आरबीआई कर्मियों ने पटेल को लिखा पत्र, कहा- बैंक की स्वायत्तता की करें रक्षा
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भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारी यूनियन ने बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से अनुरोध किया है कि वह इस केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को बचाएं। साथ ही केंद्र सरकार को इसकी प्रक्रिया में दखलंदाजी की इजाजत न दें।
कर्मचारी यूनियन ने यह अपील नोटबंदी के मामले में आरबीआई की भूमिका की आलोचना के बाद की है। अर्थशास्त्रियों ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंदकर 86 फीसदी करेंसी को चलन से बाहर करने के फैसले के लिए आरबीआई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए नोटों की छपाई की धीमी गति से आरबीआई की प्रतिष्ठा में कमी आई है। कुछ लोग आरबीआई की स्वतंत्रता पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं। वे इस बात से भी सहमति जता रहे हैं कि काफी कम तैयारी के साथ नोटबंदी का फैसला लागू कर दिया गया।
'केंद्रीय बैंक की आलोचना होना दुखद'
कर्मचारी यूनियन ने आरबीआई गवर्नर को 13 जनवरी को लिखे पत्र में कहा है कि यह दुखद है कि नोटबंदी जैसे कठिन परिस्थिति से सफलता पूर्वक निपटने के बावजूद केंद्रीय बैंक की आलोचना हो रही है।
पत्र में एक स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि नकदी की व्यवस्था में समन्वय स्थापित करने के लिए वित्त मंत्रालय ने एक नौकरशाह को आरबीआई भेजा था। पत्र में कर्मचारी यूनियन ने कहा है कि अगर यह सच है तो फिर यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है और वह सरकार द्वारा आरबीआई की स्वायत्तता में हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करता है।
यूनियन ने कहा है कि केंद्रीय बैंक को अपना काम करने के लिए किसी की मदद की जरूरत नहीं है। कर्मचारी यूनियन ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार नोटबंदी के दौरान आरबीआई के बेहतर प्रदर्शन को कमतर दिखाने के साथ ही केंद्रीय बैंक के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण कर रही है। यूनियन के एक सदस्य ने उक्त पत्र की सत्यता की पुष्टि की है। आरबीआई ने इस पर तत्काल कोई बयान नहीं दिया है। वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी किसी तरह की टिप्पणी से इनकार किया है।