Biz Updates: ईपीएफओ सदस्यों की संख्या बढ़कर 7.37 करोड़ पहुंची; 10 साल पुराने जनधन खातों का दोबारा केवाईसी
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की योजनाओं में योगदान करने वाले नियोक्ताओं की संख्या 2023-24 में सालाना आधार पर 6.6 फीसदी बढ़कर 7.66 लाख हो गई। इस दौरान सदस्यों की संख्या 7.6 फीसदी बढ़कर 7.37 करोड़ पहुंच गई। एक बयान के मुताबिक, संगठन ने पिछले वर्ष की तुलना में बकाया राशि वसूलने में 55.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। इसी तरह, पिछले वर्ष की तुलना में निपटाए गए दावों की संख्या में 7.8 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है।
10 साल पुराने जनधन खातों का दोबारा केवाईसी
वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने सोमवार को बैंकों को 10 साल पुराने जनधन खातों का नए सिरे से केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) करने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) 2014 में शुरू की गई थी। अगस्त, 2014 से दिसंबर, 2014 के दौरान करीब 10.5 करोड़ जनधन खाते खोले गए थे। इन खातों का अब 10 साल के बाद फिर केवाईसी होना है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, नागराजू ने पीएमजेडीवाई के खाताधारकों के लिए नए सिरे से केवाईसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए सभी हितधारकों के साथ बैठक की। बैठक में दोबारा केवाईसी करने के लिए एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और अन्य उपलब्ध डिजिटल चैनलों जैसे सभी माध्यमों में सभी प्रक्रियाएं अपनाने का सुझाव दिया। सचिव ने बैंकों से कहा, वे पीएमजेडीवाई योजना की शुरुआत के समय वाले उत्साह के साथ काम करें व ग्राहकों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए फिर से केवाईसी का कार्य पूरा करें।
जुर्माना वसूली के दौरान ब्याज में छूट देने पर विचार: सेबी
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जुर्माना भरने में विफल रहने पर वसूली कार्यवाही के दौरान ब्याज में छूट या कमी करने पर विचार का प्रस्ताव किया है। नियामक ने सोमवार को सुझाव दिया, इसके लिए आवेदन आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2ए) के तीन मानदंडों की पूर्ति करने वाले दस्तावेजों के साथ किया जा सकता है। आवेदन संबंधित वसूली अधिकारी के पास किया जाना चाहिए। आवेदन तभी स्वीकार होगा, जब मांग नोटिस पहले ही दिया जा चुका हो और देय मूल राशि का पूरा भुगतान किया गया हो।
मंगलवार को रुपया लगातार पांचवें सत्र में नए निचले स्तर पर पहुंचा
पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट का रुख है। इस रिपोर्ट को दाखिल करने के समय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.41 पर कारोबार करता दिखा। यह आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के कारण 84.48 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के काफी करीब है। यह स्तर रुपये के लिए लगातार चुनौतियों का संकेत है, जो मजबूत डॉलर की मांग, उच्च कच्चे तेल की कीमतों और काफी विदेशी संस्थागत निकासी के खिलाफ चल रहे संघर्ष को दर्शाता है।