कोरोना का कोहराम, छह दिनों में निवेशकों को हुआ 12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
- कोरोनावायरस के चलते दुनिया भर के बाजारों में मचे कोहराम मच गया है।
- शुक्रवार को कुछ ही घंटों में निवेशकों के लगभग 5.46 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
- वहीं छह कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों के शेयर बाजार में लगभग 11.76 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं।
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कोरोनावायरस के चलते दुनिया भर के बाजारों में मचे कोहराम से भारतीय शेयर बाजार भी अछूते नहीं रहे और सेंसेक्स में इतिहास की दूसरी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को सेंसेक्स में 1,448 अंक और निफ्टी में 432 अंकों की कमजोरी देखने को मिली। यह लगातार छठा सत्र रहा, जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ। इससे कुछ ही घंटों में निवेशकों के लगभग 5.46 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बिकवाली इतनी तगड़ी थी कि धातु, आईटी, वाहन सहित कोई भी सूचकांक गिरावट से अछूता नहीं रहा।
कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी रही और सेंसेक्स में 1,525 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली, हालांकि बाद में 1,448 अंक कमजोर होकर 38,297.29 पर बंद हुआ। इसी प्रकार निफ्टी 431.55 अंक टूटकर 11,201.75 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में आठ फीसदी की कमजोरी के साथ टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा। इसके अलावा टाटा स्टील, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस, एसबीआई और बजाज फाइनेंस में 7.50 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।
छह सत्र में 3,000 अंक टूटा सेंसेक्स
पिछले छह कारोबारी सत्र से जारी गिरावट पर गौर करें तो इस दौरान निवेशकों के शेयर बाजार में लगभग 11.76 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। इस दौरान सेंसेक्स 2,974 अंक यानी लगभग 7.3 फीसदी कमजोर होकर 38,297 पर बंद हुआ, जबकि बुधवार को यह 41,323 के स्तर पर था। वहीं एक दिन में निवेशकों की बाजार पूंजी 5.46 लाख करोड़ रुपये घटकर 146.93 लाख करोड़ रुपये रह गई।
एफपीआई की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता: विश्लेषक
विश्लेषकों के मुताबिक, दुनिया भर में कोरोना के पीड़ितों के मामले सामने आने और इसके आर्थिक असर के आकलन से वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ती जा रही है। चीन से शुरू होने के बाद दुनिया भर में लगभग 83 हजार लोग इसके पीड़ित हो चुके हैं। ट्रेडर्स ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा भारी बिकवाली से खुदरा निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
कई सेक्टरों की बाजार पूंजी एक लाख करोड़ से ज्यादा घटी
सेक्टरों की बात करें तो पिछले छह कारोबारी सत्र के दौरान रिफाइनरी, बैंक, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों की बाजार पूंजी में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा वाहन, बुनियादी ढांचा, विमानन, बिजली उत्पादन व वितरण और शिपिंग क्षेत्र में 19 फरवरी से अभी तक 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
सेंसेक्स की पांच बड़ी गिरावट
| तारीख | 1 फरवरी, 2020 |
| 24 अगस्त, 2015 | 1,624 |
| 28 फरवरी, 2019 | 1,448 |
| 21 जनवरी, 2008 | 1,408 |
| 24 अक्तूबर, 2008 | 1,070 |
| 1 फरवरी, 2020 | 988 |
गिरावट की पांच बड़ी वजह
- कोरोना के प्रकोप के चलते दुनिया भर के बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता, एशिया, अमेरिका, यूरोप सभी देशों में गिरावट।
- निफ्टी के 200 डीएमए (डेली मूविंग एवरेज) के नीचे जाने से तेज हुई बिकवाली।
- चीन बाधित हो रहा आयात, घरेलू उद्योग पर भारी असर पड़ने की आशंका।
- पर्यटन को झटका लगने की आशंका, चीन की है इस क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी, आटो-विमानन सहित सभी सेक्टरों पर असर।
- जीडीपी के आंकड़ों को लेकर निवेशकों का रहा सतर्क रुख, बढ़ी बिकवाली।