{"_id":"5834d5244f1c1bc05513b287","slug":"after-demonetisation-sharp-hike-in-inflation","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी के बाद अब आटे-दाल का भाव भी आसमान पर","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
नोटबंदी के बाद अब आटे-दाल का भाव भी आसमान पर
राजीव कुमार/ एजेंसी
Updated Wed, 23 Nov 2016 05:01 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाजार में नकदी की किल्लत से जूझ रहे लोगों का अब आटा भी गीला होने लगा है। गेहूं के दाम में पिछले एक महीने के दौरान 15 फीसदी की तेजी आई है, वहीं नोटबंदी के बाद आटे का खुदरा दाम प्रति किलो 7 से 8 रुपये तक बढ़ गया है। हालांकि सब्जियों के थोक भाव में गिरावट आई है लेकिन चना दाल में 10 रुपये से लेकर 38 रुपये तक प्रति किलो तेजी आई है। कुछ खाद्य तेलों के भाव में भी इजाफा हुआ है।
थोक व खुदरा व्यापारियों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद गेहूं, चावल जैसी चीजों को व्यापारी अधिक मात्रा में स्टोर कर रहे हैं। नकदी की कमी से रबी की बुआई में 10 दिनों की देरी हो चुकी है। व्यापारियों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से बाजार में कम मात्रा में गेहूं भेजा जा रहा है। इसका असर भी गेहूं के दाम पर दिख रहा है। दिल्ली अनाज मंडी के कारोबारी सुनील गुप्ता ने बताया कि सरकार की तरफ से 2015-16 में 9.35 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब यह उत्पादन 8.80 करोड़ टन रह सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की मंडी में गेहूं के औसत भाव अभी 2250 रुपये प्रति क्विंटल है।
एक-डेढ़ माह पहले तक 21-22 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिकने वाला आटा 28-29 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। केंद्रीय भंडार में अक्तूबर माह में 220 रुपये में 10 किलोग्राम के आटे के पैकेट की कीमत 280 रुपये हो गई है। केंद्रीय भंडार के कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गत 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद केंद्रीय भंडार में 1000-500 रुपये के नोट के चलन को जारी रखने की वजह से आटे की मांग में कई गुना बढ़ गई है।
विज्ञापन
सीमा तय नहीं होने की वजह से पुराने नोटों से कई ग्राहक 50-100 किलोग्राम तक आटे की खरीदारी कर रहे हैं। नरेला अनाज मंडी में गेहूं के व्यापारी जयबीर राणा ने बताया कि गेहूं के दाम में बढ़ोतरी का सिलसिला अभी जारी रह सकता है और पिछले माह के मुकाबले 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
विज्ञापन
थोक व खुदरा व्यापारियों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद गेहूं, चावल जैसी चीजों को व्यापारी अधिक मात्रा में स्टोर कर रहे हैं। नकदी की कमी से रबी की बुआई में 10 दिनों की देरी हो चुकी है। व्यापारियों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से बाजार में कम मात्रा में गेहूं भेजा जा रहा है। इसका असर भी गेहूं के दाम पर दिख रहा है। दिल्ली अनाज मंडी के कारोबारी सुनील गुप्ता ने बताया कि सरकार की तरफ से 2015-16 में 9.35 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब यह उत्पादन 8.80 करोड़ टन रह सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की मंडी में गेहूं के औसत भाव अभी 2250 रुपये प्रति क्विंटल है।
विज्ञापन
एक-डेढ़ माह पहले तक 21-22 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिकने वाला आटा 28-29 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। केंद्रीय भंडार में अक्तूबर माह में 220 रुपये में 10 किलोग्राम के आटे के पैकेट की कीमत 280 रुपये हो गई है। केंद्रीय भंडार के कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि गत 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद केंद्रीय भंडार में 1000-500 रुपये के नोट के चलन को जारी रखने की वजह से आटे की मांग में कई गुना बढ़ गई है।
विज्ञापन
सीमा तय नहीं होने की वजह से पुराने नोटों से कई ग्राहक 50-100 किलोग्राम तक आटे की खरीदारी कर रहे हैं। नरेला अनाज मंडी में गेहूं के व्यापारी जयबीर राणा ने बताया कि गेहूं के दाम में बढ़ोतरी का सिलसिला अभी जारी रह सकता है और पिछले माह के मुकाबले 25 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
लोकसभा ने भी जताई चिंता
चना दाल की बढ़ती कीमतों पर मंगलवार को लोकसभा में भी चिंता जताई गई। पिछले साल 70 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चना दाल अब 150 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही है। नोटबंदी के पहले तक यह 120 रुपये प्रति किलो बिक रही थी जो 8 नवंबर के बाद 150 से 160 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
लोकसभा में खाद्य राज्यमंत्री सीआर चौधरी ने लिखित जवाब में बताया कि अब तक 4.06 लाख टन दालों का आयात किया जा चुका है। सरकार ने 20 लाख टन के बफर स्टॉक की मंजूरी दी है। लेकिन पिछले दो साल से चने का उत्पादन कम होने, नकदी की किल्लत और जमाखोरी की वजह से इसकी कीमत बढ़ रही है।खुदरा दुकानदारों ने बताया कि फार्चुन तेल के खुदरा दाम पिछले 15 दिनों में 78-80 रुपये प्रति लीटर से बढकर 88 रुपये हो गए हैं।
सब्जियों के दाम जमीन पर
आजादपुर मंडी में सब्जी के थोक विक्रेता बलबीर सैनी ने बताया कि सब्जी तुरंत नष्ट होने वाली चीज होती है। किसान उसे ज्यादा दिनों तक न तो खेत में रख सकते हैं और न ही स्टोर में। नकदी की कमी से बाजार में सब्जी की बिक्री भी कम हो गई है और किसान किसी भी तरह अपनी लागत निकालने के लिए औने-पौने दाम पर सब्जी बेच रहा है।
लोकसभा में खाद्य राज्यमंत्री सीआर चौधरी ने लिखित जवाब में बताया कि अब तक 4.06 लाख टन दालों का आयात किया जा चुका है। सरकार ने 20 लाख टन के बफर स्टॉक की मंजूरी दी है। लेकिन पिछले दो साल से चने का उत्पादन कम होने, नकदी की किल्लत और जमाखोरी की वजह से इसकी कीमत बढ़ रही है।खुदरा दुकानदारों ने बताया कि फार्चुन तेल के खुदरा दाम पिछले 15 दिनों में 78-80 रुपये प्रति लीटर से बढकर 88 रुपये हो गए हैं।
सब्जियों के दाम जमीन पर
आजादपुर मंडी में सब्जी के थोक विक्रेता बलबीर सैनी ने बताया कि सब्जी तुरंत नष्ट होने वाली चीज होती है। किसान उसे ज्यादा दिनों तक न तो खेत में रख सकते हैं और न ही स्टोर में। नकदी की कमी से बाजार में सब्जी की बिक्री भी कम हो गई है और किसान किसी भी तरह अपनी लागत निकालने के लिए औने-पौने दाम पर सब्जी बेच रहा है।