छूट के बाद भारत ने फिर शुरू किया मलयेशिया से पॉम ऑयल आयात
- कश्मीर मुद्दे पर मलयेशिया सरकार के विरोधी सुर के बाद बंद हुआ था आयात
- मलेशिया सरकार ने वहां से आयात करने पर दी है पांच डॉलर प्रति टन की छूट
- कारोबारियों ने दिसंबर में 70 हजार टन पॉम ऑयल आयात करने का करार किया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मलयेशिया से पॉम ऑयल के सबसे बड़े खरीदार रहे भारत ने करीब एक महीने बाद फिर से आयात शुरू कर दिया है। मलयेशिया की ओर से शुल्क में राहत दिए जाने के बाद भारतीय शोधकर्ताओं ने आयात दोबारा बहाल कर दिया। कारोबारियों ने दिसंबर में 70 हजार टन पॉम ऑयल आयात करने का करार किया है। इस पर कुआलालाम्पुर की ओर से 5 डॉलर प्रति टन की राहत दी जा रही है।
मामले से जुड़े कारोबारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि मलयेशिया में पॉम ऑयल की कीमतें पिछले दो वर्षों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। इसके अलावा कश्मीर मुद्दे पर मलयेशिया सरकार के विरोधी सुर के बाद कारोबारियों में सरकार की ओर से सख्ती बरते जाने की आशंका से पिछले महीने आयात बंद कर दिया गया था।
मुंबई स्थित वैश्विक कारोबारी फर्म का कहना है कि मलयेशिया हमें पांच डॉलर प्रति टन की छूट के साथ पॉम ऑयल के आयात को राजी है। इस कदम से कई कारोबारियों के आयात का रास्ता साफ हो गया है। गौरतलब है कि खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सबसे ज्यादा पॉम ऑयल का आयात मलयेशिया से करता है, जबकि इंडोनेशिया दूसरे पायदान पर है।
एक साल के निचले स्तर पर पॉम आयात
वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने से भारतीय कारोबारियों ने पॉम ऑयल का आयात अक्तूबर में काफी कम कर दिया है। इससे कुल आयात करीब एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। ब्लूमबर्ग ने एक सर्वे रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल के मुकाबले आयात में 15 फीसदी गिरावट आई है। इस दौरान कीमतों ने भी चार साल का शिखर छुआ है। अक्तूबर में ही पॉम की वायदा कीमतें 16 फीसदी बढ़ गई थी, जो सितंबर 2015 के बाद का उच्चतम स्तर है।