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एविएशन इंडस्ट्री को कोरोना की वैक्सीन का इंतजार, 2019 जैसी स्थिति आने में लगेंगे 1000 दिन!

Tue, 12 May 2020 06:59 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 12 May 2020 06:59 PM IST
सार

  • एविएशन इंडस्ट्री को रोजाना डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ रुपये का नुकसान
  • एयरलाइंस में तकरीबन लगभग 17,000 करोड़ रुपये का नुकसान का आकलन
  • मार्च 2021 तक 50 फीसदी फ्लाइट ही चालू होने के आसार
  • छह सौ हवाई जहाजों में से सौ से अधिक तो लीज या किराये पर

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Aviation industry is waiting of coronavirus vaccine, the situation like 2019 will take 1000 days!
Airport - फोटो : Social Media (सांकेतिक)

विस्तार

दुनिया के दूसरे देशों की तरह भारतीय एविएशन इंडस्ट्री भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है। मौजूदा समय में यह इंडस्ट्री भारी नुकसान उठा रही है। धराशाही हुए एविएशन उद्योग को उठाने में कोरोना की वैक्सीन ही सबसे ज्यादा कारगर साबित होगी।
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एविएशन सेक्टर को पहले जैसी स्थिति में आने के लिए कम से कम 1000 दिन लग जाएंगे। स्टार एयर कंसल्टेशन के हेड हर्षवर्धन और बर्ड ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अंकुर भाटिया कहते हैं कि इस स्थिति में सबसे बड़ा काम लोगों में आत्मविश्वास पैदा करना होगा।

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आज एविएशन इंडस्ट्री को रोजाना डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। नागर विमानन मंत्रालय के एक आला अधिकारी भी यही कहते हैं कि इस साल दो ही चांस हैं। एक, फंसे हुए यात्रियों को निकालने का शॉर्ट टर्म बिजनेस और दूसरा दशहरा, दिवाली व क्रिसमिस जैसे त्योहार हैं।

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तीन साल का वक्त लगेगा 

अमेरिका स्थित विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने भी कहा है कि एविएशन इंडस्ट्री को 2019 के स्तर तक पहुंचने के लिए कम से कम 3 साल लग सकते हैं। बोइंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेव कैलहोन ने हाल ही में कहा था, फंडामेंटल ग्रोथ ड्राइवर बरकरार हैं, लेकिन 2019 के स्तर पर हवाई यात्रा के लिए 2-3 साल का वक्त लगेगा।


दीर्घकालिक विकास के रुझान तक लौटने में कुछ साल का लगना तय है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, विमानन उद्योग 24,000-25,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे के साथ इस वित्त वर्ष को भारी नुकसान की ओर ले जाएगा।

इसमें एयरलाइंस का 70 फीसदी से अधिक का नुकसान होगा। यानी लगभग 17,000 करोड़ रुपये का नुकसान अकेले एयरलाइंस को उठाना पड़ेगा। अगर मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में यात्रा प्रतिबंध लंबे समय तक रहता है तो इस वजह से भारी नुकसान होना तय है।

कोरोना की वैक्सीन से मिलेगी 'ऑक्सीजन'

एविएशन सेक्टर के एक्सपर्ट और बर्ड ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अंकुर भाटिया कहते हैं कि कोरोना की वैक्सीन जितना जल्द आएगी, वैसे ही यह इंडस्ट्री ऊपर उठ जाएगी। यहां बात विश्वास की है। लोगों को डर है कि कोरोना महामारी फैल रही है। वे कोई भी हवाई यात्रा करने से परहेज करेंगे।

बड़ी-बड़ी कंपनियां ट्रेवल को लेकर नई पॉलिसी बना रही हैं। जूम या दूसरे प्लेटफार्म पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों और ट्रेनिंग का शेड्यूल तय हो रहा है। सालभर तो लोग अपनी छुट्टियों पर बाहर नहीं जाना चाहेंगे। शादी समारोह भी सीमित हो चले हैं।

केवल आपातकालीन ट्रेवल यानी 10-15 फीसदी रहेगा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद पीक आएगा। वो इसलिए क्योंकि फंसे हुए लोगों को इधर से उधर पहुंचाना है। बाद में ट्रैवल की गति धीमी होती जाएगी। बेल आउट पैकेज से भी काम नहीं चलेगा।

अब लोगों का नजरिया पहचानना होगा। खुद को भी बदलना पड़ेगा। हालांकि सरकार को एविएशन कंपनियों में सैलरी पैकेज के लिए जरूर सोचना चाहिए।

अभी तो झटके लगने बाकी हैं

स्टार एयर कंसल्टेशन के हेड हर्षवर्धन बताते हैं कि आम आदमी की छोड़ो, खास आदमी भी बाहर निकलने को तैयार नहीं है। मार्च के बाद एविएशन कारोबार जीरो है। कुछ एयरपोर्ट, जहां आपातकालीन फ्लाइट आ रही हैं, वहीं पर 10 फीसदी कामकाज हो रहा है।

अभी तो लोग डरे हैं, सहमे हैं। देश में हवाई यात्रा का कारोबार मेट्रो सिटी से जुड़ा है। अभी बहुत से मेट्रो सिटी तो कोरोना के रेड जोन में हैं। यहां पर फ्लाइट कब शुरू होंगी, कुछ पता नहीं है। दूसरे देशों में कब मंजूरी मिलेगी, इस बाबत कुछ कहा नहीं जा सकता।

बहुत से हवाईजहाज लीज पर हैं। इनकी कॉस्ट और स्टाफ की सैलरी का संकट है। हवाई जहाज उड़े या न उड़े, उसकी मेंटेनेंस का खर्च तो उठाना ही है। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन जैसे देश एविएशन इंडस्ट्री के कर्मियों की सेलरी के लिए आर्थिक पैकेज या सब्सिडी दे रहे हैं।

मार्च 2021 तक 50 फीसदी फ्लाइट ही चालू होने के आसार हैं। देश में कारोबार को पटरी पर आने में तीन साल लग सकते हैं। जितनी जल्दी लोगों की दहशत दूर होगी, उतना ही एविएशन इंडस्ट्री के लिए अच्छा है।

अभी तो एक तिहाई विमान ही उड़ान भर सकेंगे

नागर विमानन मंत्रालय के एक अधिकारी बताते हैं कि अभी तो लाइफलाइन उड़ान ही जारी हैं। लॉकडाउन के बाद जब सामान्य विमान सेवा शुरू होगी, तो एक तिहाई जहाज ही उड़ सकेंगे। छह सौ हवाई जहाजों में से सौ से अधिक तो लीज या किराये पर लिए गए हैं। हो सकता है कि ये जहाज रिकॉल कर लिए जाएं।

पायलटों की एक दिन की स्ट्राइक जब एविएशन इंडस्ट्री के पसीने छुड़ा देती है, तो अब नुकसान का अंदाजा लगा सकते हैं। अब दूसरे देशों में फंसे लोगों को लाया जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना भी एविएशन कंपनियों के लिए गले की फांस बन गया है।



वे असमंजस में हैं कि आधी सीटें खाली कैसे रखी जाएं। हालांकि अभी दो दिन में जो फ्लाइट आई हैं, उनमें सभी सीटें भरी हुई थीं। दशहरा, दिवाली और क्रिसमस जैसे त्योहार पर ही थोड़ी उम्मीद टिकी है। ये भी तब है, जब कोरोना को लेकर लोगों में फैली दहशत दूर होगी।

 

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