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Tripura: त्रिपुरा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Thu, 09 May 2024 08:55 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 09 May 2024 08:55 PM IST
सार

Tripura: अदालत ने 22 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पक्ष में फैसला पारित किया, जिन्होंने ग्रेच्युटी लाभ की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। उन्होंने इस आधार पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि वे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के तहत इस विशिष्ट लाभ के हकदार थे।

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Anganwadi workers eligible for gratuity benefit: Tripura HC
त्रिपुरा हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

त्रिपुरा उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राज्य के सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पिछली तारीख से ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के दायरे में आएं। न्यायमूर्ति एस दत्ता पुरकायस्थ की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के अनुसार, आईसीडीएस योजना के तहत कार्यरत सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक, जिनमें सेवा से सेवानिवृत्त हुए लोग भी शामिल हैं, सेवानिवृत्ति प्राप्त करने पर ग्रेच्युटी राशि प्राप्त करने के पात्र होंगे। अधिवक्ता पुरुषुत्तम रॉय बर्मन, जिन्होंने मामले में 22 याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया उन्होंने एएनआई इसकी जानकारी दी।

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अदालत ने 22 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के पक्ष में फैसला पारित किया, जिन्होंने ग्रेच्युटी लाभ की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। उन्होंने इस आधार पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि वे ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के तहत इस विशिष्ट लाभ के हकदार थे।
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इससे पहले, सभी याचिकाकर्ताओं ने अपने उच्च प्राधिकारी जो कि सामाजिक कल्याण और सामाजिक शिक्षा विभाग है से लाभ मांगने का आग्रह किया था, लेकिन विभाग ने उनकी दलीलों को ठुकरा दिया था। उच्च न्यायालय ने उस विभागीय आदेश को भी रद्द कर दिया है जिसके आधार पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को ग्रेच्युटी लाभ से वंचित किया गया था।
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बर्मन ने बताया, माननीय उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से कहा है कि ग्रेच्युटी की राशि सेवा से सेवानिवृत्ति के 30 दिनों के भीतर भुगतान की जानी चाहिए और यदि देरी होती है तो राशि एक निश्चित ब्याज दर से बढ़ेगी। विभागीय आदेश जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता ग्रेच्युटी के लिए पात्र नहीं थे, को भी रद्द कर दिया गया।


आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के लिए फैसले को जीत बताते हुए, बर्मन ने कहा, "हम सभी जानते हैं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें जो भुगतान मिलता है वह एक सभ्य जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है।" वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार, उच्च न्यायालय ने गुजरात राज्य से संबंधित इसी तरह के एक मामले पर पहले पारित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया।

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