Hindenburg Row: 360 वन का अदाणी समूह के शेयर में निवेश की बात नकारी; 'एम्फी' ने भी किया माधवी बुच का समर्थन
सेबी प्रमुख माधवी बुच और उनके पति धवल बुच के नाम कथित अदाणी घोटाले से जुड़ रहा है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट ऑफशोर फंड में दंपती की हिस्सेदारी थी।
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हाल ही में अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की प्रमुख माधवी बुच और उनके पति धवल बुच पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस बीच, धन प्रबंधन इकाई 360 वन (360 ONE) ने रविवार को बताया कि कंपनी के पूर्ववर्ती आईपीई-प्लस फंड 1 (IPE-Plus Fund 1) ने अदाणी समूह के शेयर में किसी भी तरह का निवेश नहीं किया है।
360 वन ने क्या कहा?
360 वन (पूर्व में आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट) ने एक बयान में कहा कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच का इस निवेश फंड में कुल प्रवाह का 1.5 प्रतिशत से भी कम निवेश था और किसी भी निवेशक की निवेश निर्णयों में कोई संलिप्तता नहीं थी। कंपनी ने आगे बताया कि इस फंड में नियमों का पूरी तरह पालन किया था। यह फंड अक्टूबर, 2013 से लेकर अक्टूबर, 2019 के बीच सक्रिय था। 360 वन ने कहा , ‘पूरे कार्यकाल के दौरान, आईपीई-प्लस फंड 1 ने अदाणी समूह के किसी भी शेयर में निवेश नहीं किया है। प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) की बात करें तो अधिकतम संपत्ति लगभग 48 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी। इसके अलावा, एयूएम के 90 फीसदी से अधिक फंड का निवेश बांड में किया गया था।'
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा
आपको बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद सेबी की प्रमुख माधवी बुच और उनके पति धवल बुच का नाम कथित अदाणी घोटाले से जुड़ रहा है। शनिवार देर रात आई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट ऑफशोर फंड में दंपती की हिस्सेदारी थी। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अदाणी घोटाले में इस्तेमाल की गई अपतटीय (ऑफशोर) संस्थाओं में सेबी चेयरपर्सन और उनके पति की हिस्सेदारी थी। इन संस्थाओं का संचालन कथित तौर पर अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी के बड़े भाई विनोद अदाणी करते हैं। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि ये निवेश, माधवी बुच के सेबी के पूर्णकालिक सदस्य बनने से पहले वर्ष 2015 में किए गए थे। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि माधवी पुरी बुच ने अपने शेयर पति को ट्रांसफर किए। अप्रैल 2017 से लेकर मार्च 2022 के दौरान माधवी पुरी बुच सेबी की सदस्य होने के साथ चेयरपर्सन थीं।
एम्फी ने भी किया माधवी बुच का समर्थन
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद रविवार को म्यूचुअल फंड उद्योग के समूह ‘एम्फी’ ने माधवी बुच का समर्थन किया है। एम्पी ने कहा, ‘हाल ही में हिंडनबर्ग ने जिस तरह से रिपोर्ट का जारी किया है, उससे साफ पता चलता है कि यह भारतीय पूंजी बाजार में माधवी बुच के योगदान को कमजोर करने की कोशिश ही नहीं बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति को भी कमजोर करने की भी कोशिश है। यह बाजार के पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास की कमी पैदा करने का भी प्रयास है।’ एम्फी ने चेतावनी दी है कि ये सभी दावे बिना जांचे और परखे हुए पेश किए गए हैं। इस तरह से दुनिया की सबसे तेज उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रास्ते में अड़चनें पैदा की जा रही है।