ई-वीजा के बाद अब लोगों को मिलेगा ई-पासपोर्ट, नहीं हो सकेगी किसी तरह की छेड़छाड़
अब आपका पासपोर्ट भी नए सुरक्षा फीचर्स से लैस होगा। पासपोर्ट को अब ई-पासपोर्ट में तब्दील किया जाएगा, जिससे लोगों की सारी बॉयोमेट्रिक डिटेल्स होगी। ई-वीजा को मंजूरी देने के बाद विदेश मंत्रालय ने करीब सात साल बाद ई-पासपोर्ट जारी करने के लिए अपनी सहमति दे दी है।
मोबाइल में सेव कर सकेंगे सारी जानकारी
विदेश मंत्रालय ने अब कुछ महीने बाद से बायोमिट्रिक चिप वाला ई पासपोर्ट और साल के अंत तक डिजिटल पासपोर्ट जारी करने का फैसला किया है। ई-पासपोर्ट जहां आपके पर्स में समा जाएगा, वहीं डिजिटल पासपोर्ट को मोबाइल में भी रखा जा सकता है।
पासपोर्ट फजीवाड़े को पूरी तरह से खत्म करने के लिए मंत्रालय की योजना देश भर के पासपोर्ट सेवा केंद्रों को दुनिया भर के भारतीय दूतावासों और मिशनों से भी जोड़ने की है।
आईएसपी को सौंपी प्रिंटिंग की जिम्मेदारी
फिलहाल ई-पासपोर्ट निर्माण की जिम्मेदारी नासिक स्थित इंडिया सिक्योरिटी प्रेस (आईएसपी) को सौंपी गई है। आईएसपी जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी करेगा। ई-पासपोर्ट से कोई भी पासपोर्ट धारक व्यक्ति अपनी जानकारी मोबाइल में सेव कर सकेगा। इससे उसे यात्रा को छोड़कर के कहीं भी अपना पासपोर्ट साथ नहीं ले जाना पड़ेगा।
ऐसे काम करेगा ई-पासपोर्ट
अभी लोगों को जो पासपोर्ट जारी होता है वो साधारण होता है। लेकिन अप्रैल 2019 में जो पासपोर्ट जारी किए जाएंगे उनमें एक चिप भी लगा होगा। चिप में वही सूचनाएं होती हैं, जो पासपोर्ट के डेटा पेज पर छपी होती हैं। चिप के जरिये इमिग्रेशन अधिकारियों को नकली पासपोर्ट का पता लगाने और पासपोर्ट का गलत इस्तेमाल रोकने में मदद मिलेगी।
ऐसे रुकेगी धोखाधड़ी
संसद के शीतकालीन सत्र में 'सरकार ने नासिक के इंडिया सिक्योरिटी प्रेस (आईएसपी) में ई-पासपोर्ट की मैन्युफैक्चरिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक कॉन्टैक्टलेस इनलेज के प्रोक्योरमेंट को मंजूरी दे दी है। इस सिलसिले में इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन कंप्लायंट इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्टलेस इनलेज के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम खरीदने के लिए आईएसपी नासिक को तीन स्तर का टेंडर निकालने की अनुमति दी गई है।
यह ऑपरेटिंग सिस्टम ई-पासपोर्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी है। टेंडर और प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद ई-पासपोर्ट की मैन्युफैक्चरिंग शुरू होगी। 'पासपोर्ट्स की डुप्लिकेसी रोकने के लिए विदेश मंत्रालय देशभर के पासपोर्ट सेंटरों को सभी भारतीय राजनयिक मिशन के साथ जोड़ने की खातिर सिस्टम बनाएगा।