खुशखबरी: बीते 6 साल में ब्याज दर सबसे कम
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त्योहारों के मौसम में कर्ज पर ब्याज दर कम करके रिजर्व बैंक ने उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा दिया है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में एक चौथाई फीसदी कटौती कर अब इसे छह साल के सबसे निचले स्तर 6.25 प्रतिशत पर ला दिया है यानी बैंकों को अब इसी दर पर रिजर्व बैंक से कर्ज मिल जाएगा। नए गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति की पहली समीक्षा में हालांकि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को अपरिवर्तित रखा है जबकि रिवर्स रेपो भी अब घटकर 5.75 प्रतिशत पर आ गई है।
उल्लेखनीय है कि इस बार नीतिगत दरों की समीक्षा के लिए एक छह सदस्यीय मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) बना दी गई है, जिसने मंगलवार को यह फैसला किया। पहले यह फैसला अकेले गवर्नर लेते थे। बताया जाता है कि इस बार की समीक्षा में एमपीसी के सभी छह सदस्यों ने एक सुर में दरों के कटौती के पक्ष में अपना मत दिया। सरकार ने आरबीआई के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बाजार में तरलता आएगी और 8 प्रतिशत विकास दर (जीडीपी) का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी। नवंबर 2010 में भी रेपो दर 6.25 प्रतिशत ही थी लेकिन अक्तूबर 2011 में यह 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गई।
रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि कमजोर वैश्विक मांग की वजह से कारोबार घट रहा है। इसलिए ऐसा संभव है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष वैश्विक विकास की दर को और नीचे कर दे। यही नहीं, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम से भी इस पर असर पड़ेगा। इसी आलोक में यह फैसला किया गया है। वर्ष 2016-17 की चौथी मौद्रिक नीति समीक्षा में पटेल ने कहा, ‘इस कटौती का इससे पहले सरकार की ओर से छोटी बचत दरों में कमी के उठाए गए कदमों का फायदा ग्राहकों को मिलेगा। बैंक इससे ग्राहकों को कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
रेपो रेट में होगी कटौती इस पर था संशय
रिजर्व बैंक से जारी एक बयान में बताया गया है कि खेती-किसानी क्षेत्र से बुवाई का रकबा बढ़ने की खबर है। इससे उपज बढ़ेेगी, जिसका खाद्यान्नों की कीमत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इसे देखते हुए मौद्रिक नीति कमेटी का मानना है कि खाद्य वस्तुओं में महंगाई की दर घटेगी। यही नहीं, सरकार भी खाद्य महंगाई की दर को काबू में करने के लिए कई कदम उठा रही है, खास कर दालों के लिए। इसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने जनवरी से मार्च की तिमाही में महंगाई दर 5.3 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।
रिजर्व बैंक के इस फैसले से ईएमआई घटने के आसार हैं। हालांकि ऐसा पहले भी देखा गया है कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कटौती के बावजूद बैंकों ने ब्याज दर में कटौती नहीं की। जनवरी 2015 से पिछली नीतिगत समीक्षा तक देखें तो रिजर्व बैंक ने इस दौरान रेपो दर में 1.5 फीसदी की कटौती की, जबकि बैंकों ने ब्याज दर में महज आधा फीसदी की कटौती की है।
रिजर्व बैंक की नीतिगत समीक्षा पर केंद्रीय वित्त सचिव अशोक लवासा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से वित्तीय तंत्र में तरलता बढ़ेगी। यही नहीं, इससे बाजार की धारणा में भी सुधार होगा। रिजर्व बैंक के इस फैसले का शेयर बाजारों ने भी स्वागत किया। दरों में कटौती की घोषणा होने के बाद बांबे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स एकबारगी 100 अंक ऊपर चला गया, लेकिन फिर वह 80 से 90 अंक की बढ़त के दायरे में रहा। बाजार बंद होने के समय यह 91 अंक ऊपर था।
आपको कितना होगा फायदा
मान लीजिए, आपने 50 लाख रुपये का 15 साल के लिए कर्ज लिया है और बैंक आपसे 9.50 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूलते हुए 52,211 रुपये ईएमआई ले रहा है। लेकिन ब्याज की दर यदि वह 9.25 प्रतिशत कर दे तो आपको प्रतिमाह 751 रुपये की बचत होगी और आपकी ईएमआई 51,460 रुपये हो जाएगी। दीर्घकालिक लाभ के तौर पर आपको 1,35,291 रुपये का फायदा होगा।