ये तो आप जानते ही होंगे कि समुद्र की सतह से ही किसी जगह की ऊंचाई मापी जाती है यानी यह पृथ्वी पर सबसे निचली सतह है और इसी कारण नदियों का पानी भी आकर अंततः समुद्र में ही मिलता है। यह क्रम कोई 100-200 पहले का नहीं है बल्कि ऐसा तो हजारों-लाखों साल से होता आ रहा है, लेकिन क्या कभी आपने ये ध्यान दिया है कि आखिर समुद्र का पानी ही खारा (नमकीन) क्यों होता है, नदियों का पानी क्यों नहीं? चलिए इस रहस्य के बारे में जान लेते हैं, लेकिन उससे ये जानना जरूरी है कि आखिर समुद्र का जन्म कैसे हुआ और कब हुआ?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि समुद्र का जन्म आज से करीब 50 करोड़ साल से 100 करोड़ साल के बीच हुआ होगा, लेकिन इसका अनुमान लगाना मुश्किल है कि आखिर धरती के विशालकाय गड्ढे पानी से कैसे भर गए और इन विशालकाय गड्ढों का निर्माण हुआ कैसे। हालांकि ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का जन्म हुआ तो वह आग का एक विशाल गोला थी। जब यह धीरे-धीरे ठंडी होने लगी तो चारों तरफ गैस के बादल फैल गए। यही गैस के बादल जब भारी हो गए तो वो बारिश के रूप में बरस पड़े। लाखों साल तक ऐसे ही बारिश होती रही, जिससे धरती के विशालकाय गड्ढों में पानी भर गए, जिसे आज हम समुद्र के नाम से जानते हैं।
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समुद्र के पानी में जीवों की लाखों प्रजातियां रहती है। इनमें कुछ विशालकाय जीव भी होते हैं, जैसे- व्हेल मछली, शार्क मछली, ऑक्टोपस, एनाकोंडा सांप आदि। वैसे तो समुद्रों के बारे में अभी पूरी तरह वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए हैं। ऐसे में उसके कई रहस्य अब भी अनसुलझे ही हैं।
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आपको शायद ही ये पता हो कि नदियों और झरनों में भी समुद्र का ही पानी रहता है। दरअसल, समुद्र से भाप उठती है, जिससे बादलों का निर्माण होता है और इसी से बारिश होती है। यही पानी नदियों और झरनों में जाता है। इसमें लवण भी घुले होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा कम होती है, इसलिए नदी और झरनों का पानी अक्सर मीठा होता है।
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जब बारिश का पानी वापस समुद्र में पहुंचता है तो वहां थोड़े-थोड़े करके लवण जमा होते जाते हैं। हजारों-लाखों साल तक समुद्र में लवणों के जमा होने के कारण उसका पानी खारा हो जाता है। ये लवण हैं सोडियम और क्लोराइड, जिससे नमक का निर्माण होता है।