The Bonus Market Update:अमेरिकी मुद्रास्फीति में नरमी से भारतीय शेयर बाजार में बढ़त, सेंसेक्स 550 अंक उछला
15 जुलाई 2026 को अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित नरमी के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। सेंसेक्स 564 अंक से अधिक और निफ्टी 142 अंक से अधिक बढ़कर 24,200 के पार पहुंच गया। बैंक और वित्तीय शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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वैश्विक स्तर पर महंगाई के मोर्चे पर मिली बड़ी राहत ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर नया जोश भर दिया है। पिछले सत्र में बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट के बाद बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों- सेंसेक्स और निफ्टी ने जोरदार वापसी की। इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका में उम्मीद से बेहतर आए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े हैं, जिसने निवेशकों में यह उम्मीद जगा दी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर अधिक उदार और कम आक्रामक रुख अपना सकता है।
शेयर बाजार में आज सुबह कैसी रही हलचल?
बुधवार को शुरुआती कारोबार में बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 553 अंक की मजबूत बढ़त के साथ 77,603.57 अंक पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 148.15 अंक उछलकर 24,198.40 अंक पर कारोबार कर रहा था। यह रिकवरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक एक दिन पहले मंगलवार को बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई थी, जब सेंसेक्स 561.46 अंक (0.72 प्रतिशत) टूटकर 77,054.94 अंक पर और निफ्टी 158.95 अंक (0.66 प्रतिशत) गिरकर 24,052.05 अंक पर बंद हुआ था।
बाजार की इस जोरदार वापसी के पीछे क्या हैं बड़े वैश्विक संकेत?
वैश्विक बाजारों से मिले अनुकूल संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को काफी मजबूती दी है। अमेरिका में जून महीने की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर घटकर 3.5 प्रतिशत पर आ गई है, जो बाजार के अनुमानित 3.8 प्रतिशत से काफी कम है। इस आंकड़े के आने के बाद अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को मजबूती के साथ बंद हुए, जिसमें एसएंडपी 500 में 0.38 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.90 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालविया के अनुसार, "जून के कमजोर सीपीआई आंकड़ों ने इस उम्मीद को मजबूत किया है कि फेडरल रिजर्व अधिक उदार नीति अपना सकता है, जिससे रातों-रात वैश्विक संकेत काफी सकारात्मक हो गए"। इसी तरह, ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि महंगाई के इन आंकड़ों ने यह भरोसा दिलाया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद आने वाले समय में फेडरल रिजर्व आक्रामक मौद्रिक नीति से पीछे हट सकता है, जिससे वैश्विक जोखिम वाली संपत्तियों को काफी राहत मिलेगी।
कौन-से सेक्टर्स और शेयरों में रही तेजी और कौन पिछड़े?
आज के शुरुआती कारोबार में बैंकिंग और फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली है:
- लाभ कमाने वाले प्रमुख शेयर: सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एटरनल, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), अल्ट्राटेक सीमेंट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) सबसे ज्यादा फायदे में रहे।
- गिरावट दर्ज करने वाले शेयर: दूसरी तरफ, आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टेक महिंद्रा के साथ-साथ पावर ग्रिड के शेयरों में गिरावट देखी गई और ये नुकसान में रहे।
यदि एशियाई बाजारों की बात करें, तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे आगे रहते हुए 7.66 प्रतिशत तक उछल गया। इसके अलावा जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंगसेंग भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ लाल निशान में देखा गया।
कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का क्या असर पड़ा?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे भारतीय बाजार को राहत मिली है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड एक प्रतिशत की बढ़त के साथ 85.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। राजेश पालविया के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से प्रस्तावित 20 प्रतिशत पारगमन शुल्क को वापस लेने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास नरम हुईं। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख अभी भी सतर्कता भरा है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को एफआईआई ने बाजार से 739.69 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की थी।
भारतीय बाजार के लिए आगे की क्या राह होगी?
अमेरिकी महंगाई में उम्मीद से अधिक नरमी ने घरेलू बाजार को एक तात्कालिक संजीवनी प्रदान की है। हालांकि, भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने दुनिया भर के उभरते बाजारों सहित भारत के लिए भी सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया है। अब निवेशकों की नजरें आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व के वास्तविक नीतिगत कदमों पर टिकी रहेंगी।