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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया बना विश्व का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज

Wed, 22 Jan 2020 03:12 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Wed, 22 Jan 2020 03:12 PM IST
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National Stock Exchange is now largest derivatives exchange of world

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई), वायदा कारोबार से जुड़ी एक संस्था फ्यूचर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) द्वारा आंकड़ों के मुताबिक अनुबंधों की संख्या के लिहाज से सीएमई समूह को 2019 में पीछे छोड़कर विश्व की सबसे बड़ा डेरिवेटिव (वायदा) एक्सचेंज बन गई।

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वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज (डब्ल्यूईएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नकदी इक्विटी खंड में कारोबार की संख्या के लिहाज से भी एनएसई वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर रही।
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इस मौके पर एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी श्री विक्रम लिमये ने कहा, 'यह हम सबके लिए और हमारे देश के लिए सचमुच फक्र का क्षण है कि एनएसई वैश्विक स्तर पर अग्रणी एक्सचेंज बनकर उभरी है और इसने सबसे बड़े वायदा एक्सचेंज और नकदी इक्विटी कारोबार के लिहाज से तीसरे सबसे बड़े एक्सचेंज  होने का गौरव हासिल किया है। हम सरकार, नियामकों और अपने सम्बद्ध पक्षों से मिल रहे सहयोग के आभारी हैं। हमारी उपलब्धियां सरकार और नियामक की सहयोगी नीतियों, आधुनिकतम प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा, मज़बूत जोखिम प्रबंधन ढांचा, व्यापक विश्वसनीयता और वैश्विक एवं घरेलू निवेशकों की भागीदारी की बदौलत संभव हुईं।'
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उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि और 2024-25 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए बाजार का विकास महत्वपूर्ण है। मजबूत पूंजी बाजार न सिर्फ वृद्धि की संभावना के लिए बल्कि हमारे युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

एनएसई सभी परिसंपत्ति वर्ग के लिए मजबूत बाजार बनाने  पर केंद्रित है। पिछले पांच साल में नकदी इक्विटी खंड में 90 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई है। साल 2015 में जो रोजाना औसत कारोबार करीब 17,572 करोड़ रुपये था वह साल 2019 में बढ़कर करीब 34,264 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इक्विटी डेरिवेटिव औसत कारोबार साल 70 फीसदी बढ़ा और साल 2019 में यह 88,772 करोड़ रुपये हो गया जो 2015 में करीब 52,371 करोड़ रुपये था। वायदा और नकदी बाजार कारोबार का अनुपात निरंतर करीब तीन गुना बना रहा। इसके अलावा इस अवधि में एनएसई में नकदी बाजार में हुए कारोबार का आपूर्ति फीसदी करीब 60 फीसदी रहा। वैश्विक स्तर और भारत में हुए अनुसंधान से साबित होता है कि वायदा बाजार का नकदी बाजार के कारोबार पर लाभकारी असर होता है।


नकदी इक्विटी और वायदा के आकार में वृद्धि भारत में इक्विटी बाजार के विस्तार के मद्देनजर हो रही है। एनएसई में पिछले पांच साल के दौरान नकदी इक्विटी खंड में 1.2  करोड़ नए निवेशकों का पंजीकरण हुआ है जिसमें से करीब 87 लाख पंजीकरण पिछले तीन साल में हुए हैं। यह भी स्पष्ट हुआ कि एक तिहाई निवेशक नए निवेशक छोटे शहरों और कस्बों से आये हैं जो मोबाइल और इंटरनेट ट्रेडिंग के जरिये जुड़े।

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