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GIFT CITY: आईएफएससी गिफ्ट सिटी से 409 कंपनियों का हो रहा संचालन, वित्त मंत्री ने सदन में क्या कहा, आइए जानें
Mon, 18 Aug 2025 02:37 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 18 Aug 2025 02:37 PM IST
सार
GIFT CITY: सरकार ने संसद में सोमवार को बताया गया कि 31 जुलाई, 2025 तक गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी यानी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (जीआईएफटी आईएफएससी) में 409 कंपनियां कार्यरत हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने आगे क्या कहा, आइए विस्तार से जानें।
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निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
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विस्तार
सरकार ने संसद में सोमवार को बताया गया कि 31 जुलाई, 2025 तक गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी यानी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (जीआईएफटी आईएफएससी) में 409 कंपनियां कार्यरत हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, "1 अक्तूबर, 2020 और 31 जुलाई, 2025 के बीच ऐसी कंपनियों की संख्या 82 से बढ़कर 409 हो गई है। इसके अलावा, बैंकिंग, परिसंपत्ति प्रबंधन और अन्य वित्तीय पारिस्थितिकी प्रणालियों को गिफ्ट आईएफएससी में शामिल और सक्षम किया गया है।"
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उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने गिफ्ट आईएफएससी के विकास के लिए कई प्रगतिशील नीतिगत उपाय किए हैं, जैसे - भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) के विकास और विनियमन के लिए एक एकीकृत वैधानिक नियामक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) की स्थापना इत्यादि।
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उन्होंने कहा कि गिफ्ट आईएफएससी में कारोबार को और अधिक सुगम बनाने के लिए सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम, 2005 के तहत विकास आयुक्त की शक्तियां अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) को सौंप दी हैं और आईएफएससी इकाइयों के लिए एकल खिड़की आईटी प्रणाली (एसडब्ल्यूआईटीएस) शुरू करने में सहायता की है।
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एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 के बाद सरकार ने ऋण को 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद के 61.4 प्रतिशत से घटाकर बजट अनुमान 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद के 56.1 प्रतिशत तक समेकित कर दिया है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक वर्ष राजकोषीय घाटे को इस तरह से बनाए रखना है कि केंद्र सरकार का ऋण कम होता रहे और 31 मार्च, 2031 तक ऋण सकल घरेलू उत्पाद के स्तर का लगभग 50±1 प्रतिशत हो जाए। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में बकाया ऋण/ऋण अनंतिम रूप से 185.94 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने कहा कि कमजोर वैश्विक व्यापार के बावजूद, भारत के निर्यात क्षेत्र ने लचीलापन दिखाया है। देश का समग्र निर्यात 2024-25 में 824.96 बिलियन अमरीकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक प्रवृत्ति चालू वित्त वर्ष में भी जारी रही है तथा प्रथम तिमाही के दौरान समग्र निर्यात में 5.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से अधिक के माल आयात के लिए कवर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह सतत व्यापक आर्थिक प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक और आर्थिक अनिश्चितताओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यापक और समावेशी आर्थिक विकास की गति को बनाए रखते हुए, आर्थिक अस्थिरता के प्रतिकूल प्रभावों से समाज के कमजोर वर्गों को बचाने के लिए ठोस उपाय किए हैं।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस), प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना जैसी प्रमुख योजनाएं बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने, आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और कमजोर वर्गों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए चलाई जा रही हैं।
इसके अलावे, कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित पहल इन प्रयासों को और सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक उपाय किए हैं, जिनमें पूंजीगत व्यय में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास, वित्तीय क्षेत्र में सुधार और व्यापार को आसान बनाने के लिए पहल शामिल हैं।