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ICRA: वैश्विक चुनौतियों के बीच देश के एविएशन सेक्टर का बढ़ सकता है घाटा, यात्रियों की संख्या पर आया यह अपडेट

Thu, 28 Aug 2025 03:15 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 28 Aug 2025 03:15 PM IST
सार

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने कहा वैश्विक चुनौतियों की वजह से भारतीय विमानन क्षेत्र को झटका लग सकता है। उद्योग का घाटा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 95,000 से 1,05,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

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Amid global challenges, the country aviation sector may see a rise in losses in FY26
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारतीय विमानन क्षेत्र को वित्त वर्ष 2026 में गहरी उथल-पुथल का समाना करना पड़ सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच उद्योग का घाटा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 95,000 से 1,05,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह घाटा ऐसे समय में सामने आया है जब यात्री यातायात वृद्धि की रफ्तार धीमी हो रही है और विमानों की डिलीवरी लगातार बढ़ रही है। 

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विकास अनुमान में किया संशोधन 
आईसीआरए ने वित्त वर्ष 2026 के लिए घरेलू हवाई यात्री यातायात के अपने विकास अनुमान को संशोधित कर 4-6 प्रतिशत कर दिया है। यह पहले के 7-10 प्रतिशत के अनुमान से कम है। एजेंसी को अब घरेलू यातायात के सालाना 17 करोड़  के पार यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है।
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एविएशन सेक्टर को बेहतर प्राइसिंग का फायदा मिला
आईसीआरए की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख किंजल शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में भारतीय एविएशन सेक्टर को बेहतर प्राइसिंग पावर का फायदा मिला। इसकी वजह से हवाई किरायों में बढ़ोतरी देखने को मिली। यह रुझान हवाई यात्रा की मजबूत मांग से जुड़ा रहा। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में मांग का माहौल ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहा है।

भू-राजनीतिक और सुरक्षा कारणों से आई गिरावट
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में यात्री यातायात वृद्धि दर साल-दर-साल 4.4 प्रतिशत रही। यह सीमा पार से बढ़ते तनाव, उड़ानों में व्यवधान और एक विमान दुर्घटना के बाद यात्रा में मंदी के कारण कम हुई। जुलाई और अगस्त में लंबे समय तक मानसून के साथ-साथ अमेरिकी टैरिफ से व्यापार संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण आने वाले महीनों में व्यावसायिक यात्रा की धारणा और भी कमजोर होने की आशंका है।

कोविड के दौर से कम घाटे का अनुमान
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमानित घाटे के बावजूद, संख्या महामारी-युग के स्तर से काफी नीचे है। उद्योग ने वित्त वर्ष 2022 में 2.16 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 1.79 लाख करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था।

एटीएफ के दरों का पड़ेगा असर
इसमें यह भी बताया गया है कि विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतें और रुपया-डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव लागत के प्रमुख कारक बने रहेंगे। किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा 30-40 प्रतिशत होता है।

वित्त वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में एटीएफ की कीमतें औसतन 87,962 रुपये प्रति किलोलीटर रहीं। यह साल-दर-साल 8 प्रतिशत कम है, लेकिन कोविड-पूर्व स्तर 64,715 रुपये प्रति किलोलीटर से काफी ज्यादा है। इस बीच, वित्त वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे लागत का दबाव बढ़ गया।


वित्त वर्ष 2025 में उद्योग की क्षमता 5% बढ़ी
वित्त वर्ष 2025 में उद्योग की क्षमता में 5% की वृद्धि हुई। वहीं 31 मार्च 2025 तक बेड़े का आकार 855 विमानों तक पहुंच गया। भारतीय एयरलाइनों ने बड़े विमान खरीद ऑर्डर दिए हैं। इनमें अगले दशक में 1,600 से अधिक लंबित डिलीवरी निर्धारित हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा पुराने विमानों को ईंधन-कुशल मॉडलों से बदलने के लिए निर्धारित है।

आईसीआरए ने कहा कि इंजन की विफलता और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के कारण बेड़े की ग्राउंडिंग सितंबर 2023 में 20-22 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 15-17 प्रतिशत हो गई है। यह लगभग 130 विमानों के बराबर है।

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