छह अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया गया। बताया गया कि परमाणु बम के धमाके के बाद हिरोशिमा में 13 वर्ग किलोमीटर के इलाके में तबाही मच गई। एक झटके में हजारों लोगों की मौत हो गई। इससे होने वाली नुकसान का जब तक पूरा अंदाजा लगाया जाता, उससे पहले ही जापान के एक दूसरे शहर नागासाकी पर भी अमेरिका ने परमाणु बम गिराया। नागासाकी पर नौ अगस्त, 1945 को परमाणु बम गिराया गया। हालांकि नागासाकी पर परमाणु हमला तय नहीं था। फिर ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से यह शहर निशाना बन गया?
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'फैट मैन' परमाणु बम
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आठ अगस्त, 1945 की रात बीत चुकी थी, अमेरिका के बमवर्षक बी-29 सुपरफोर्ट्रेस बॉक्स पर एक बम लदा हुआ था। यह बम किसी भीमकाय तरबूज-सा था और वजन था 4050 किलो। बम का नाम विंस्टन चर्चिल के संदर्भ में 'फैट मैन' रखा गया। इस दूसरे बम के निशाने पर था औद्योगिक नगर कोकुरा। यहां जापान की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा गोला-बारूद बनाने वाली फैक्ट्रियां थीं।
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नागासाकी पर परमाणु बम गिराने वाला विमान (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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सुबह नौ बजकर पचास मिनट पर नीचे कोकुरा नगर नजर आने लगा। इस समय बी-29 विमान 31,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। बम इसी ऊंचाई से गिराया जाना था, लेकिन नगर के ऊपर बादलों का डेरा था। बी-29 फिर से घूम कर कोकुरा पर आ गया। लेकिन जब शहर पर बम गिराने की बारी आई तो फिर से शहर पर धुंए का कब्जा था और नीचे से विमान-भेदी तोपें आग उगल रहीं थीं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बी-29 का ईंधन खतरनाक तरीके से घटता जा रहा था। विमान में सिर्फ इतना ही ईंधन बचा था कि वापस पहुंच सकें। इस अभियान के ग्रुप कैप्टन लियोनार्ड चेशर ने बाद में बताया, 'हमने सुबह नौ बजे उड़ान शुरू की। जब हम मुख्य निशाने पर पहुंचे तो वहां पर बादल थे। तभी हमें इसे छोड़ने का संदेश मिला और हम दूसरे लक्ष्य की ओर बढ़े जो कि नागासाकी था।' चालक दल ने बम गिराने वाले स्वचालित उपकरण को चालू कर दिया और कुछ ही क्षण बाद भीमकाय बम तेजी से धरती की ओर बढ़ने लगा। 52 सेकेंड तक गिरते रहने के बाद बम पृथ्वी तल से 500 फुट की उंचाई पर फट गया।
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नागासाकी परमाणु हमला
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घड़ी में समय था 11 बजकर 2 मिनट। आग का एक भीमकाय गोला मशरुम की शक्ल में उठा। गोले का आकार लगातार बढ़ने लगा और तेजी से सारे शहर को निगलने लगा। नागासाकी के समुद्र तट पर तैरती नौकाओं और बंदरगाह में खड़ी तमाम नौकाओं में आग लग गई। आस पास के दायरे में मौजूद कोई भी व्यक्ति यह जान ही नहीं पाया कि आखिर हुआ क्या है, क्योंकि वो इसका आभास होने से पहले ही मर चुके थे।