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RBI Report: वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकिंग धोखाधड़ी में बड़ा इजाफा, इसमें शामिल राशि आठ गुना बढ़ी

Thu, 26 Dec 2024 06:10 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 26 Dec 2024 06:10 PM IST
सार

RBI Report: भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2023-24 जारी की है। यह रिपोर्ट 2023-24 और 2024-25 के दौरान अब तक वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों सहित बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन के बारे में बताती है।

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Banking frauds rise in H1FY25, amount involved jumps 8-time: RBI report
रिजर्व बैंक की रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला / फ्री पिक

विस्तार

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंक धोखाधड़ी के मामले उल्लेखनीय रूप से बढ़े हैं। इनकी संख्या  18,461 हो गई है, जबकि इसमें शामिल राशि आठ गुना से अधिक बढ़कर 21,367 करोड़ रुपये हो गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से गुरुवार को इससे जुड़े आंकड़े जारी किए गए।

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भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2023-24 जारी की है। यह रिपोर्ट 2023-24 और 2024-25 के दौरान अब तक वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों सहित बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन के बारे में बताती है।
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रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-सितंबर के दौरान बैंकिंग धोखाधड़ी की संख्या 18,461 थी, इसमें शामिल राशि 21,367 करोड़ रुपये थी। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में ऐसे मामलों की संख्या 14,480 थी, जिनमें 2,623 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
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रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग धोखाधड़ी से वित्तीय प्रणाली के लिए प्रतिष्ठा जोखिम, परिचालन जोखिम, व्यावसायिक जोखिम और वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव के साथ ग्राहक विश्वास में कमी जैसी चुनौतियां पैदा होती है।

आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2023-24 वित्तीय वर्ष के संबंध में, आरबीआई ने कहा कि बैंकों की ओर से रिपोर्टिंग की तारीख के आधार पर, धोखाधड़ी में शामिल राशि एक दशक में सबसे कम थी, जबकि औसत मूल्य 16 वर्षों में सबसे कम था।

धोखाधड़ी की घटना की तारीख के आधार पर, 2023-24 में, कुल में इंटरनेट और कार्ड धोखाधड़ी की हिस्सेदारी राशि के संदर्भ में 44.7 प्रतिशत और मामलों की संख्या के संदर्भ में 85.3 प्रतिशत थी।

2023-24 में, निजी क्षेत्र के बैंकों (PVB) द्वारा रिपोर्ट किए गए धोखाधड़ी के मामलों की संख्या कुल का 67.1 प्रतिशत थी। हालांकि, शामिल राशि के संदर्भ में, 2023-24 में सभी बैंक समूहों के लिए कार्ड और इंटरनेट धोखाधड़ी का सबसे अधिक हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) का था।

विदेशी बैंकों और लघु वित्त बैंकों को छोड़कर सभी बैंक समूहों में 2023-24 के दौरान विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लगाए गए जुर्माने की घटनाओं में वृद्धि हुई। वर्ष 2023-24 में कुल जुर्माना राशि दोगुनी से अधिक होकर 86.1 करोड़ रुपये हो गई, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों का योगदान सबसे अधिक रहा। वर्ष के दौरान सहकारी बैंकों पर लगाए गए जुर्माने की राशि में कमी आई, जबकि जुर्माना लगाने के मामलों में वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई रिपोर्टों से पता चलता है कि डिजिटल ऋण क्षेत्र में बेईमान खिलाड़ियों की मौजूदगी जारी है, जो गलत तरीके से विनियमित संस्थाओं के साथ जुड़ाव का दावा करते हैं।

किसी विनियमित संस्था के साथ डिजिटल ऋण ऐप (डीएलए) के जुड़ाव के दावों के सत्यापन में ग्राहकों की सहायता के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक विनियमित संस्थाओं की तैनात डीएलए का एक सार्वजनिक संग्रह बनाने की प्रक्रिया में है।

इस रिपोजिटरी में भारतीय रिजर्व बैंक के किसी हस्तक्षेप के बिना विनियमित संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत आंकड़े शामिल होंगे तथा विनियमित संस्थाओं को, जब भी कोई नया डीएलए जोड़ा जाएगा या कोई मौजूदा डीएलए हटाया जाएगा, उसे अद्यतन करना होगा।

आरबीआई ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के कई मामले ग्राहकों पर सोशल इंजीनियरिंग हमलों के परिणामस्वरूप होते हैं, लेकिन इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए खच्चर बैंक खातों के उपयोग में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

आरबीआई ने कहा, "इससे बैंकों को न केवल गंभीर वित्तीय और परिचालन जोखिम का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को भी खतरा होता है। इसलिए बैंकों को बेईमान गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने ग्राहकों को जोड़ने और लेनदेन निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है।" इसके लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के साथ प्रभावी समन्वय की भी आवश्यकता है ताकि प्रणालीगत स्तर पर होने वाली चिंताओं का पता लगाया जा सके और समय रहते उन पर अंकुश लगाया जा सके।


रिजर्व बैंक ने आगे कहा कि वह लेनदेन निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने तथा खच्चर खातों को नियंत्रित करने और डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने को सुनिश्चित करने के लिए बैंकों और एलईए के साथ काम कर रहा है।

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