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खुशखबरः छुपाई गई बीमारी का इलाज कराने पर भी मिलेगा बीमा क्लेम

Sat, 13 Oct 2018 10:17 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 13 Oct 2018 10:17 AM IST
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policy holder will get insurance claim on lifestyle related disease

शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को मृतक मधुमेह के मरीज के परिजन को पांच लाख रुपये का भुगतान करने के लिए कहा है। आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि बीमा के दावे जीवनशैली की आम बीमारियों के आधार पर खारिज नहीं किए जा सकते। 

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 राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) ने पंजाब राज्य आयोग के आदेश को खारिज करते हुए एलआईसी की चंडीगढ़ शाखा को पंजाब निवासी नीलम चोपड़ा को बीमा राशि के साथ ही 25,000 रुपये का मुआवजा तथा मुकदमे में खर्च हुए 5,000 रुपये की राशि का 45 दिनों के भीतर भुगतान करने को कहा।
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नीलम चोपड़ा के पति ने 2003 में एलआईसी की एक पॉलिसी खरीदी थी। वह मधुमेह के रोगी थी। फॉर्म भरते हुए उन्होंने अपनी बीमारी का उल्लेख नहीं किया था। साल 2004 में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।
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पति के निधन के बाद जब नीलम ने पॉलिसी के लिए दावा किया, तो कंपनी ने उसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृतक ने पॉलिसी खरीदते वक्त अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी छिपाई और दावे का समय बीत चुका है। 

आयोग ने कहा कि नीलम चोपड़ा के पति की मौत ‘कार्डियो रेस्पाइरेटरी अरेस्ट’ की वजह से हुई और यह मौत की तारीख के महज पांच महीने पहले हुआ था। इस तरह इससे स्पष्ट होता है कि फॉर्म भरते वक्त उन्हें यह बीमारी नहीं थी। मधुमेह की बीमारी भी थी, लेकिन फॉर्म भरते वक्त वह नियंत्रण में थी। इसके अलावा, इस तरह की जीवनशैली की बीमारी के बारे में न बताने से दावेदार का दावा खारिज नहीं होगा। 

जानकारी छिपाने से हो सकता है नुकसान

शीर्ष आयोग ने हालांकि कहा कि यह आधार बीमित व्यक्ति को इस तरह की किसी बीमारी की जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं प्रदान करता है और बीमित व्यक्ति को दावे की कमी के रूप में नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।


आयोग ने कहा कि पहले से किसी बीमारी के बारे में कोई भी जानकारी छिपाना, जिसकी वजह से मौत नहीं हुई या मौत के कारण से उसका कोई लेना-देना हो, तो यह दावेदार को दावा पाने से नहीं रोकेगा।

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