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जीडीपी की गिरावट के बाद दीपावली से बाजार को उम्मीद, नकदी की कमी अब भी सबसे बड़ी समस्या

Tue, 01 Sep 2020 08:48 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 01 Sep 2020 08:48 PM IST
सार

  • विशेषज्ञों का अनुमान, नोटबंदी के बाद पैदा हुई नकदी की कमी अब तक नहीं हुई पूरी
  • मांग बढ़ाने के लिए बाजार में नकदी की आपूर्ति हो सकता है कारगर उपाय
  • सप्लाई लाइन में कामकाज तेजी से हो रहा सामान्य, मांग बढ़ाना अब भी सबसे बड़ी चुनौती

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After the fall of GDP, the market expects rise from festivals, lack of cash is still the biggest problem
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में रिकॉर्ड गिरावट के बाद बाजार को अगले त्योहारों के सीजन से काफी उम्मीदें हैं। अनुमान है कि त्योहारों के दौरान बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी। लेकिन इसके लिए बाजार में नकदी की कमी पूरी होना बेहद जरूरी माना जा रहा है, जो नोटबंदी के बाद अब तक पूरी नहीं हो पाई है। बाजार में मांग पैदा करने के लिए भी नकदी की उपलब्धता को सबसे अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि बाजार में नकदी झोंकने के लिए सरकार को आधारभूत संरचनाओं में पैसा लगाना चाहिए।

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त्योहारों का इंतजार

औद्योगिक संगठन फिक्की के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) वर्ग के अध्यक्ष हेमंत सेठ ने अमर उजाला को बताया कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पूरा कारोबार ठप रहने के कारण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कमी आना स्वाभाविक था, लेकिन अब ज्यादातर क्षेत्रों में कामकाज 70 से 80 फीसदी तक सामान्य हो चुका है। इस तरह सप्लाई लाइन ठीक हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में में त्योहारों का सीजन आ रहा है जब बाजार में लेनदेन बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था पर इसका बेहतर असर पड़ेगा।

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लेकिन ये है बड़ी चुनौती

कोरोना काल का असर कुछ कम हुआ है, लेकिन अभी भी इसका असर बरकरार है और बहुत संभव है कि अगले कुछ महीनों तक यह बना रहे। ऐसे में बाजार में नौकरियों की कमी बनी रहेगी और लोगों के पास पैसा बहुत कम पहुंचेगा। इसलिए बाजार में मांग बढ़ाने के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों के हाथों तक पैसा पहुंचाना है। इसके बिना मांग में बढ़ोतरी की संभावना नहीं बनेगी।

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क्या हो सकता है उपाय

हेमंत सेठ का कहना है कि बाजार में नकदी की कमी को दूर करने के लिए सरकार को भारी मात्रा में ढांचागत योजनाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इससे अनेक सहयोगी क्षेत्रों की सेवाओं में भी बढ़ोतरी पैदा होगी और मांग-सप्लाई चेन मजबूत होगी। आर्थिक गतिविधियों में कमी के कारण इस वर्ष जीएसटी का कलेक्शन कम हुआ है और सरकार के पास संसाधनों की कमी है। ऐसे में उसके समक्ष भी चुनौती है, लेकिन अंततः यही वे उपाय हैं जिससे अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है।

टेलीकॉम क्षेत्र में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

टेलीकॉम इक्विपमेंट मैनूफैक्चरिंग एसोसिएशन (TEMA) के शीर्ष पदाधिकारी एनके गोयल ने कहा कि कोरोना काल में टेलीकॉम गतिविधियां ठहर गई थीं, लेकिन लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन बाजार में जिस तरह तेजी आई है, उससे उम्मीद है कि टेलीकॉम बाजार में भी तेजी आएगी।

त्योहारी सीजन में लोग मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, आईपैड और अन्य उपकरणों की खरीद करेंगे। उन्होंने कहा कि बाजार को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसे कदम उठाएगी जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा से ज्यादा पैसा जाएगा और बाजार में मांग पैदा होगी।

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