अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
सभी निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) और डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के क्षेत्रीय अधिकारियों को भेजे गए एक पत्र में, मंत्रालय ने कहा कि इन दो भूटानी संस्थाओं के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई है। मंत्रालय की सहायक संस्था डीजीएफटी ने विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) 2023 के अध्याय 8 (गुणवत्ता संबंधी शिकायतें और व्यापार विवाद) के प्रावधान के तहत इन फर्मों के खिलाफ सलाह जारी की है।
इस प्रावधान के अनुसार, यदि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास किसी विदेशी संस्था की दुर्भावना से संतुष्ट हो जाते हैं, तो वे ऐसी जानकारी डीजीएफटी को भेजेंगे ताकि इसे ईपीसी/कमोडिटी बोर्ड, ईसीजीसी और अन्य नियामक प्राधिकरणों के बीच प्रसारित किया जा सके।
सोने की कीमतों में तेजी आई तेजी, 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर भाव
मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतों में लगातार छठे सत्र में तेजी आई और यह 1,200 रुपये बढ़कर दो महीने के उच्चतम स्तर 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। तेल की स्थिर दरों के बावजूद व्यापारियों की मजबूत निवेश मांग ने सोने की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले पीले धातु (सोने) की कीमत सोमवार के बंद भाव 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,57,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। त्रिपुरा से दुबई भेजी गई सरसों शहद की पहली खेप
त्रिपुरा से दुबई के लिए 1 मिट्रिक टन सरसों शहद की पहली खेप का निर्यात किया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक इससे लोकल मधुमक्खी पालकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार के मौके खुलेंगे। मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने त्रिपुरा के डेरगांग किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) द्वारा 1 मीट्रिक टन सरसों के शहद की दुबई को पहली बार निर्यात की सुविधा प्रदान की। यह निर्यात एफपीओ और क्षेत्र के लिए एक नई उपलब्धि है, क्योंकि इससे स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों के लिए संगठित निर्यात-उन्मुख उत्पादन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर सृजित हुआ है। सरकार के मुताबिक यह खेप इस क्षेत्र से सरसों के शहद का पहली बार निर्यात है और इससे त्रिपुरा की शहद मूल्य श्रृंखला में विविधीकरण के नए अवसर खुलेंगे। इस पहल से स्थानीय किसानों और एफपीओ को निर्यात के अवसर तलाशने तथा अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजारों में अपनी भागीदारी मजबूत करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय ने आगे कहा कि सरसों के शहद का यह निर्यात किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में एफपीओ के नेतृत्व में उत्पादों के एकत्रीकरण और उद्योग सहयोग की क्षमता को प्रदर्शित करता है। इससे त्रिपुरा और व्यापक पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिक एफपीओ और किसानों को मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता सुधार तथा निर्यात के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच अब 15 देशों से एलएनजी आयात कर रहा भारत
ईरान अमेरिका के बीच पांच महीने से जारी टकराव के कारण पश्चिम एशिया में संकट गहरा हो चुका है। इस कारण आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों से अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के स्रोतों को पहले के छह देशों से बढ़ाकर कुल 15 देशों तक कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी के मुताबिक देश ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों का नेटवर्क भी व्यापक किया है। अब 27 देशों की तुलना में 41 देशों से कच्चे तेल का आयात किया जा रहा है। उन्होंने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा, इस विविधीकरण से किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में व्यवधान तथा बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने की भारत की क्षमता बढ़ी है। कच्चे तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।