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Anil Ambani: अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने कहा, ईडी की ओर से की गई कुर्की की कार्रवाई से कारोबार पर असर नहीं
Tue, 04 Nov 2025 08:46 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 04 Nov 2025 08:46 PM IST
सार
ED Action on Anil Ambani: अनिल अंबानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कुर्क की गई अधिकांश संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशंस की हैं। यह कंपनी समाधान पेशेवर (आरपी) और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाली ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के नियंत्रण में है।
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अनिल अंबानी
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से 7,500 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क किए जाने का अनिल अंबानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के कारोबारी परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है। समूह ने मंगलवार को यह बात कही। ईडी ओर से यह कार्रवाई धन शोधन जांच के तहत की गई है।
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अनिल अंबानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कुर्की की कार्रवाई की गई। अधिकांश संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशंस की हैं। यह कंपनी समाधान पेशेवर (आरपी) और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाली ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के नियंत्रण में है।
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संघीय जांच एजेंसी ने 31 अक्तूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 42 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चार अलग-अलग अनंतिम आदेश जारी किए थे। इनमें मुंबई के पाली हिल में 66 वर्षीय अंबानी के पारिवारिक घर के अलावा उनकी समूह कंपनियों की अन्य आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां भी शामिल हैं। यह कुर्की रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके सहयोगियों से जुड़े मामलों से संबंधित है। इनमें 2017 और 2019 के बीच यस बैंक से लिए गए ऋणों का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया था।
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दोनों कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में कहा, "रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि किसी भी कंपनी के परिचालन, प्रदर्शन या भविष्य की संभावनाओं पर कोई भौतिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।"
फाइलिंग में कहा गया है कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर दोनों ही सामान्य रूप से काम कर रही हैं, तथा विकास, परिचालन उत्कृष्टता और सभी हितधारकों, विशेष रूप से 50 लाख से अधिक शेयरधारक परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
अनिल अंबानी के समूह ने कहा, "जब्त की गई संपत्तियों का सबसे बड़ा मूल्य रिलायंस कम्युनिकेशंस का है, जो 2019 से - यानी पिछले छह वर्षों से - रिलायंस समूह का हिस्सा नहीं है। कंपनी छह वर्षों से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) से गुज़र रही है। इसके समाधान से संबंधित सभी मामले वर्तमान में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं।"
फर्मों ने कहा कि अनिल डी अंबानी "किसी भी तरह से रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े नहीं हैं, और उन्होंने छह साल पहले 2019 में इस्तीफा दे दिया है"। बयान में कहा गया, "अनिल डी. अंबानी साढ़े तीन साल से अधिक समय से रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर या रिलायंस पावर के निदेशक मंडल में भी नहीं रहे हैं।"