Biz Updates: महुआ मोइत्रा-सेबी मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, हाईकोर्ट से पूर्व सेबी प्रमुख बुच को राहत
Biz Updates: सुप्रीम कोर्ट ने सांसद महुआ मोइत्रा को सेबी से जुड़े मामले में नियामक को विस्तृत जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट से पूर्व सेबी प्रमुख और पांच अन्य को राहत मिल गई है। आइए इस बारे में जानें।
विस्तार
सर्वोच्च न्यायालय ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से दो श्रेणियों के निवेशों, वैकल्पिक निवेश, फंड और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के संबंध में सेबी की ओर से गैर-नियमन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता को प्रतिवादी (सेबी) के समक्ष विस्तृत जानकारी पेश करने का आदेश दिया जाता है। जिसमें इस रिट याचिका में उल्लिखित शिकायतों को व्यक्त किया गया है। यदि प्रतिवादी के समक्ष ऐसा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।"
पूर्व सेबी चीफ व पांच अन्य को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत
पूर्व सेबी चीफ माधवी पुरी बुच को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने विशेष अदालत के एक आदेश पर लगी अंतरिम रोक की अवधि बढ़ा दी है। विदेश अदालत ने अपने आदेश में बुच और पांच अन्य लोगों के खिलाफ शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और नियामकीय उल्लंघन के आरोप में केस दर्ज करने का निर्देश दिया था। पिछले महीने हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति शिवकुमार डिगे ने मंगलवार को इस मामले में कहा कि मूल शिकायतकर्ता ने हलफनामा दायर किया है और उन्होंने बुच और अन्य को उसका अध्ययन करने के लिए समय दिया। न्यायमूर्ति डिगे ने कहा, "पहले दी गई अंतरिम राहत अगले आदेश तक जारी रहेगी।" उन्होंने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख तय की।
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पिछले महीने बुच और पांच अन्य लोगों ने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन लोगों में बुच के अलावा भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) के तीन वर्तमान पूर्णकालिक निदेशकों अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी व कमलेश चंद्र वार्ष्णेय, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररामन राममूर्ति और बीएसई के पूर्व अध्यक्ष व सार्वजनिक हित निदेशक प्रमोद अग्रवाल शामिल हैं।
याचिकाओं में विशेष अदालत की ओर से पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को 1994 में बीएसई में एक कंपनी को सूचीबद्ध करते समय धोखाधड़ी के कुछ आरोपों के कारण उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। याचिकाओं में दावा किया गया कि विशेष अदालत का आदेश "स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण, अवैध और अधिकार क्षेत्र के बाहर था।
विशेष अदालत ने यह आदेश मीडिया रिपोर्टर सपन श्रीवास्तव की ओर से दायर शिकायत पर पारित किया। जिसमें आरोपियों की ओर से बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार से जुड़े कथित अपराधों की जांच की मांग की गई थी।
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विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश एसई बांगर ने 1 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि पहली नजर में नियामकीय चूक और मिलीभगत के साक्ष्य हैं, इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। एसीबी अदालत ने यह भी कहा था कि वह जांच की निगरानी करेगी। अदालत ने 30 दिनों के भीतर मामले में स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।