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निसान के फैसले के बाद ऑटो सेक्टर में भारी छंटनी के संकेत, 300 से ज्यादा शोरूम पर जड़ चुका है ताला

Fri, 26 Jul 2019 01:20 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 26 Jul 2019 01:20 PM IST
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auto dealers closed more than 300 showrooms, unemployment fears looms for 25k people
treo nissan closed down - फोटो : Justdial

कम बिक्री के चलते लगातार घाटा सह रही दुनिया की टॉप कार निर्माता कंपनी निसान मोटर्स ने ऐलान किया है कि वह अगले तीन सालों में 12,500 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है, जिसके बाद दुनियाभर के ऑटो सेक्टर में हड़कंप मच गया है। वहीं निसान के इस फैसले की तपिश में भारत का ऑटो सेक्टर भी आएगा। कंपनी भारत में भी 1700 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। इधर, निसान के एलान से पहले ही भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी से जूझ रहा है और देश की बाकी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी छंटनी का रास्ता अख्तियार कर सकती हैं।

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निसान के 38 शोरूम बंद

इसकी वजह है कि मई, 2019 तक कई कार कंपनियों ने अपने शोरूम बंद कर दिए हैं या फिर कार डीलरों ने कम बिक्री और ज्यादा इंंवेट्री के बोझ के चलते काम समटने में ही भलाई समझी है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो सालों में 200 से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और ट्रक डीलरों ने अपने 300 से ज्यादा शोरूम्स का शटर गिरा दिया है। इनमें 38 निसान, 23 ह्यूंदै और 9 से 12 डीलर मारुति, महिंद्रा, होंडा और टाटा के हैं। आंकड़ों के मुताबिक अकेले महाराष्ट्र में 56 और बिहार में 26 शोरूम्स पर ताला लग चुका है। वहीं मुंबई में 26, पुणे में 21 और दिल्ली-एनसीआर में 35 से ज्यादा शोरूम बंद हो चुके हैं। अनुमान के मुताबिक इन शोरूम्स के बंद होने से अभी तक तीन हजार लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं, वहीं निसान के फैसले के बाद से 1700 और कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट के बादल खड़े हो गए हैं।

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दिल्ली-एनसीआर में बंद हो चुके हैं ये शोरूम्स

  • ऑडी दिल्ली, वेस्ट
  • स्टर्लिंग महिंद्रा - 4 आउटलेट
  • स्टर्लिंग होंडा, ईस्ट दिल्ली
  • राज ह्यूंदै, ईस्ट दिल्ली
  • रिद्धि फोर्ड
  • हाना मोटर प्लाजा ह्यूंदै
  • डिलाइट होंडा फरीदाबाद
  • डिलाइट होंडा मथुरा रोड
  • ग्रेस टोयोटा साकेत
  • ग्रेस टोयोटा गुरुग्राम
  • ग्रेस टोयोटा रेवाड़ी
  • ग्लैक्सी टोयोटा डिफेंस कालोनी 
  • ऑडी गुरुग्राम
  • ऑडी सेंट्र्ल
  • पोर्श गुरुग्राम
  • सिद्धिविनायक मारुति बहादुरगढ़
  • रेनो वेस्ट मोती नगर
  • रेनो साउथ ईस्ट ऑफ कैलाश
  • रेनो अधचिनी दिल्ली
  • रेनो गुरुग्राम सोहना रोड
  • रेनो नोएडा
  • पर्ल होंडा गुरुग्राम - 2 आउटलेट
  • पर्ल होंडा नोएडा
  • नवाब स्कोडा नोएडा
  • जय स्कोडा पीरागढ़ी
  • जय स्कोडा भीकाजी कामा प्लेस
  • मार्केटिंग टाइम्स मारुति जीके-2
  • फॉक्सवैगन पीरागढ़ी
  • फॉक्सवैगन फरीदाबाद 
  • फॉक्सवैगन साकेत
  • फॉक्सवैगन ओखला
  • ट्रियो निसान
  • पहावा टाटा मोटर्स सफदरजंग
  • पाहवा फोर्ड लाजपतनगर
  • लेक्सस गुरुग्राम

केवल 30 फीसदी शोरूम्स मुनाफे में

ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि देश में इन दिनों 15 हजार ऑथराइज्ड डीलर हैं, जो देशभर में 25 हजार आउटलेट्स को मैनेज करते हैं। वहीं इनमें से केवल 30 फीसदी ही मुनाफे में हैं। जबकि इनमें से 30 फीसदी का प्रोफिट ही केवल एक से दो फीसदी तक है।  

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छह महीने पुराना स्टॉक

कई बड़े और छोटे डीलरों के पास छह महीने पुराना स्टॉक पड़ा हुआ है, जो निकल नहीं रहा है। ऐसे में इन डीलरों का शोरूम और कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए पैसे देने का खर्चा भी नहीं पूरा हो रहा है। 

25 हजार लोगों की जाएगी नौकरी

ऑटो सेक्टर में 25 हजार लोगों की नौकरी जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बड़े शोरूम में 150 कर्मचारी और छोटे शोरूम में 60 कर्मचारी रहते हैं। एक बड़े डीलर के पास 12 से 15 शोरूम और छोटे के पास पांच शोरूम होते हैं। 

ऐसे चलती है गाड़ियों की डीलरशिप

जब एक कंपनी किसी को डीलर बनाती है तो फिर उसको कम से कम हर महीने 300 गाड़ियों की बिक्री करने का टारगेट दिया जाता है। वहीं वो 500 गाड़ियों का स्टॉक रख सकता है। डीलर को जो गाड़ियां मिलती हैं, उसके लिए उसे एडवांस में पेमेंट करना होता है। 

डीलरों को गाड़ियां कंपनी से लेने के लिए बैंक या फिर एनबीएफसी कंपनियों से फाइनेंस मिलता है। यह फाइनेंस छह महीनों के लिए होता है। डीलर गाड़ियों की बिक्री के आधार पर पैसा वापस करते हैं। जब तक बिक्री चलती रहती है, तब तक फाइनेंस कराने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है। 

बंद किया फाइनेंस

बिक्री न होने के चलते बैंकों व एनबीएफसी कंपनियों ने डीलरों को अब फाइनेंस करना बंद कर दिया है। बड़े शहरों में फिलहाल शोरूम बंद होना शुरू हो गए हैं। थोड़े दिनों में इसका असर छोटे शहरों व कस्बों में भी दिखने लगेगा। बैंकों का कहना है कि अगर गाड़ियों की बिक्री में इजाफा होता है तो फिर से फाइनेंस की सुविधा को शुरू किया जा सकता है। 
 

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