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अभी परिपक्व नहीं है देश की आर्थिक-राजनीतिक प्रणाली
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Fri, 03 Mar 2017 04:48 AM IST
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अर्थव्यवस्था
- फोटो : InBoogle
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मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि भारत की आर्थिक और राजनीतिक प्रणालियों में नपे-तुले हस्तक्षेप की परिपक्वता का अभाव है। इस वजह से अक्सर प्रतिबंध और अंकुश की कार्रवाई देखने को मिलती है।
सुब्रमण्यन ने यहां एक कार्यक्रम में इस बात पर चिंता जताई कि भारत में न्यायपालिका ने विधायिका से अधिक अधिकार हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज भी कुछ अधिक ही मुकदमेबाज समाज हो गया है। देश में स्वतंत्र नियामकीय संस्थानों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होनी चाहिए।
सुब्रमण्यन ने कहा कि उनका मानना है कि भारत में नियामकीय संस्थाएं अभी विकास के क्रम में हैं। उन्हें नहीं लगता कि देश ने अभी नियामकीय संस्थानों के मामले में वह परिपक्वता हासिल कर ली है जो होनी चाहिए। इस मामले में हमें ईमानदारी से सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए। विभिन्न संस्थानों में क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक और राजनीतिक प्रणाली ने अभी वह परिपक्वता हासिल नहीं की है, जिसमें समस्याओं के समाधान के लिए सीधे तरीके से हस्तक्षेप किया जा सके। ऐसे में प्रतिबंध और अंकुश जैसे बिना धार के हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।
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प्रतिस्पर्धा नीति के क्षेत्र पर उन्होंने कहा कि जहां भी जरूरी हो, वहां नपे-तुले अंदाज में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा करना कोई आसान काम नहीं है।
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सुब्रमण्यन ने यहां एक कार्यक्रम में इस बात पर चिंता जताई कि भारत में न्यायपालिका ने विधायिका से अधिक अधिकार हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज भी कुछ अधिक ही मुकदमेबाज समाज हो गया है। देश में स्वतंत्र नियामकीय संस्थानों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होनी चाहिए।
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सुब्रमण्यन ने कहा कि उनका मानना है कि भारत में नियामकीय संस्थाएं अभी विकास के क्रम में हैं। उन्हें नहीं लगता कि देश ने अभी नियामकीय संस्थानों के मामले में वह परिपक्वता हासिल कर ली है जो होनी चाहिए। इस मामले में हमें ईमानदारी से सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए। विभिन्न संस्थानों में क्षमता निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक और राजनीतिक प्रणाली ने अभी वह परिपक्वता हासिल नहीं की है, जिसमें समस्याओं के समाधान के लिए सीधे तरीके से हस्तक्षेप किया जा सके। ऐसे में प्रतिबंध और अंकुश जैसे बिना धार के हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।
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प्रतिस्पर्धा नीति के क्षेत्र पर उन्होंने कहा कि जहां भी जरूरी हो, वहां नपे-तुले अंदाज में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा करना कोई आसान काम नहीं है।