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बड़ी राहत: सवालों से समझिए टेलीकॉम सेक्टर को मिली राहत के क्या मायने हैं? आपको कैसे फायदा होगा?

Wed, 15 Sep 2021 05:50 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Wed, 15 Sep 2021 05:50 PM IST
सार

कैबिनेट की बैठक में आज सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र को राहत देने के लिए अहम फैसले लिए। वित्त विशेषज्ञ डॉ. रवि सिंह ने अमर उजाला को बताया कि इन फैसलों के क्या मायने हैं और इनका उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा।

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affects of relief measures announced by government to revive the sinking telecom sector
दूरसंचार क्षेत्र - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज दूरसंचार क्षेत्र में कई संरचनात्मक और प्रक्रिया सुधारों को मंजूरी दी। इन सुधारों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी और साथ ही निवेशक भी प्रोत्साहित होंगे।

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आइए जानते हैं टेलीकॉम सेक्टर के लिए क्या अहम फैसले लिए गए?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद निर्णय की जानकारी देते हुए दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सकल समायोजित राजस्व (एजीआर) की परिभाषा को युक्तिसंगत बनाते हुए इसमें से दूरसंचार क्षेत्र से इतर होने वाली आय को हटा दिया गया है। सरकार ने नॉन टेलीकॉम रेवेन्यू को एजीआर से हटाया है। 
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  • दूरसंचार क्षेत्र के लिए राहत पैकेज को मंजूरी देने के साथ 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की अनुमति दे दी है। यानी अब विदेशी कंपनियां भारत में किसी कंपनी में अपना पूरा शेयर लगा सकेंगी या किसी भारतीय कंपनी को पूरी तरह से खरीद भी सकेंगी। इन फैसलों का असर तब दिखेगा जब 5G मोबाइल नेटवर्क का ऑक्शन आएगा। 
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  • कंपनियों के मासिक ब्याज दर को अब सालाना कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त पेनाल्टी पर भी राहत दी गई है। स्पेक्ट्रम की अवधि भी 20 साल से बढ़कर 30 साल हो गई है। 
  • सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर टावर का इंस्टालेशन होगा। 1953 के नोटिफिकेशन के हिसाब से लाइसेंस राज खत्म हो गया है। 
  • अन्य घोषणाओं में बकाय, एजीआर और स्पेक्ट्रम बकाया भुगतान पर चार साल की रोक शामिल है। जो टेलीकॉम ऑपरेटर इस सुविधा को चुनते हैं, उन्हें सरकार को ब्याज भी देना होगा। 

इन फैसलों से क्या घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनियां उबर पाएंगी? 
इन उपायों से दूरसंचार को बहुत राहत मिलने की उम्मीद है, जो बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और उच्च ऋण के बोझ तले दबी थीं। इन उपायों से दूरसंचार कंपनियों द्वारा सामना किए जा रहे नकदी प्रवाह पर दबाव कम होगा। दिवालिया होने की कगार पर खड़ी Vodafone Idea के लिए यह एक बड़ा कदम है। एजीआर बकाया पर चार साल की मोहलत निश्चित रूप से कंपनी को राहत प्रदान करेगी और लंबी अवधि में कारोबार में सुधार करने में मदद करेगी।

उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
वित्त विशेषज्ञ डॉ. रवि सिंह के अनुसार, इन राहत उपायों से उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की संभावना है। एजीआर बकाया और अन्य संबंधित घोषणाओं पर चार साल की मोहलत के कारण निकट अवधि में टैरिफ बढ़ोतरी की प्रक्रिया धीमी होने की उम्मीद है। इन उपायों की घोषणा के साथ, जियो और एयरटेल जैसी टेलीकॉम निश्चित रूप से आकर्षक योजनाओं की घोषणा करेंगी। इससे उन्हें मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने और नए ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा अभी तक आपको सिम कार्ड लेने के लिए आधार कार्ड या किसी अन्य दस्तावेज की फोटोकॉपी देनी पड़ती है लेकिन जल्द ही आपको इससे आजादी मिलने वाली है। सरकार की ओर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि सिम कार्ड खरीदने के लिए अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा। इसके अलावा प्रीपेड से पोस्टपेड या पोस्टपेड से प्रीपेड में जाने पर दोबारा KYC नहीं किया जाएगा। टेलीकॉम कंपनियों के पास 400 करोड़ से कागजों का अंबार जमा हुआ है। ऐसे में अब नए मोबाइल कनेक्शन के लिए डिजिटल केवाईसी कराने का फैसला लिया गया है।



एजीआर में नॉन-टेलीकॉम रेवेन्यू का मसला टेलीकॉम कंपनियों के लिए कितना बड़ा था? 
भारत में दूरसंचार कंपनियों को सरकार के स्वामित्व वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) को स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में अपने राजस्व का एक हिस्सा देना पड़ता है। सरकार और दूरसंचार कंपनियों के बीच विवाद का मुद्दा एजीआर की गणना का था। सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए फॉर्मूले के अनुसार, दूरसंचार कंपनियों के राजस्व में गैर-दूरसंचार राजस्व भी शामिल है जैसे संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय, किराया, निवेश पर लाभांश और जमा पर अर्जित ब्याज। टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय से इसका विरोध कर रही हैं। यह थोड़ा निराशाजनक है कि सरकार ने एजीआर की गणना के फार्मूले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया और दूरसंचार कंपनियों को दूरसंचार विभाग द्वारा इस्तेमाल की गई मौजूदा गणना के अनुसार बकाया राशि का भुगतान करने को कहा।

लाइसेंस राज खत्म होने, एफडीआई की मंजूरी से फैसलों से क्या फायदा होगा?
टेलीकॉम सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी का फैसला सरकार द्वारा उठाया गया सकारात्मक कदम है। इससे दूरसंचार कंपनियों की धन जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी क्योंकि वे कंपनियों में रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री के माध्यम से आसानी से धन जुटा सकेंगी। यह टेलीकॉम शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत है।

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