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आखिर कैसा था धरती पर वो आखिरी दिन, जब खत्म हुए डायनासोर?

Sun, 02 Feb 2020 01:51 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 02 Feb 2020 01:51 PM IST
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When the dinosaurs ended how was that last day on Earth
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पृथ्वी पर सबसे विनाशकारी दिनों में से एक के बारे में वैज्ञानिकों को नए साक्ष्य मिले हैं। वैज्ञानिकों ने मैक्सिको की खाड़ी से मिले एक 130 मीटर की चट्टान के एक टुकड़े का परीक्षण किया है। इस चट्टान में मौजूद कुछ ऐसे तत्व मिले हैं जिनके बारे में बताया जा रहा है कि 6.6 करोड़ साल पहले एक बड़े क्षुद्रग्रह (ऐस्टरॉइड) के पृथ्वी से टकराने के बाद यह जमा हुई थी। इसके प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वही उल्कापिंड है जिसके कारण विशालकाल डायनासोर विलुप्त हो गए थे। 

When the dinosaurs ended how was that last day on Earth
चिक्सुलब क्रेटर - फोटो : Social media

इस उल्का पिंड से टकराने से वहां 100 किलोमीटर चौड़ा और 30 किलोमीटर गहरा गड्ढा बन गया था। ब्रिटिश और अमेरिकी रिसर्चरों की एक टीम ने गड्ढे (क्रेटर) की जगह पर ड्रिलिंग करने में हफ्तों लगाए। इन वैज्ञानिकों ने जो नतीजे निकाले उसमें पहले के अध्ययनों की ही पुष्टि हुई, जिनमें पहले ही इस विनाशकारी प्राकृतिक के बारे में विश्लेषण किया जा चुका है। लगभग 200 किलोमीटर चौड़ा क्रेटर मैक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप में है। इसके सबसे अच्छे से संरक्षित इलाका चिक्सुलब के बंदरगाह के पास है। 

When the dinosaurs ended how was that last day on Earth
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिकों ने जिस चट्टान का अध्ययन किया वो सेनोजोइक युग का प्रमाण बन गया है जिसे स्तनपायी युग के नाम से भा जाना जाता है। ये चट्टान बहुत से बिखरे हुए तत्वों का एक मिश्रण है, लेकिन रिसर्चरों का कहना है कि ये इस तरह से बंटे हुए हैं कि ये इनके अवयवों की पहचान हो जाती है। नीचे से पहले 20 मीटर में ज्यादातर कांचदार मलबा है, जो गर्मी और टक्कर के दबाव के कारण पिघली चट्टानों से बना है। इसका अगला हिस्सा पिघली चट्टानों के टुकड़े से बना है यानी उस विस्फोट के कारण जो गरम तत्वों पर पानी पड़ने से हुआ था। ये पानी उस समय वहां मौजूद उथले समंदर से आया था। शायद उस समय इस उल्का पिंड के गिरने के कारण पानी बाहर गया लेकिन जब ये गर्म चट्टान पर वापस लौटा, एक तीव्र क्रिया हुई होगी। ये वैसा ही था जैसा ज्वालामुखी के समय होता है जब मैग्मा मीठे पानी के संपर्क में आता है।  

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When the dinosaurs ended how was that last day on Earth
चिक्सुलब क्रेटर - फोटो : Social media

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रभाव के पहले एक घंटे में यह सभी घटनाएं घटी होंगी लेकिन उसके बाद भी पानी बाहर आकर उस क्रेटर को भरता रहा होगा। इस चट्टान का अगला हिस्सा 80 से 90 मीटर का हिस्सा उस कचरे से बना है जो उस समय पानी में रहा होगा। चट्टान के भीतरी भाग से सूनामी के प्रमाण भी मिले हैं। चट्टान के अंदर 130 मीटर पर सुनामी के प्रमाण मिलते हैं। चट्टान में जमीं परतें एक ही दिशा में हैं और इससे लगता है कि बहुत उच्च उर्जा की किसी घटना के कारण इनका जमाव हुआ होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रभाव से एक बड़ी लहर पैदा हुई जो क्रेटर से कई किलोमीटर दूर के तटों तक पहुंची होगी, लेकिन ये लहर वापस आई होगी और चट्टान का ऊपरी हिस्सा जिन पदार्थों से मिलकर बना है, ऐसा लगता है कि सुनामी की वापसी लहर का नतीजा है। 

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When the dinosaurs ended how was that last day on Earth
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ऑस्टिन में टेक्सस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और रिसर्च के सह-लेखक, शॉन गुलिक ने बताया, 'यह सब एक दिन में हुआ। सुनामी किसी हवाई जहाज की गति से चलती है और चौबीस घंटे लहरों को दूर ले जाने और फिर से वापस लेने के लिए पर्याप्त समय है।' प्रोफेसर गुलिक की टीम वहां मिले कई सबूतों के आधार पर सूनामी आने की बात पर विश्वास कर रही है, क्योंकि चट्टान के ऊपरी परतों में चारकोल का मिश्रण मिला है, जो इस बात का प्रमाण है कि टक्कर के कारण जो आग पैदा हुई होगी वो आस पास के जमीनी इलाकों तक पहुंची होगी। 

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