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Budget 2024: बजट से बदल जाएगी 11 करोड़ किसानों की किस्मत, इन कदमों से अन्नदाताओं को मिलेगी मजबूती

Thu, 01 Feb 2024 04:17 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 01 Feb 2024 04:17 PM IST
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सार
कोई बड़ी घोषणा न करने से मोदी सरकार का यह आत्मविश्वास भी साफ़ दिखाई पड़ता है कि वह किसी लोकप्रिय घोषणा के बिना भी चुनाव जीत सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना और राशन योजना जैसी कई योजनाएं हैं जिसका लाभ करोड़ों लोगों को मिल रहा है। सरकार का अनुमान है कि ये लाभार्थी उसे दोबारा सरकार में आने में मदद करेंगे...
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Budget 2024 strengthen the farmers financially through all the schemes
Union Budget 2024: Finance Minister Nirmala Sitharaman - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

एक फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट में कहने के लिए सरकार ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है, लेकिन इसके बाद भी बजट की तमाम योजनाओं से किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने का काम किया गया है। सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई ऐसे कदम इस अंतरिम बजट में उठाए गए हैं, जिससे किसानों को आर्थिक तौर पर सशक्त करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने रखी अंतरिम बजट की मर्यादा

कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि कोई नई बड़ी घोषणा न करके सरकार ने इस बार अंतरिम बजट की मर्यादा रखी है। यह केवल लोकसभा चुनाव होने तक आवश्यक खर्च के लिए संसद से अनुमति लेने का बजट होता है। सरकार इसमें कोई नई बड़ी घोषणा नहीं कर सकती। चुनावी साल में यह अधिकार आने वाली नई सरकार के पास होता है। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले पीएम किसान सम्मान निधि की बड़ी घोषणा कर सरकार ने यह मर्यादा तोड़ी थी। माना जाता है कि उसे इस चुनावी घोषणा का बड़ा लाभ मिला था।   

कोई बड़ी घोषणा न करने से मोदी सरकार का यह आत्मविश्वास भी साफ़ दिखाई पड़ता है कि वह किसी लोकप्रिय घोषणा के बिना भी चुनाव जीत सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना और राशन योजना जैसी कई योजनाएं हैं जिसका लाभ करोड़ों लोगों को मिल रहा है। सरकार का अनुमान है कि ये लाभार्थी उसे दोबारा सरकार में आने में मदद करेंगे। 
हालांकि, कृषि क्षेत्र के लोग यह मान रहे थे कि केंद्र सरकार पीएम किसान निधि के अंतर्गत किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता (6,000 रुपये प्रति वर्ष) की राशि बढ़ा सकती है। फिलहाल आवश्यक खर्चों के दबाव में सरकार ने ऐसी कोई लोकप्रिय घोषणा करने से परहेज बरता है। लेकिन इसके बाद भी बजट में ऐसे कई प्रावधान किये गए हैं जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने में मदद मिलेगी।

देविंदर शर्मा के अनुसार, बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में दो करोड़ पीएम आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन घरों को बनाने में ग्रामीण लोगों को ही रोजगार मिलेगा। साथ ही गृह निर्माण की वस्तुओं की खपत बढ़ेगी। इससे भी इन क्षेत्रों के उद्योगों और ग्रामीणों को आर्थिक मदद मिलेगी। सरकार ने घर निर्माण में भी सहायता देने की घोषणा की है। इसका असर भी ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति बेहतर करेगी।

स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। वे अपने घर को संभालने के साथ-साथ रोजगार के काम कर पाती हैं। इन समूहों में किसानों के घरों की महिलाएं ही काम करती हैं। इसलिए इससे भी किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।  

आशा बहनों को आयुष्मान योजना का लाभ  

सरकार ने सभी आशा बहनों को आयुष्मान योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपना इलाज कराने में पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा। अब तक इलाज में भारी पैसा खर्च होने से लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती थी। लेकिन अब आशा बहनों के परिवारों के साथ ऐसा नहीं होगा।  

मछली पालन का काम ज्यादातर मामलों में बड़े औद्योगिक घरानों के कारोबारी नहीं करते। यह काम गांव-देहात में बसे छोटे-छोटे किसान ही करते हैं। केंद्र सरकार ने मत्स्य योजना को ज्यादा बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। किसानों को इसका भी लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक क्षेत्र को बढ़ावा देकर, नैनो खादों का विकास कर भी किसानों की लागत कम करने की कोशिश की गई है।  

सरकार ने एक करोड़ घरों में सौर ऊर्जा संयंत्रों को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यानी, अब किसान अपने घरों या खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर न केवल मुफ्त बिजली प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को बेचकर हर महीने 15-20 हजार रुपये की कमाई भी कर सकते हैं। इससे देश के किसानों की तस्वीर बदल सकती है।

ये है चुनौती

देश की 60 फीसदी आबादी आज भी गांवों में रहती है। इन्हें रोजगार के लिए कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर करना पड़ता है। लेकिन कृषि क्षेत्र में केवल 1.8 फीसदी की वृद्धि हो रही है, जबकि आबादी का अनुपात कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। यानी इसके बाद भी कृषि क्षेत्र में कम तेज वृद्धि के कारण रोजगार की चुनौती बनी रह सकती है।

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