GST: 17 साल पहले शुरू हुआ था सफर, ऐसे बना देश का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी के जरिए पहली बार देश की अर्थव्यवस्था एक सूत्र से बंध रही है। और, देश की सवा सौ करोड़ आबादी किसी भी सामान को खरीदने पर पूरे देश में एक समान कर देगी। दुनिया के संघीय ढांचों वाले किसी भी देश में ये अपनी तरह का पहला और सबसे महात्वाकांक्षी कर सुधार प्रयास है। लेकिन देश में कर सुधारों को लेकर ये पहला प्रयास नहीं है।
1978
जनता पार्टी सरकार के दौरान अप्रत्यक्ष कर जांच समिति ने पहली बार मोडीफाइट वैल्यू एडेड टैक्स की तरफ देश का ध्यान खींचा। इस समिति के अध्यक्ष थे रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके एल के झा। झा देश के दो प्रधानमंत्रीयों लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के प्रमुख सचिव भी रहे।
1986
देश में कर सुधारों का सबसे पहला और सबसे बड़ा काम किया राजीव गांधी की सरकार ने। इसका श्रेय उस समय के वित्त मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को जाता है। एक मार्च 1986 को लागू हुए मोडीफाइड वैल्यू एडेड टैक्स यानी मॉडवैट में ये व्वस्था की गई कि कच्चे पाल और कल पुर्जों पर चुकाई गई एक्साइज ड्यूटी का फैक्ट्रियां चलाने वाले उद्योगपतियों पूरा और शीघ्र भुगतान तुरंत हो जाए। इसका उद्देश्य ग्राहकों तक माल पहुंचने से पहले तमाम जगहों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को कम करना था।
1991-92
पी वी नरसिंह राव की सरकार में वित्त मंत्री थे मनमोहन सिंह। मनमोहन सिंह ने मशहूर फिनैंस एक्सपर्ट राजा चेल्लय्या को कर सुधारों को लेकर बनाए गए आयोग का अध्यक्ष बनाया। इसी आयोग ने देश में वैट लागू करने की सिफारिश की। देश में सेवाओं पर पहली बार कर 1994 में लगने शुरू हुए।
1997
एच डी देवेगौड़ा की यूनाइटेड फ्रंट सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने देश के लिए एक ड्रीम बजट पेश किया। इस बजट में चिदंबरम ने कस्टम ड्यूटी की दर एक झटके में 50 फीसदी से घटाकर चालीस फीसदी कर दी। चिदंबरन में टैक्स प्रणाली के सरलीकरण के लिए भी कई कदम उठाए।
1999
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पहली बार देश के सभी राज्यों को करों के मसले पर एक साथ लाने की शुरुआत की। वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को इसकी जिम्मेदारी मिली और उन्होंने कर सुधारों के बाकी बचे एजेंडे पर काम शुरू किया। पहली बार राज्यों और केंद्र के बीच बिक्री कर को मची रहने वाली खींचतान खत्म करने पर सहमति बनी। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की एम्पॉवर्ड कमेटी के अध्यक्ष बने और इसी के साथ देश में वैट लागू करने का काम शुरू हो गया।
2001-02
देश में एक अप्रैल 2002 से वैट लागू करने की घोषणा की गई, लेकिन बीजेपी शासित प्रदेशों के व्यापारियों के कड़े विरोध के बाद इसे अगले साल एक अप्रैल 2003 तक टाल दिया गया।
2003
जसवंत सिंह के वित्त मंत्री रहते हुए संविधान में एक बड़ा बदलाव किया गया। इसके जरिए केंद्र को सेवाओं पर कर लगाने की शक्ति मिली। इसी दौरान एक टास्क फोर्स का गठन हुआ जिसने जीएसटी का पहला प्रारूप तैयार किया। इसमें राज्यों के लिए सात फीसदी और केंद्र के लिए पांच फीसदी की एकल दर तय की गई थी। वैट लागू करने की तारीख इसी दौरान बढ़ाकर एक अप्रैल 2005 कर दी गई।
2005
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम की देखरेख में एक अप्रैल 2005 से देश में वैट लागू किया गया।
2007
पी चिदंबरम ने अपने बजट भाषण में जीएसटी लागू करने के लिए अप्रैल 2010 की समय सीमा की घोषणा की। एम्पॉवर्ड कमेटी को राज्यों से बात कर नया कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
2009
वित्त मंत्रालय ने जीएसटी पर पहला परिचर्चा पत्र जारी किया।
2009-10
तेरहवें वित्त आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस का विस्तार करके इसमें जीएसटी को शामिल किया गया। आयोग ने जीएसटी लागू होने पर राज्यों को अनुदान का सुझाव भी दिया।
2011
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी फ्रेमवर्क के लिए 115वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। बिल को यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति के पास भेजा गया। समिति ने 2013 में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस दौरान बीजेपी शासित प्रदेशों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसका जबर्दस्त विरोध किया। विरोध करने वाले राज्यों में तमिलनाडु भी शामिल था।
2013-14
यूपीए सरकार जीएसटी को लेकर कानून पास नहीं करा पाई। लेकिन, इसी दौरान जीएसटीएन (गुड्स एंड सर्विसेस टैक्सेशन नेटवर्क) बनाया गया, इसकी सिफारिश इंफोसिस के पूर्व सीईओ नंदन नीलेकणी में बनी एक समिति ने की थी।
2014-15
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिसंबर 2014 में फिर से संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जिसे अगले साल लोकसभा ने पारित कर दिया। इसके बाद इसे राज्य सभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया।
2016
राज्य सभा से भी बिल पारित हो गया। इसी के साथ जीएसटी काउंसिल ने कर दरों और दूसरे महत्वपूर्ण विषयो पर काम करना शुरू कर दिया। जीएसटी लागू करने की तारीख एक अप्रैल 2017 तय की गई, हालांकि बाद में इसे बढ़ा दिया गया।
2017
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी लागू करने के लिए देश के तमाम मुख्यमंत्रियों के अलावा तकरीबन सभी दलों के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। सभी प्रदेशों में जीएसटी को लेकर एक राय बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। सभी राज्यों के सहमत होने के बाद जीएसटी लागू होने की तारीख एक जुलाई 2017 तय की गई।