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CII Summit: यूपी अब बुलेट ट्रेन की रफ्तार से विकास के लिए तैयार, सीएम योगी ने पेश किया आर्थिक रोडमैप

Mon, 11 May 2026 12:28 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 11 May 2026 12:28 PM IST
सार

सीआईआई समिट 2026 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे के आर्थिक और औद्योगिक विकास का खाका पेश किया। समिट में अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी ने कहा कि 21वीं सदी में किसी देश की असली ताकत ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल क्षमता से तय होगी। पढ़ें निवेश, एमएसएमई और सुरक्षा से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

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CII Business Summit 2026: UP Ready for Bullet Train Economic Growth, CM Yogi Unveils Roadmap
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : UP Gov YT Channel

विस्तार

नई दिल्ली में आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन की एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पिछली सरकारों की कमियों को दूर कर विकास की एक मजबूत नींव तैयार कर ली है। उन्होंने दावा किया कि अब डबल इंजन की सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को 'बुलेट ट्रेन' की गति से आगे ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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सीएम योगी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राष्ट्र या राज्य की वास्तविक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता का विकास होने पर रोजगार, निवेश और समृद्धि में स्वतः ही वृद्धि होती है। दुनिया भर के संघर्षों के पीछे आर्थिक हितों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा करके आगे नहीं बढ़ सकता।

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माफिया राज का अंत और रूल ऑफ लॉ से सुधरा निवेश का माहौल

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पूर्व के हालातों की चर्चा करते हुए बताया कि एक समय उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। 2017 से पहले राज्य की पहचान प्रतिवर्ष होने वाले 300 से अधिक दंगों, 'गुंडा टैक्स', खराब सड़कों और लचर कानून-व्यवस्था से होती थी, जिसके कारण उद्यमी राज्य से पलायन करने को मजबूर थे। हालात इतने खराब थे कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रोक दिया था। सत्ता में आने के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना और 'रूल ऑफ लॉ' को लागू करना रही।

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मुख्यमंत्री ने कैराना का उदाहरण देते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की हत्या के बाद पलायन कर चुका परिवार अब अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के बाद लौट आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की पहली शर्त सुरक्षा है; आज उत्तर प्रदेश में माफियाओं का दुस्साहस समाप्त हो चुका है और बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी साझा किया कि उनके मठ प्रबंधन के अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन के अनुभव ने प्रदेश प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

एमएसएमई और पर्यटन बने राज्य की अर्थव्यवस्था के 'ग्रोथ इंजन'  

सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ-साथ राज्य सरकार ने नीतिगत पंगुता (पॉलिसी पैरालिसिस) को समाप्त कर कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए हैं। निवेश को गति देने और सेक्टोरल विकास के लिए राज्य में कई अहम कदम उठाए गए हैं:  

  • लैंड बैंक और नीतियां: बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने विशाल लैंड बैंक तैयार किया है और उद्योगों के संचालन के लिए स्पष्ट सेक्टोरल नीतियां बनाई हैं।  
  • एमएसएमई सेक्टर में उछाल: वर्तमान में राज्य में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो उत्पादन का आधार बनने के साथ-साथ लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार प्रदान कर रही हैं।  
  • ओडीओपी की सफलता: 2018 में शुरू की गई 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।  
  • पर्यटन में ऐतिहासिक वृद्धि: काशी, अयोध्या और मथुरा सहित सांस्कृतिक तथा धार्मिक सर्किट के विकास से पिछले वर्ष राज्य में 156 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जिनमें महाकुंभ के 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे।  

बीमारू राज्य से देश का ग्रोथ इंजन बनने तक का सफर  

11 मई के ऐतिहासिक महत्व (पोखरण परमाणु परीक्षण 'ऑपरेशन शक्ति' और सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा) का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि शक्ति और सामर्थ्य ही वैश्विक मानवता, करुणा व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत की यह सामरिक और आर्थिक शक्ति विश्व स्तर पर अपना प्रभाव छोड़ रही है। सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी, महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी और 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह सहित देश के शीर्ष उद्योगपतियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश अब अपनी पुरानी 'बीमारू' राज्य की छवि से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। उद्योगों को ठोस सुरक्षा, मजबूत कनेक्टिविटी और बेहतर सप्लाई चेन उपलब्ध कराते हुए यह राज्य अब देश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख 'ग्रोथ इंजन' बनकर उभर रहा है।

अदाणी बोले- सस्ती बिजली ही भविष्य की नींव

भारत की ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर सीआईआई समिट में गौतम अदाणी ने बड़ा विजन पेश किया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी भी देश की असली ताकत केवल उसकी सैन्य या आर्थिक क्षमता से नहीं, बल्कि ऊर्जा और तकनीकी आत्मनिर्भरता से तय होगी।

पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर क्या बोले?

हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि अब ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अलग-अलग विषय नहीं रह गए हैं। ये दोनों मिलकर राष्ट्रीय शक्ति की नई धुरी बन चुके हैं। उनके मुताबिक, जो देश अपनी ऊर्जा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा, वही औद्योगिक भविष्य को दिशा देगा। वहीं जो देश कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता पर नियंत्रण रखेगा, वही दुनिया के इंटेलिजेंस फ्यूचर का नेतृत्व करेगा।

चीन और अमेरिकी व्यवस्था का किया जिक्र

अदाणी ने कहा कि 1947 में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी, लेकिन 21वीं सदी में सच्ची आजादी का अर्थ होगा अपने घरों को रोशन करने वाली ऊर्जा और अपने भविष्य को दिशा देने वाली तकनीक पर खुद का नियंत्रण। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन इस नई वैश्विक रणनीति को अच्छी तरह समझ चुके हैं। दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समान है ऊर्जा और तकनीकी क्षमता में आत्मनिर्भरता हासिल करना।

उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं कहा जा सकता, जब तक वह अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने वाली ऊर्जा और अपने भविष्य को आकार देने वाली तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हो।

भारत का रास्ता अमेरिका और चीन जैसा नहीं होगा

भारत के विकास मॉडल पर बोलते हुए अदाणी ने कहा कि भारत का रास्ता अमेरिका या चीन जैसा नहीं होगा। भारत की ताकत इसकी घरेलू मांग और तेजी से बढ़ता सामाजिक-आर्थिक ढांचा है। उन्होंने कहा कि देश में मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ रहा है, शहरों का विस्तार हो रहा है, फैक्ट्रियां सक्रिय हो रही हैं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ रही है और लाखों छोटे कारोबार आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।

अदाणी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां बनने वाले हर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पहले से मांग मौजूद है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती अब उस क्षमता को तैयार करने की है जो इस मांग की गति के साथ कदम मिला सके।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का किया जिक्र

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक देश 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है। खास बात यह है कि इस क्षमता का 53 प्रतिशत हिस्सा पिछले 10 वर्षों में जोड़ा गया है। अदाणी ने कहा कि भारत अगले दो दशकों में अपनी ऊर्जा क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 2047 तक 2000 गीगावॉट तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

एआई पर चल रही बहस पर क्या बोले?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया में चल रही बहस पर भी अदाणी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में यह धारणा बनाई जा रही है कि एआई इंसानों की नौकरियां खत्म कर देगा और तकनीक मानव निर्णय क्षमता की जगह ले लेगी। लेकिन भारत को इस डर को अपनाने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत को एआई को अवसर पैदा करने वाली तकनीक के रूप में देखना चाहिए। अदाणी के मुताबिक, एआई उत्पादकता बढ़ा सकता है, नए रोजगार पैदा कर सकता है, छोटे कारोबारों को मजबूत बना सकता है और भारतीय युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकता है।

अदाणी ने कहा कि इंटेलिजेंस एज में असली निर्माण केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना नहीं है, बल्कि उस भौतिक बुनियादी ढांचे को खड़ा करना है जिस पर डिजिटल भविष्य टिकेगा। उन्होंने कहा कि एआई के लिए कंप्यूटिंग जरूरी है, कंप्यूटिंग के लिए डेटा सेंटर जरूरी हैं और डेटा सेंटर के लिए भरोसेमंद तथा सस्ती बिजली सबसे अहम आधार है।

इसी दिशा में गुजरात के खेड़ा में अदाणी समूह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-साइट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। 30 गीगावॉट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा पहले ही चालू किया जा चुका है। अदाणी ने कहा कि यह परियोजना भारत की ऊर्जा भूगोल को बदलने वाली साबित होगी।

उन्होंने बताया कि अदाणी समूह ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर के निवेश के लिए प्रतिबद्ध है। यह निवेश समूह को दुनिया के सबसे बड़े क्लीन एनर्जी निवेशकों में शामिल करता है।



अदाणी के बयान को भारत की ऊर्जा नीति, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है, भारत में ऊर्जा और डिजिटल आत्मनिर्भरता को लेकर यह बयान अहम माना जा रहा है।
 

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