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Budget: दो कर व्यवस्थाओं की पूर्व वित्तमंत्री ने की आलोचना, कहा- बुरा विचार, भ्रम की स्थिति होगी उत्पन्न
Wed, 24 Jul 2024 01:19 AM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Wed, 24 Jul 2024 01:19 AM IST
सार
पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी। इस प्रकार का व्यवस्था लाने का बहुत की बुरा विचार है।
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पी चिदंबरम
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
नए बजट में दो आयकर व्यवस्थाओं की पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी। इस प्रकार का व्यवस्था लाने का बहुत की बुरा विचार है। उन्होंने कहा कि अगर नई कर व्यवस्था लागू करना था तो इसकी घोषणा पहले ही कर देनी चाहिए थी। यह बताकर की कि इस वित्तीय वर्ष से सभी को नई कर व्यवस्था अपनानी होगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए मानक कटौती को 50 प्रतिशत बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया। वहीं नई आयकर व्यवस्था के तहत कर स्लैब में बदलाव किया, बदलाव इसलिए ताकि वेतनभोगी वर्ग के हाथों में खपत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अधिक पैसा उपलब्ध कराया जा सके। पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि दो आयकर व्यवस्थाएं रखना बहुत की बुरा विचार है। उन्होंने कहा, "यदि आप नई कर व्यवस्था लागू करना चाहते हैं, तो आपको इसकी घोषणा पहले ही कर देनी चाहिए और जनता को बताना चाहिए कि इस वित्तीय वर्ष से सभी को नई कर व्यवस्था अपनानी होगी। दो कर व्यवस्थाएं अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि इससे कर मध्यस्थता की स्थिति पैदा होगी और लोग भ्रमित हो जाएंगे कि उन्हें पुरानी व्यवस्था में ही रहना चाहिए या नई व्यवस्था में जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया है, आप एक बार कर बदल सकते हैं और वापस आ सकते हैं। लेकिन अगर आप दूसरी बार कर बदलते हैं, तो आप वापस नहीं आ सकते। मैं इस बात से पूरी तरह से भ्रमित हूं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने इस बजट में नई कर व्यवस्था में जाने के लिए बहुत प्रोत्साहन दिया है। उन्होंने पिछले बजट में ऐसा किया था। इस बार उन्होंने स्लैब बढ़ाकर केवल कर प्रभाव को कम किया है। लेकिन इससे केवल 0-20 प्रतिशत कर ब्रैकेट वाले लोगों को ही लाभ होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि "मुझे नहीं लगता कि इससे उस ब्रैकेट से ऊपर के किसी व्यक्ति को लाभ होगा। मैं दो-कर व्यवस्था का समर्थन नहीं करूंगा।"
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गौर से पढ़ें बारी प्रिंट अक्षर
वहीं पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कहा, "यह भ्रम की ही स्थिति ही है। उन्होंने धारा 48 के दूसरे प्रावधान को हटा दिया। लेकिन तीसरा प्रावधान दूसरे प्रावधान को संदर्भित करता है। इसलिए जब तक आप वित्त विधेयक के बारीक प्रिंट को ध्यान से नहीं पढ़ेंगे और उसका विश्लेषण नहीं करेंगे, मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता।" उन्होंने कहा "लेकिन टेलीविजन पर टिप्पणीकारों को लगता है कि, जहां तक रियल एस्टेट का सवाल है, इंडेक्सेशन लाभ हटा दिया गया है, और 23 जुलाई, 2024 के बाद कोई भी बिक्री इंडेक्सेशन के लाभ के बिना होगी। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने ऐसे घर खरीदे हैं जिनके मूल्य में वृद्धि हुई है, उन्हें निश्चित रूप से नुकसान होगा। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मैं कर परिवर्तनों के प्रभाव पर अपना निर्णय सुरक्षित रखूंगा।"
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए मानक कटौती को 50 प्रतिशत बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया। वहीं नई आयकर व्यवस्था के तहत कर स्लैब में बदलाव किया, बदलाव इसलिए ताकि वेतनभोगी वर्ग के हाथों में खपत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अधिक पैसा उपलब्ध कराया जा सके। पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि दो आयकर व्यवस्थाएं रखना बहुत की बुरा विचार है। उन्होंने कहा, "यदि आप नई कर व्यवस्था लागू करना चाहते हैं, तो आपको इसकी घोषणा पहले ही कर देनी चाहिए और जनता को बताना चाहिए कि इस वित्तीय वर्ष से सभी को नई कर व्यवस्था अपनानी होगी। दो कर व्यवस्थाएं अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि इससे कर मध्यस्थता की स्थिति पैदा होगी और लोग भ्रमित हो जाएंगे कि उन्हें पुरानी व्यवस्था में ही रहना चाहिए या नई व्यवस्था में जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया है, आप एक बार कर बदल सकते हैं और वापस आ सकते हैं। लेकिन अगर आप दूसरी बार कर बदलते हैं, तो आप वापस नहीं आ सकते। मैं इस बात से पूरी तरह से भ्रमित हूं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उन्होंने इस बजट में नई कर व्यवस्था में जाने के लिए बहुत प्रोत्साहन दिया है। उन्होंने पिछले बजट में ऐसा किया था। इस बार उन्होंने स्लैब बढ़ाकर केवल कर प्रभाव को कम किया है। लेकिन इससे केवल 0-20 प्रतिशत कर ब्रैकेट वाले लोगों को ही लाभ होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि "मुझे नहीं लगता कि इससे उस ब्रैकेट से ऊपर के किसी व्यक्ति को लाभ होगा। मैं दो-कर व्यवस्था का समर्थन नहीं करूंगा।"
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गौर से पढ़ें बारी प्रिंट अक्षर
वहीं पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कहा, "यह भ्रम की ही स्थिति ही है। उन्होंने धारा 48 के दूसरे प्रावधान को हटा दिया। लेकिन तीसरा प्रावधान दूसरे प्रावधान को संदर्भित करता है। इसलिए जब तक आप वित्त विधेयक के बारीक प्रिंट को ध्यान से नहीं पढ़ेंगे और उसका विश्लेषण नहीं करेंगे, मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता।" उन्होंने कहा "लेकिन टेलीविजन पर टिप्पणीकारों को लगता है कि, जहां तक रियल एस्टेट का सवाल है, इंडेक्सेशन लाभ हटा दिया गया है, और 23 जुलाई, 2024 के बाद कोई भी बिक्री इंडेक्सेशन के लाभ के बिना होगी। बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने ऐसे घर खरीदे हैं जिनके मूल्य में वृद्धि हुई है, उन्हें निश्चित रूप से नुकसान होगा। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मैं कर परिवर्तनों के प्रभाव पर अपना निर्णय सुरक्षित रखूंगा।"