सभी ऑनलाइन खरीदारी पर लगेगा जीएसटी
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स्थानीय शुल्कों के बदले जीएसटी वित्तीय लेनदेन के पहले स्थान पर लगाया जाएगा। इससे ई-कॉमर्स क्षेत्र में जीएसटी लागू होने की स्थिति स्पष्ट होती है। ई-कॉमर्स में ऐसे लेनदेन भी होते हैं जहां सामान किसी एक राज्य में बेचा जाता है लेकिन उसकी खरीदारी दूसरे राज्य में की जाती है।
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मंगलवार को कोलकाता में हुई बैठक में राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने मॉडल जीएसटी कानून को मंजूरी दे दी है। अधिया ने ट्वीट कर कहा, ‘हम सभी साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वे अपने सुझाव/टिप्पणी वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के सचिवालय और/या वित्त मंत्रालय को दें।’
मॉडल जीएसटी कानून के प्रावधान
मॉडल जीएसटी कानून में 162 धाराएं और चार शेड्यूल हैं। मॉडल कानून में सिफारिश की गई है कि अगर कोई व्यक्ति या संस्थान कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसे पांच साल की जेल हो। इसमें प्रत्येक राज्य में अथॉरिटी फॉर एडवांस्ड रूलिंग (एएआर) बनाने की बात कही गई है।
इसके अलावा, मॉडल कानून में प्रत्येक राज्य में अपीलीय प्राधिकरण स्थापित करने का प्रावधान भी किया गया है। अपीलीय प्राधिकरण में सीजीएसटी के मुख्य आयुक्त और एसजीएसटी के आयुक्त शामिल होंगे। जीएसटी के मॉडल कानून में प्रकल्पित कराधान योजना की तर्ज पर कंपोजीशन लेवी का प्रावधान किया गया है।
इसके अनुसार, अगर किसी एक राज्य में कोई व्यक्ति वस्तु एवं सेवाओं की बिक्री से 50 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर पर कम से कम एक फीसदी कर लगाया जाएगा। 10 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर पर जीएसटी लगाया जाएगा। हालांकि, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर में यह सीमा पांच लाख रुपये होगी।
मॉडल कानून में उपभोक्ता कल्याण कोष बनाने का प्रावधान
जीएसटी के मॉडल कानून में उपभोक्ता कल्याण कोष बनाने का प्रावधान किया गया है। इसका इस्तेमाल केंद्र और राज्य सरकारें उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए करेंगी।
मॉडल इंटीग्रेटेड जीएसटी का रास्ता साफ
अधिकार प्राप्त समिति ने मॉडल इंटीग्रेटेड जीएसटी का रास्ता भी साफ कर दिया है। इंटीग्रेटेड जीएसजी वस्तुओं और सेवाओं की अंतर-राज्यीय बिक्री पर लागू होगी। इसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मंजूर किया जाना है।
सभी पंजीकृत व्यक्तियों को भरना होगा रिटर्न
मॉडल जीएसटी कानून के अनुसार, कर देने वाले प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति को इस कानून के तहम खुद ही देया टैक्स की गणना करनी होगी और प्रत्येक कर अवधि के लिए रिटर्न दाखिल करना होगा। कोई भी करदाता जो बाहर जाने वाली या आने वाली या वापस हुई आपूर्तियों की विस्तृत जानकारी नियत समय तक नहीं देता है तो उसे प्रति दिन 100 रुपये के हिसाब से बिलंब शुल्क देना होगा जो अधिकतम पांच हजार रुपये होगा।