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Biz Updates: आभूषण ऋण को लेकर RBI के नए नियम पर कांग्रेस सांसद चिंतित, वित्त मंत्री से की नीति बदलने की मांग
Wed, 19 Mar 2025 10:37 PM IST
बशु जैन
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 19 Mar 2025 10:37 PM IST
सार
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आभूषण ऋण के पुर्नभुगतान को लेकर रिजर्व बैंक की ओर से किए गए नीतिगत बदलावों पर चिंता जताई है। सांसद ने वित्त मंत्री से नीति में हुए बदलाव के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। पढ़िए कारोबार जगत की प्रमुख खबरें...।
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बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आभूषण ऋण के पुर्नभुगतान को लेकर रिजर्व बैंक की ओर से किए गए नीतिगत बदलावों पर चिंता जताई है। सांसद ने वित्त मंत्री से नीति में हुए बदलाव के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि आभूषण ऋण को चुकाने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में नीतिगत बदलाव किए हैं। इसका छोटे व्यापारियों, किसानों और कम आय वाले व्यक्तियों सहित समाज के कमजोर वर्गों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
सांसद ने कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत ग्राहकों को ऋण अवधि के दौरान अपने आभूषण ऋण पर केवल अर्जित ब्याज चुकाने की अनुमति थी। ऋण अवधि के अंत में उधारकर्ता पूरी मूल राशि चुकाए बिना अपने ऋण का नवीनीकरण करा सकते थे। इससे धन की तत्काल आवश्यकता वाले लोगों को वित्तीय राहत मिली है। इसके चलते छोटे व्यवसाय और व्यक्ति को अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सके।
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ये भी पढ़ें: 'वैश्विक व्यापार तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है' आरबीआई के बुलेटिन में किया गया दावा
टैगोर ने कहा कि अब नए नियम के अनुसार ग्राहकों को लोन अवधि के अंत में ब्याज सहित पूरी मूल राशि चुकानी होगी। इसके बाद ही वे अपने गहनों को नए लोन के लिए रिन्यू या गिरवी रख सकते हैं। इस बदलाव ने चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इससे उन उधारकर्ताओं के लिए काफी मुश्किलें पैदा होने की संभावना है जो पहले से ही वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के लोग आपातकालीन निधियों के लिए गहनों के ऋण पर निर्भर हैं। उनके पास एक बार में मूलधन और ब्याज दोनों चुकाने की वित्तीय क्षमता नहीं है। नए नियम से कई लोगों के लिए वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है।
तमिलनाडु से सांसद ने कहा कि छोटे व्यवसाय, किसान और कम आय वाले परिवार विशेष रूप से इससे प्रभावित होंगे, क्योंकि अचानक पुनर्भुगतान की मांग उन्हें ऋण चुकाने में चूक करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो सकती है और वे और अधिक कर्ज में डूब सकते हैं।
ये भी पढ़ें: सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, 92 हजार के करीब; अंतरराष्ट्रीय बाजार में USD 3000 के पार
सांसद ने वित्त मंत्री से कहा कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और आरबीआई से इस नियम पर पुनर्विचार करने या इसमें संशोधन करने का अनुरोध करें। इस पर पुनर्विचार करने से न केवल समाज के कमजोर वर्गों को राहत मिलेगी, बल्कि आभूषण ऋण उन लोगों के लिए सुलभ रहेगा जिन्हें अपने अस्तित्व और आजीविका के लिए धन की तत्काल आवश्यकता है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले को जल्द से जल्द देखें और इस नई नीति के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि आभूषण ऋण को चुकाने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में नीतिगत बदलाव किए हैं। इसका छोटे व्यापारियों, किसानों और कम आय वाले व्यक्तियों सहित समाज के कमजोर वर्गों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
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सांसद ने कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत ग्राहकों को ऋण अवधि के दौरान अपने आभूषण ऋण पर केवल अर्जित ब्याज चुकाने की अनुमति थी। ऋण अवधि के अंत में उधारकर्ता पूरी मूल राशि चुकाए बिना अपने ऋण का नवीनीकरण करा सकते थे। इससे धन की तत्काल आवश्यकता वाले लोगों को वित्तीय राहत मिली है। इसके चलते छोटे व्यवसाय और व्यक्ति को अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सके।
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टैगोर ने कहा कि अब नए नियम के अनुसार ग्राहकों को लोन अवधि के अंत में ब्याज सहित पूरी मूल राशि चुकानी होगी। इसके बाद ही वे अपने गहनों को नए लोन के लिए रिन्यू या गिरवी रख सकते हैं। इस बदलाव ने चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इससे उन उधारकर्ताओं के लिए काफी मुश्किलें पैदा होने की संभावना है जो पहले से ही वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के लोग आपातकालीन निधियों के लिए गहनों के ऋण पर निर्भर हैं। उनके पास एक बार में मूलधन और ब्याज दोनों चुकाने की वित्तीय क्षमता नहीं है। नए नियम से कई लोगों के लिए वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है।
तमिलनाडु से सांसद ने कहा कि छोटे व्यवसाय, किसान और कम आय वाले परिवार विशेष रूप से इससे प्रभावित होंगे, क्योंकि अचानक पुनर्भुगतान की मांग उन्हें ऋण चुकाने में चूक करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो सकती है और वे और अधिक कर्ज में डूब सकते हैं।
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सांसद ने वित्त मंत्री से कहा कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और आरबीआई से इस नियम पर पुनर्विचार करने या इसमें संशोधन करने का अनुरोध करें। इस पर पुनर्विचार करने से न केवल समाज के कमजोर वर्गों को राहत मिलेगी, बल्कि आभूषण ऋण उन लोगों के लिए सुलभ रहेगा जिन्हें अपने अस्तित्व और आजीविका के लिए धन की तत्काल आवश्यकता है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले को जल्द से जल्द देखें और इस नई नीति के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
बोइंग कंपनी ने भारतीय स्टार्टअप के साथ किया समझौता
एक बोइंग कंपनी ने भारतीय मानवरहित सिस्टम स्टार्ट-अप के साथ सतही जहाजों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए समझौता किया है। बोइंग के लिक्विड रोबोटिक्स और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के बीच समझौता रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए संयुक्त यूएस-इंडिया रोडमैप पर हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य विनिर्माण, सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी, महासागर परीक्षण और वेव ग्लाइडर एएसवी प्लेटफॉर्म के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) क्षमता की स्थापना के माध्यम से अंडरसी डोमेन जागरूकता को बढ़ाना है। बोइंग इंडिया और साउथ एशिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और हम अपने सहयोग को गहरा करने में अपार संभावनाएं देखते हैं। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के साथ यह साझेदारी भारत में महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो पिछले महीने यूएस-इंडिया ज्वाइंट लीडर्स स्टेटमेंट में उल्लिखित यूएस और भारतीय सरकारों के सहयोगी दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से संरेखित है।
एक बोइंग कंपनी ने भारतीय मानवरहित सिस्टम स्टार्ट-अप के साथ सतही जहाजों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए समझौता किया है। बोइंग के लिक्विड रोबोटिक्स और सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के बीच समझौता रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए संयुक्त यूएस-इंडिया रोडमैप पर हुआ है। इस साझेदारी का उद्देश्य विनिर्माण, सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी, महासागर परीक्षण और वेव ग्लाइडर एएसवी प्लेटफॉर्म के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) क्षमता की स्थापना के माध्यम से अंडरसी डोमेन जागरूकता को बढ़ाना है। बोइंग इंडिया और साउथ एशिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और हम अपने सहयोग को गहरा करने में अपार संभावनाएं देखते हैं। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के साथ यह साझेदारी भारत में महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो पिछले महीने यूएस-इंडिया ज्वाइंट लीडर्स स्टेटमेंट में उल्लिखित यूएस और भारतीय सरकारों के सहयोगी दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से संरेखित है।
आईटी और साइबर संबंधी जुड़े जोखिमों के खिलाफ सतर्क रहें शहरी सहकारी बैंक
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को शहरी सहकारी बैंकों से आईटी और साइबर संबंधी जोखिमों के खिलाफ सतर्क रहने के लिए कहा। गवर्नर ने देश के विभिन्न हिस्सों के शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के अध्यक्षों, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की। आरबीआई ने बताया कि गवर्नर ने जमीनी स्तर पर लोगों की सेवा करने और वित्तीय समावेशन को गहरा करने में यूसीबी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक इस क्षेत्र को अपनी विकास महत्वाकांक्षाओं में समर्थन देना जारी रखेगा और इस बात पर जोर दिया कि यूसीबी को भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को शहरी सहकारी बैंकों से आईटी और साइबर संबंधी जोखिमों के खिलाफ सतर्क रहने के लिए कहा। गवर्नर ने देश के विभिन्न हिस्सों के शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के अध्यक्षों, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की। आरबीआई ने बताया कि गवर्नर ने जमीनी स्तर पर लोगों की सेवा करने और वित्तीय समावेशन को गहरा करने में यूसीबी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक इस क्षेत्र को अपनी विकास महत्वाकांक्षाओं में समर्थन देना जारी रखेगा और इस बात पर जोर दिया कि यूसीबी को भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।
न्यू इंडिया को-ऑप बैंक के पूर्व चेयरमैन व पत्नी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष हीरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। दोनों पिछले महीने 122 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आने से ठीक पहले देश छोड़कर भाग गए थे। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा, बैंक के पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हीरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु इस मामले में वांछित आरोपी हैं। वे क्रमशः 26 जनवरी और 10 फरवरी को देश छोड़कर चले गए। दोनों देश से बाहर हैं और मामले की जांच के लिए उनका पता लगाना जरूरी था, इसलिए उनके खिलाफ पहले ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया गया था। मामले की जांच करते हुए ईओडब्ल्यू ने दंपती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के लिए अदालत में आवेदन दिया था। इसके अनुरूप न्यायालय ने दंपती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष हीरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। दोनों पिछले महीने 122 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आने से ठीक पहले देश छोड़कर भाग गए थे। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा, बैंक के पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हीरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु इस मामले में वांछित आरोपी हैं। वे क्रमशः 26 जनवरी और 10 फरवरी को देश छोड़कर चले गए। दोनों देश से बाहर हैं और मामले की जांच के लिए उनका पता लगाना जरूरी था, इसलिए उनके खिलाफ पहले ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया गया था। मामले की जांच करते हुए ईओडब्ल्यू ने दंपती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के लिए अदालत में आवेदन दिया था। इसके अनुरूप न्यायालय ने दंपती के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
वैश्विक क्षमता केंद्र 9.8 फीसदी वेतन वृद्धि के लिए तैयार: रिपोर्ट में दावा
देश में स्थापित वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) अगले 12 महीनों में 9.8 प्रतिशत वेतन वृद्धि के लिए तैयार हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र मांगों के अनुकूल ढल रहे हैं और व्यापक आर्थिक चुनौतियों से निपट रहे हैं। जीसीसी वेतन समानता और विकास में पारंपरिक आईटी सेवाओं से आगे हैं। एनएलबी सर्विसेज की 'इंडियाज टैलेंट टेकऑफ - द जीसीसी 4.0 स्टोरी की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 12 महीनों में 9.8 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने की उम्मीद है। एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलग ने कहा कि भारत में दुनिया के 55 प्रतिशत से अधिक जीसीसी की मेजबानी करने और 2030 तक 110 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार आकार तक पहुंचने का अनुमान है। ये केंद्र लागत दक्षता और विशाल प्रतिभा पूल तक पहुंच की तलाश करने वाले संगठनों के लिए महत्वपूर्ण नोड बन गए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत गति के बावजूद लिंग आधारित असमानताओं पर अभी भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
देश में स्थापित वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) अगले 12 महीनों में 9.8 प्रतिशत वेतन वृद्धि के लिए तैयार हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र मांगों के अनुकूल ढल रहे हैं और व्यापक आर्थिक चुनौतियों से निपट रहे हैं। जीसीसी वेतन समानता और विकास में पारंपरिक आईटी सेवाओं से आगे हैं। एनएलबी सर्विसेज की 'इंडियाज टैलेंट टेकऑफ - द जीसीसी 4.0 स्टोरी की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 12 महीनों में 9.8 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने की उम्मीद है। एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलग ने कहा कि भारत में दुनिया के 55 प्रतिशत से अधिक जीसीसी की मेजबानी करने और 2030 तक 110 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार आकार तक पहुंचने का अनुमान है। ये केंद्र लागत दक्षता और विशाल प्रतिभा पूल तक पहुंच की तलाश करने वाले संगठनों के लिए महत्वपूर्ण नोड बन गए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत गति के बावजूद लिंग आधारित असमानताओं पर अभी भी ध्यान देने की आवश्यकता है।