ऊर्जित पटेल की पहली क्रेडिट पॉलिसी: क्या घटेगी आपकी ईएमआई?
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रिजर्व बैंक की मंगलवार को होने वाली नीतिगत दरों की समीक्षा में ब्याज दर में कटौती होगी या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि ब्याजदर कटौती पर विशेषज्ञ एकमत नहीं दिख रहे हैं।
कोई ब्याज दरों में थोड़ी राहत मिलने की बात कर रहा है तो कोई इसके यथास्थिति रहने की। ऊर्जित पटेल के रिजर्व बैंक के गवर्नर बनने और मौद्रिक नीति (एमपीसी) के गठन के बाद यह पहली समीक्षा बैठक है। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य का कहना है कि अभी महंगाई की दर कम है। इसलिए ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश बनती है।
उनका कहना है कि इस साल सामान्य मॉनसून है, जिससे महंगाई नियंत्रण में रहेगी। वहीं, पूंजीगत व्यय भी कम है। लेकिन दिक्कत की बात यह है कि विकास दर कम है।
मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक मौद्रिक नीति में क्या हो सकता है इस बात का पता लगाने के लिए 18 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच सर्वेक्षण किया गया है। इसमें 14 बैंकों ने बताया कि मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक रेट घटा सकता है। वहीं, अन्य बैंकों का कहना है कि रेट में बदलाव नहीं होगा।
'रेट कटौती से पहले इंतजार करे आरबीआई'
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने हाल के एक शोध पत्र में कहा है कि दरों में कटौती करने से पहले रिजर्व बैंक कुछ इंतजार करे क्योंकि महंगाई के जो रुझान हैं, वे तेज हो सकते हैं। उनके मुताबिक महंगाई बढ़ने का खतरा मुद्रास्फीति की अधिक दर की वजह से है, जिसमें लगातार 14 माह के दौरान दोहरे अंकों में वृद्धि देखी गई है।
हालांकि अमेरिकी एजेंसी फिच ग्रुप की कंपनी, इंडिया रेटिंग ने कहा है कि अगस्त में खुदरा महंगाई में तेजी से कमी आई है, जिसके कारण अगली तिमाही में खुद दर कटौती की स्थिति बनी है। इसके साथ ही अगले वर्ष मार्च तक महंगाई की खुदरा दर को घटाकर पांच प्रतिशत पर लाने के लक्ष्य को हासिल करने लायक बना दिया है।
मंगलवार की नीतिगत समीक्षा में सिर्फ रिजर्व बैंक के गवर्नर की ही नहीं बल्कि एमपीसी की चलेगी। एमपीसी के गठन के बाद भारत अब उन विकसित देशों की सूची में आ गया है, जहां ब्याज दर के बारे में फैसला एक समिति करती है।