जानें TCS, जोमैटो, सेल व अन्य बड़ी कंपनियों को जून तिमाही में फायदा हुआ या नुकसान
कोरोना वायरस महामारी से दुनिया भर में व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। आइए जानते हैं ऑनलाइन खाना मंगाने के लिये मंच उपलब्ध कराने वाली जोमैटो, देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), निजी क्षेत्र के कर्नाटक बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी सेल, निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) और फ्यूचर कंज्यूमर लिमिटेड को जून में समाप्त तिमाही में फायदा हुआ है या नुकसान।
कर्नाटक बैंक को सबसे ऊंचा तिमाही मुनाफा
निजी क्षेत्र के कर्नाटक बैंक ने चालू वित्त वर्ष की जून में समाप्त पहली तिमाही में 196.38 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह बैंक का किसी एक तिमाही का सबसे ऊंचा लाभ है। लागत कटौती के विभिन्न उपायों तथा मूल आय में अच्छी वृद्धि से बैंक अच्छा लाभ कमा पाया है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने 175.42 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। बैंक ने बयान में कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 11.95 प्रतिशत बढ़कर 196.38 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह उसका सबसे ऊंचा तिमाही मुनाफा है।
तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय बढ़कर 2,134.63 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 1,749.33 करोड़ रुपये रही थी। तिमाही के दौरान बैंक का परिचालन लाभ 93.43 प्रतिशत बढ़कर 677.04 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 350.01 करोड़ रुपये रहा था। तिमाही के दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय 8.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 494.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 535.12 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। मेंगलूरू मुख्यालय वाले बैंक की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) तिमाही के दौरान बढ़कर कुल ऋण का 4.64 प्रतिशत हो गईं, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4.55 प्रतिशत थीं। हालांकि, इस दौरान बैंक का शुद्ध एनपीए 3.33 प्रतिशत से घटकर 3.01 प्रतिशत पर आ गया।
मूल्य के हिसाब से बैंक का सकल एनपीए 2,437.53 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,557.64 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं शु्द्ध एनपीए 1,759.77 करोड़ रुपये से घटकर 1,630.65 करोड़ रुपये रह गया। जून तिमाही में डूबे कर्ज और अन्य आकस्मिक खर्च के लिए बैंक का प्रावधान दोगुना से अधिक होकर 509.07 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 201.14 करोड़ रुपये था।
14 प्रतिशत गिरा TCS का शुद्ध लाभ
देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को जून में समाप्त तिमाही में एकीकृत आधार पर 7,008 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। यह साल भर पहले की इसी तिमाही से 13.8 प्रतिशत कम है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि उसे पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 8,131 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ हुआ था। आलोच्य तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व मामूली बढ़कर साल भर पहले के 38,172 करोड़ रुपये की तुलना में 38,322 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
कोरोना वायरस महामारी से दुनिया भर में व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के ऊपर मार्च तिमाही में महामारी का सीमित असर देखने को मिला था। महामारी के असर को पूरी जून तिमाही में महसूस किया गया है।
टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) राजेश गोपीनाथन ने कहा, 'महामारी का राजस्व पर प्रभाव उन तमाम तरीके से हुआ है, जिनकी हम तिमाही की शुरुआत में अनुमान लगा चुके थे। लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर को छोड़कर सभी वर्टिकल प्रभावित हुए हैं।' उन्होंने कहा, कंपनी का मानना है कि सबसे बुरा असर गुजर चुका है और अब वृद्धि की संभावनाओं पर गौर करना चाहिये। शुरुआती व्यवधान के बाद उपभोक्ता अब अपने परिचालन को स्थिर करने लगे हैं। कंपनी देख रही है कि कई उपभोक्ता डिजिटलीकरण पर ध्यान देने लगे हैं, इससे कंपनी के उत्पादों व सेवाओं की मांग देखी जा रही है।
कंपनी ने कहा कि जारी अनिश्चितता और सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बाद भी उसने अच्छा प्रदर्शन किया है और उसके पास अच्छे ऑर्डर हैं। टीसीएस ने पहली तिमाही की शुरुआत के समय कहा था कि उसे चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से सुधार की शुरुआत के अनुमान हैं।
2,960 करोड़ रुपये रही जोमैटो की आय
ऑनलाइन खाना मंगाने के लिये मंच उपलब्ध कराने वाली जोमैटो की आय पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में 2018-19 के मुकाबले दो गुना बढ़कर 39.4 करोड़ डॉलर (करीब 2,960 करोड़ रुपये) रही। कंपनी की ब्याज, कर और एमोर्टाइजेशन (ईबीआईटीडीए) पूर्व कमाई को लेकर विछले वित्त वर्ष में करीब 2,200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी की आय 1,440 करोड़ रुपये जबकि ईबीआईटीडीए नुकसान 2,080 करोड़ रुपये था। जोमैटो ने कहा कि कारोबार को मुनाफे की ओर ले जाना उसका मुख्य लक्ष्य है और वह इस मामले में अच्छी प्रगति की है।
कई गुना बढ़ा सेल का शुद्ध लाभ
सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी सेल का एकीकृत शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2019-20 की जनवरी-मार्च की चौथी तिमाही में कई गुना बढ़कर 2,647.52 करोड़ रुपये हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 548.20 करोड़ रुपये था। शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने कहा कि उसके व्यय में कमी आने के चलते उसका लाभ बढ़ा है। समीक्षावधि में कंपनी की कुल आय 16,574.71 करोड़ रुपये रही। हालांकि, इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी की आय 18,719.29 करोड़ रुपये रही थी।
इस दौरान कंपनी का व्यय इस दौरान तेजी से घटकर 11,682.12 करोड़ रुपये रहा जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 17,964.25 करोड़ रुपये था। बयान में कंपनी के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि, 'चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद कंपनी ने लगातार दूसरे साल लाभ दर्ज किया है। सरकार की समर्थनपूर्ण नीतियों ने कंपनी के लाभ को बरकरार रखने में अहम भूमिका निभायी है।' उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान कंपनी ने अपनी सर्वश्रेष्ठ वार्षिक बिक्री के लक्ष्य 1.42 करोड़ टन के लक्ष्य को हासिल किया है। जबकि कंपनी का कच्चा इस्पात उत्पादन 1.62 करोड़ टन रहा।
फ्यूचर कंज्युमर को 175.46 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा
फ्यूचर कंज्यूमर लिमिटेड ने मार्च 2020 को समाप्त तिमाही में 175.46 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा दर्ज किया है। बीएसई को दी गई एक नियामकीय सूचना में कहा गया है कि साल भर पहले की जनवरी से मार्च की अवधि में कंपनी ने 7.53 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया था। चौथी तिमाही में कंपनी की परिचालन से होने वाली आय 8.70 प्रतिशत घटकर 947.07 करोड़ रुपये रह गई। कंपनी, एफएमसीजी और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के व्यवसाय में उनकी प्राप्ति, विनिर्माण और विपणन के कार्यो में लगी हुई है।
लक्ष्मी विलास बैंक को 10 तिमाहियों के बाद हुआ शुद्ध लाभ
निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) को वित्त वर्ष 2019-20 की आखिरी तिमाही में 92.86 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। इससे पहले फंसे कर्ज में वृद्धि के चलते बैंक को लगातार 10 तिमाहियों में घाटे का सामना करना पड़ा। बैंक के लाभ में आने की प्रमुख वजह उसके फंसे कर्ज के लिए प्रावधान कम होना रहा। बैंक ने अपने वित्त वर्ष 2019-20 के वार्षिक और जनवरी-मार्च के तिमाही आंकड़े की जानकारी शेयर बाजार को दी। इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में बैंक को 264.43 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
जबकि 2019-20 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में भी बैंक का घाटा 334.48 करोड़ रुपये रहा था। हालांकि, समीक्षाधीन अवधि में बैंक की आय घटकर 629.76 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 739.73 करोड़ रुपये था। इस दौरान बैंक का सकल फंसा कर्ज (एनपीए) उसके सकल ऋण का 25.39 प्रतिशत रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 15.30 प्रतिशत था।
मूल्य के आधार पर बैंक का सकल एनपीए 4,233.31 करोड़ रुपये रहा, जबकि 31 मार्च 2019 को समाप्त हुई तिमाही में यह 3,358.99 करोड़ रुपये था। इस अवधि में बैंक का शुद्ध एनपीए उसके शुद्ध ऋण का 10.04 प्रतिशत (1,387.86 करोड़ रुपये) रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.49 प्रतिशत (1,506.29 करोड़ रुपये) था। बैंक के शुद्ध एनपीए में शुद्ध ऋण के अनुपात में वृद्धि होने के बावजूद बैंक का फंसे कर्ज के लिए प्रावधान घटकर 303.47 करोड़ रुपये रहा। जबकि 2018-19 की जनवरी-मार्च तिमाहीं में प्रावधान 478.77 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक को 836.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।