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Dollar vs Rupees: रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर, ट्रंप की वापसी की संभावना के बीच डॉलर मजबूत

Wed, 06 Nov 2024 02:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 06 Nov 2024 02:35 PM IST
सार

डॉनल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में लौटने की बढ़ती संभावना के बीच बुधवार को डॉलर में मजबूती आई। इसके असर से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.25 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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Rupee hits all time low, dollar appreciates amid possibility of Trump return
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Istock

विस्तार

डॉनल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में लौटने की बढ़ती संभावना के बीच बुधवार को डॉलर में मजबूती आई। इसके असर से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.25 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। ताजा चुनाव परिणामों ने ट्रम्प प्रशासन के तहत उच्च सरकारी खर्च की बाजार उम्मीदों को बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिकी राजकोषीय घाटे में उछाल आ सकता है।निवेशकों का अनुमान है कि घरेलू बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देने के लिए मशहूर ट्रम्प की नीतियां राजकोषीय सीमाओं और उधार लेने की जरूरतों को बढ़ाएंगी। इस परिदृश्य ने पहले ही डॉलर में जुलाई के स्तर तक वृद्धि को बढ़ावा दिया है।

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नतीजतन, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 84.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया, हालांकि बाद में यह थोड़ा ठीक होकर इस रिपोर्ट को दर्ज करने के समय 84.18 पर कारोबार कर रहा था विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी नीतियों से अमेरिकी राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है, जिससे संभावित रूप से सरकार को अधिक उधार लेना पड़ सकता है। मैक्सिकन पेसो पहले ही डॉलर के मुकाबले 3 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि जापानी येन और यूरो भी कमजोर हुए हैं। उच्च ट्रेजरी यील्ड न केवल डॉलर की ताकत को बढ़ाती है बल्कि वैश्विक मुद्राओं, विशेष रूप से भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव डालती है। 
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बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने एएनआई को बताया, "बाजार में ट्रंप ट्रेड्स चल रहे हैं। नॉर्थ कैरोलिना में ट्रंप की जीत के साथ ही उनके 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोट जीतने की संभावना बढ़ गई है। ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिका का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी होगी और इसके परिणामस्वरूप हम अमेरिकी डॉलर को जुलाई के स्तर पर बढ़ते हुए देख रहे हैं। मैक्सिकन पेसो में 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, येन, यूरो दोनों में गिरावट आई है। यह ट्रंप ट्रेड है क्योंकि बाजार ट्रंप की जीत की उच्च संभावना देख रहे हैं।" 
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भारत में, मजबूत डॉलर के सामने रुपये में लगातार गिरावट देखी गई है, जो उभरते बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल को दर्शाता है। मुद्रा के कमजोर होने का कारण अमेरिकी मौद्रिक नीति को सख्त करना और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव सहित बाहरी दबावों का मिश्रण है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को स्थिर करने के लिए अतीत में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया है, लेकिन अगर डॉलर की मजबूती अनियंत्रित रूप से जारी रहती है तो आगे और उपायों की आवश्यकता हो सकती है।

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