भारत में भी छा गई ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी: युवाओं के लिए रोजगार के बम्पर मौके
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ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी, अगर आप 'टेक सैवी' नहीं हैं तो शायद इस टेक्नॉलजी के बारे में न जानते हों। आजकल ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी भारत में भी खूब चर्चा में है। ब्लॉकचेन तकनीकी को लेकर हर सेक्टर काम कर रहा है जिसकी वजह से ये एक नये करियर विकल्प के तौर पर युवाओं को अपनी ओर खींच रही है। नौकरी के लिहाज से दुनिया में जिन 20 स्किल्स की इन दिनों सबसे ज्यादा मांग है, उनमें ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी दूसरे नंबर पर है। यानी आप भी इसमें करियर बनाकर हर महीने लाखों कमा सकते हैं। 2016 की तुलना में 2017 में इससे जुड़ी नौकरियों की तादाद दोगुनी हो गई थी और इस साल इनमें और भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ब्लॉकचेन तकनीक में दक्ष लोग इन दिनो 150 डॉलर यानी लगभग 10,000 रुपए प्रति घंटे तक कमा रहे हैं।
क्या है ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी?
ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिसे वित्तीय लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए प्रोग्राम किया गया है। यह एक डिजिटल प्रणाली है,जिसमे एक इंटरनेट टेक्नॉलजी की अंतर्निहित मजबूती है जो एन्क्रिप्टेड डेटाबेस को अपने नेटवर्क पर समान जानकारी के ब्लॉक को संग्रहीत कर सकता है। इसमें आंकड़ों के रिकॉर्ड या ब्लॉक की एक श्रृंखला होती है और प्रत्येक ब्लॉक में उस समय हुए ट्रांजेक्शंस का लेखा-जोखा होता है। यह पूरी तरह सार्वजनिक होती है। ब्लॉकचेन को यूज करने वाला कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। माइनर तकनीक के जरिए प्रत्येक ट्रांजेक्शन की जानकारी उपलब्ध हो जाती है और फिर कानूनी वैधता की जांच की जाती हैं।
ब्लॉकचेन डिजिटल जानकारी (डेटाबेस) को वितरित करने की क्षमता रखता है अर्थात यह एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क की तरह कार्य करता है| डेटाबेस के सभी रिकॉर्ड एक कंप्यूर में स्टोर नहीं होते बल्कि 1000 कम्प्यूटर्स या लाखों कम्प्यूटर्स में वितरित होते है| ब्लॉक चेन का हर एक कंप्यूटर हर एक रिकॉर्ड के पूरे इतिहास का वर्णन कर सकता है| यह डेटाबेस एन्क्रिप्टेड है और गोपनीय तरीके से दर्ज किया गया है। ट्रांजेक्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे पूरी तरह से सार्वजनिक करने की बजाए इसकी पहुंच एक निर्धारित समूह तक सीमित रखी जा सकती है।
ब्लॉकचेन में फॉल्ट टोलेरंट (फॉल्ट टोलेरंट) भी है यानी इस सिस्टम में यदि एक कंप्यूटर खराब हो जाता है तो भी यह सिस्टम काम करता रहता है। अगर इसमें किसी नए समझौते या डेटा को को दर्ज करना होता है तो इसके लिए कई साझेदारों (कम्प्यूटर्स) की मंजूरी लेनी पड़ती है।
हैकिंग ?
इसे हैक करना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि हैकर को डाटा बेस हैक करने के लिए एक साथ कई हजार कंपयुटर्स को हैक करना पड़ेगा। यही कारण है कि बलॉकचेन तकनीक एक सुरक्षित और सरल तकनीक है। ब्लॉकचेन का पहला प्रयोग 2008 में हुआ था जब डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन का अाविष्कार हुआ था। लेकिन अब ये हर जगह इस्तेमाल किया जा सकता है जहां भरोसा, गारंटी के लिए एक बिचौलिये की जरूरत हो।
क्यों है कारगर?
यदि कोई गरीब आदमी सरकारी वेतन चाहता है तो सरकार उस वेतन को ब्लॉकचेन के जरिए उसके मोबाइल पर भेज सकती है। आपदा की स्थिति में जिन लोगो के मकान, फसल आदि नष्ट हो जाते हैं और सरकार उनकी सहायता करना चाहती है, तो सरकार सहायता राशि सीधे उनके मोबाइल पर भेज सकती है, इससे भष्टाचार कम होगा। ब्लॉकचेन का प्रयोग शिक्षा में भी हो सकता है। छात्रों को कागजी डिग्री की बजाय ब्लॉकचेन से बनी डिग्री दी जा सकती है। इससे जाली डिग्री की समस्या का समाधान हो सकता है।
इन क्षेत्रों में भी हो सकता है ब्लॉक चेन का इस्तेमाल:-
सूचान प्रौद्योगिकी और डाटा प्रबंधन, सरकार और संगठनात्मक प्रशासन, शिक्षा, गेमिंग प्रणाली, शेयर बाजार और कमोडिटीज, सामाजिक नेटवर्क, डिजिटल पहचान और प्रमाणीकरण, रियल एस्टेट, सामुदायिक सेवा, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया और बाजार, ई–वोटिंग आदि में।