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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   After 300 years, the long-lost ship with £16 billion treasure has been found, solving a centuries-old mystery

San Jose: ₹1 लाख 84 हजार 346 करोड़ के खजाने संग 300 वर्ष पहले समुद्र में डूबा था जहाज; अब हुई मिलने की पुष्टि

Wed, 11 Jun 2025 12:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 11 Jun 2025 12:36 PM IST
सार

San Jose: सैन जोस, नाम का एक स्पेनिश जहाज 1708 में ब्रिटिश रॉयल नेवी के साथ लड़ाई के दौरान समुद्र की गहराइयों में डूब गया था। माना जाता है कि इस जहाज के मलबे में लगभग 16 बिलियन पाउंड यानी भारतीय रुपयों में करीब 1,84,346 करोड़ रुपये का खजाना छिपा है। अब समुद्र की तलहटी में इसके मिलने की पुष्टि हो गई है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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After 300 years, the long-lost ship with £16 billion treasure has been found, solving a centuries-old mystery
सैन जोस (प्रतीकात्मक तस्वीर)। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

सैन जोस, नाम का एक स्पेनिश जहाज 1708 में समुद्र की गहराइयों में डूब गया था। यह हादसा ब्रिटिश रॉयल नेवी के साथ लड़ाई के दौरान हुआ था। माना जाता है कि सैन जोस के मलबे में लगभग 16 बिलियन पाउंड यानी भारतीय रुपयों में करीब 1,84,346 करोड़ रुपये का खजाना छिपा है। साल 2015 में कोलंबिया के शोधकर्ताओं ने समुद्र की गहराइयों में खजाने से लदे इस जहाज को खोजने का दावा किया था। हालांकि, यह वही जहाज है इसकी पुष्टि अब जाकर हुई है। हालांकि, जब से इस जहाज का मलबा मिलने की खबरें सामने आई हैं,  इस पर लदे खजाने के स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है। 

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300 वर्षों से अधिक समय से कैरेबियन समुद्र की तलहटी में दबा है सैन जोस

साल 1708 में स्पेनिश उत्तराधिकार के युद्ध को वित्तपोषित करने के लिए इस जहाज पर  सोना, चांदी और पन्ना पेरू से स्पेन ले जाया जा रहा था। शिक्षाविदों ने लीमा मिंट में 1707 में ढाले गए सिक्कों, चीनी मिट्टी के बर्तनों और 1665 के शिलालेखों वाली तोपों जैसी कलाकृतियों के आधार पर कार्टाजेना के तट से दूर बारू द्वीप के पास सैन जोस के मलबे की पुष्टि की थी। इस खोज के बाद कोलंबिया, स्पेन और पेरू की सरकारों, स्थानीय समुदायों, खनिकों के वंशजों और खजाना खोजने वाली कंपनी ग्लोका मोरा (जो अब सी सर्च आर्माडा के नाम से जानी जाती है) के बीच स्वामित्व को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। सैन जोस जहां डूबा था उसे "जहाजों के डूबने का पवित्र स्थान" कहा जाने लगा था। यह जहाज 300 से अधिक वर्षों तक कैरिबियन के पानी में खोया रहा।

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विशेषज्ञों का दावा- अब सुलझा लिया गया है खजाने का रहस्य

2015 में, पानी के नीचे के ड्रोन का उपयोग करने वाले एक अभियान ने समुद्र तल पर मिले मलबे की की तस्वीरों को कैप्चर किया था। अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह रहस्य आखिरकार सुलझ गया है। मलबे की तस्वीरों में 1707 में लीमा टकसाल में ढाले गए चांदी के सिक्के, कांग्सी काल (1662-1722) से चीनी चीनी मिट्टी के बरतन और 1665 तक के निशानों के साथ खुदी हुई तोपें दिखी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये खोजें केवल एक ही जहाज की ओर इशारा करती हैं वह है 'सैन जोस'। मलबे के पहचान की पुष्टि के बाद कई पक्षों के बीच इसके स्वामित्व को लेकर छिड़ा विवाद एक बार फिर से सुलग गया है। हर खजाने पर अपने दावे को मजबूत बता रहा है।

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खजाने के लिए कोलंबिया सरकार ने कानून में किया बदलाव

विवाद के केंद्र में खजाना खोजने वाली कंपनी ग्लोका मोर्रा भी है, जिसका कहना है कि उसने 1981 में जहाज के मलबे को खोज लिया था। इसके उत्तराधिकारी, सी सर्च आर्मडा, अब 7.9 बिलियन पाउंड की मांग कर रहे हैं और कहते हैं कि वर्तमान खोज इसके मूल निर्देशांक के "एक या दो मील" के भीतर है। फर्म 2020 के कोलंबिया के उस कानून का भी विरोध कर रही है, जिसमें कहा गया है कि गैलियन पर सवार हर चीज कोलंबियाई सरकार की संपत्ति है। सैन जोस जहाज के डूबने को 18वीं शताब्दी में स्पेन के युद्ध की योजनाओं के लिए एक बड़ा झटका माना गया था। स्पेनिश उत्तराधिकार का युद्ध अंततः ब्रिटेन के जिब्राल्टर, न्यूफाउंडलैंड और नोवा स्कोटिया पर नियंत्रण के साथ समाप्त हुआ था।

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