ADB: कोरोना ने भारी गरीबी से निपटने के मामले में एशिया को दो वर्ष पीछे धकेला, रिपोर्ट में खुलासा
ADB: रिपोर्ट के अनुसार एक दिन में 1.90 अमरीकी डालर से कम की आमदनी को बढ़ाने का लक्ष्य वर्ष 2020 में ही हासिल किया जा सकता था अगर महामारी नहीं आती। एडीबी की ओर से एशिया व प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास के प्रमुख संकेतकों से जुड़ी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
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अगर दुनिया को कोरोना महामारी का सामना नहीं करना पड़ता तो एशिया भारी गरीबी को दूर करने का लक्ष्य साल 2020 में हासिल ही हासिल कर लेता। अगर ऐसा होता तो अधिक से अधिक लोगों के जीवनस्तर में सुधार आता और उन्हें 1.90 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन से कम की आमदनी पर गुजर-बसर नहीं करना पड़ता। यह खुलासा एडीबी (Asian Development Bank) की रिपोर्ट में हुआ है।
बता दें कि दुनिया में ऐसे लोग जिनकी आमदनी 1.90 अमेरिकी डॉलर यानी 152 रुपये प्रति दिन से कम है उन्हें भारी गरीबी की श्रेणी में रखा जाता है। एशियाई विकास बैंक (ADB) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि COVID-19 महामारी ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र में गरीबी के खिलाफ लड़ाई को कम से कम दो साल पीछे कर दिया है।
मनीला में मुख्यालय वाली बहुपक्षीय फंडिंग एजेंसी ने कहा है कि महामारी के बाद एशिया व प्रशांत क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों के लिए अत्यधिक गरीबी से बाहर आना पहले की तुलना में कठिन होगा।
एजेंसी का मानना है कि इस वर्ष इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति से अत्यधिक गरीबी कम होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार एक दिन में 1.90 अमरीकी डालर से कम की आमदनी को बढ़ाने का लक्ष्य वर्ष 2020 में ही हासिल किया जा सकता था अगर महामारी नहीं आती। एडीबी की ओर से एशिया व प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास के प्रमुख संकेतकों से जुड़ी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की गई।
एडीबी ने डेटा सिमुलेशन का हवाला देते हुए कहा कि महामारी के पूर्व भारी गरीबी में जीने वाले लोगों के पास गरीबी से उबरने के जो संसाधन मौजूद थे महामारी के आने से उनका बड़ा झटका लगा है। कोरोना महामारी ने गरीबी घटने के लंबे ट्रेंड को बाधा पहुंचाई है। एडीबी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं में सुधार के बावजूद यह प्रगति असमान बनी हुई है।