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Haifa Port: अदाणी ग्रुप ने ऐसे हासिल की हाइफा पोर्ट की डील, 2054 तक रहेगा नियंत्रण
Sat, 16 Jul 2022 11:26 AM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Sat, 16 Jul 2022 11:26 AM IST
सार
गौतम अदाणी ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी है कि उनकी कंपनी अदाणी पोर्ट्स ने इसराइल (Israel) के हाइफा बंदरगाह (Haifa Port) के निजीकरण के टेंडर को अपनी पार्टनर कंपनी गैडोट के साथ मिलकर हासिल कर लिया है। अदाणी ने आगे लिखा कि यह दोनों देशों के लिए सामरिक और ऐतिहासिक रूप बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
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हाइफा पोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
एशिया के सबसे अमीर कारोबारी गौतम अदाणी अब अपने कारोबार को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने की कवायद में जुट गए हैं। भारत समेत दुनिया के कई देशों में उनका कारोबार पहले से फैला हुआ है। अब उन्होंने इसराइल में भी सफलता के झंडे गाड़ने की तैयारी कर ली है।
अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स ने इसरायल की केमिकल और लॉजिस्टिक्स कंपनी गैडोट के साथ मिलकर सबसे महंगी बोली लगाते हुए इजराइल के ऐतिहासिक बंदरगाह के निजीकरण का काम अपने हाथों में ले लिया है। अब इस बंदरगाह पर अगले 31 साल तक अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स का नियंत्रण रहेगा।
खबरों के मुताबिक हाइफा पोर्ट की यह डील लगभग 1.2 अरब डॉलर में फाइनल हुई है। बताया यह भी जा रहा है कि हाइफा बंदरगाह की 70 फीसदी हिस्सेदारी अदाणी पोर्ट्स के पास रहेगी, जबकि, बाकी की 30 फीसदी हिस्सेदारी गैडोट ग्रुप के पास रहेगी। हाइफा पोर्ट पर आने वाले 31 सालों तक यानी 2054 तक दोनों कंपनियों का नियंत्रण रहेगा।
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अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी है कि इसराइल (Israel) के हाइफा बंदरगाह (Haifa Port) के निजीकरण के टेंडर को पार्टनर कंपनी गैडोट के साथ मिलकर हमने हासिल कर लिया है। अदाणी ने आगे लिखा कि यह दोनों देशों के लिए सामरिक और ऐतिहासिक रूप बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
आपको बता दें कि इसराइल ने देश के सबसे बड़े और ऐतिहासिक महत्व के हाइफा बंदरगाह के निजीकरण के लिए टेंडर जारी किए थे, इसकी बोली लगाने के लिए दुनियाभर की कंपनियों को आमंत्रित किया गया था। गौतम अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स (Adani Ports) ने इसराइल की केमिकल एंड लॉजिस्टिक कंपनी गैडोट (GADOT) के साथ मिलकर इस टेंडर में सबसे बड़ी बोली लगाई और इसे हासिल कर लिया है।
हाइफा पोर्ट भूमध्य सागर के पूर्वी किनारे पर गहरे पानी वाला बंदरगाह है। यह बंदरगाह इसराइल के तीन सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक माना जाता है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में साल 1922 में शुरू किया गया था, जिसे 11 साल बाद 1933 से आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से मालवाहक और यात्री जहाजों दोनों का ही आना-जाना होता है।
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अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स ने इसरायल की केमिकल और लॉजिस्टिक्स कंपनी गैडोट के साथ मिलकर सबसे महंगी बोली लगाते हुए इजराइल के ऐतिहासिक बंदरगाह के निजीकरण का काम अपने हाथों में ले लिया है। अब इस बंदरगाह पर अगले 31 साल तक अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स का नियंत्रण रहेगा।
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खबरों के मुताबिक हाइफा पोर्ट की यह डील लगभग 1.2 अरब डॉलर में फाइनल हुई है। बताया यह भी जा रहा है कि हाइफा बंदरगाह की 70 फीसदी हिस्सेदारी अदाणी पोर्ट्स के पास रहेगी, जबकि, बाकी की 30 फीसदी हिस्सेदारी गैडोट ग्रुप के पास रहेगी। हाइफा पोर्ट पर आने वाले 31 सालों तक यानी 2054 तक दोनों कंपनियों का नियंत्रण रहेगा।
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अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी है कि इसराइल (Israel) के हाइफा बंदरगाह (Haifa Port) के निजीकरण के टेंडर को पार्टनर कंपनी गैडोट के साथ मिलकर हमने हासिल कर लिया है। अदाणी ने आगे लिखा कि यह दोनों देशों के लिए सामरिक और ऐतिहासिक रूप बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
आपको बता दें कि इसराइल ने देश के सबसे बड़े और ऐतिहासिक महत्व के हाइफा बंदरगाह के निजीकरण के लिए टेंडर जारी किए थे, इसकी बोली लगाने के लिए दुनियाभर की कंपनियों को आमंत्रित किया गया था। गौतम अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स (Adani Ports) ने इसराइल की केमिकल एंड लॉजिस्टिक कंपनी गैडोट (GADOT) के साथ मिलकर इस टेंडर में सबसे बड़ी बोली लगाई और इसे हासिल कर लिया है।
हाइफा पोर्ट भूमध्य सागर के पूर्वी किनारे पर गहरे पानी वाला बंदरगाह है। यह बंदरगाह इसराइल के तीन सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक माना जाता है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में साल 1922 में शुरू किया गया था, जिसे 11 साल बाद 1933 से आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां से मालवाहक और यात्री जहाजों दोनों का ही आना-जाना होता है।