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पूंजी में बदला कर्ज तो कंपनी पर नहीं शुरू होगी दिवालिया प्रक्रिया
Fri, 04 Sep 2020 08:47 AM IST
Kuldeep Singh
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 04 Sep 2020 08:47 AM IST
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एनसीएलएटी
- फोटो : फाइल फोटो
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राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कहा है कि कंपनियां अगर कर्ज को इक्विटी की तरह पूंजी में बदल देती हैं, तो उनके खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती है। रीता कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि कोई भी निवेश ‘वित्तीय कर्ज’ नहीं हो सकता है।
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एनसीएलएटी का आदेश, ‘वित्तीय कर्ज’ नहीं बन सकता निवेश
पीठ ने कहा, कोई वित्तीय कर्जदाता अगर कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करना चाहे तो दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) की धारा-7 के प्रावधान सिर्फ तभी लागू होंगे, जब मामले में कोई ‘कर्ज’ एवं ‘डिफॉल्ट’ हुआ हो। मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 26 नवंबर, 2019 के आदेश को कायम रखते हुए एनसीएलएटी ने आईबीसी की धारा-7 का हवाला देते हुए कहा, स्पष्ट है कि एक बार ‘कर्ज’ को पूंजी में बदल दिया जाए तो इसे ‘वित्तीय कर्ज’ और अपीलकर्ता को ‘वित्तीय कर्जदाता’ नहीं माना जा सकता है।
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यह है मामला
रीता कपूर ने 26 नवंबर, 2019 को एनसीएलटी में इन्वेस्ट केयर रियल एस्टेट एलएलपी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका लगाई थी। कपूर ने दावा किया कि उन्होंने कंपनी में 40 लाख रुपये निवेश किए थे, जिसके आधार पर वह वित्तीय कर्जदाता हैं, लेकिन कंपनी ने उनके भुगतान में चूक की और 25 मार्च, 2014 को कर्ज को इक्विटी में बदल दिया।
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