Science News: इंसानों के लिए मौत हमेशा से ही एक रहस्य है। लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर मौत के समय लोग क्या महसूस करते हैं? क्या सच में लोगों को सफेद रोशनी दिखाई देती है या पुरानी यादें आखों के सामने आती हैं। हाल ही वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिए इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की है। आइये बताते हैं कि विज्ञान की नजर में कोई व्यक्ति मरते समय क्या महसूस करता है?
क्या चलता है दिमाग में?
- एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर के काम करने के बंद होने के बाद भी मस्तिष्क के कुछ हिस्से सक्रिय रहते हैं।
- शोधकर्ताओं को अध्ययन में पता चला है कि मौत के ठीक पहले 'गामा ऑसिलेशन' नामक मस्तिष्क तरंगें बढ़ जाती हैं।
- यही तरेंगे सपने देखते समय, ध्यान लगाते समय या किसी पुरानी याद को ताजा करते समय महसूस होती हैं।
- इसका मतलब है कि मौत के समय में व्यक्ति को अपने जीवन के सबसे अच्छे पल पुरानी यादों की तरह दिखाई दे सकते हैं।
- इन एक्सपीरियंस को नियर-डेथ एक्सपीरियंस (एनडीई) कहा जाता है। इनमें मरने वाला इंसान अपनों के चेहरे देखने की बात करता है।
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इंसान को मौत के समय क्या दिखाई देता है?
- फोटो : Adobe Stock
कैसे हुआ खुलासा?
- कार्डियक अरेस्ट के मरीजों के दिमाग की एक्टिविटी रिकॉर्ड की गई, जिसके बाद यह जानकारी सामने आई है
- इससे पता चलता है कि मौत कोई सिर्फ अंधेरा नहीं है बल्कि एक अच्छा सफर होता है।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि मौत के समय इंसान का दिमाग एक ऐसी अवस्था में चला जाता है, जिसे 'लाइफ रिकॉल' कहा जाता है।
- साल 2023 में फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया था कि मौत से ठीक पहले दिमाग बंद होने की जगह ओवरएक्टिव हो जाता है और हार्ट के रुकने के बाद भी कुछ समय के लिए एक्टिव बना रहता है।
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कैसे काम करता है दिमाग?
- अमेरिका के लुइसविले यूनिवर्सिटी में न्यूरोसर्जन डॉ. अजमल जेम्मार के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया था। जब 87 साल के मरीज को मिर्गी का दौरा पड़ा था और उसके लिए ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम) का इस्तेमाल हुआ था।
- उस दौरान दिमाग की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते समय मरीज को दिल का दौरा पड़ गया और उसकी मौत हो गई थी।
- जब शख्स की धड़कन रुकने से 30 सेकंड पहले और बाद के समय की जांच की गई, तो न्यूरोलॉजिकल डिफरेंसेस का पता चला था
- डॉ. अजमल का कहना है कि यह अध्ययन, उन मरीजों के ईईजी (EEG) डेटा पर आधारित है जिनके मस्तिष्क की गतिविधियों को उनकी मौत के समय मॉनिटर किया जा रहा था।
- शोधकर्ताओं ने पाया कि कार्डियक अरेस्ट के बाद भी लगभग 30 सेकंड तक दिमाग में हाई-लेवल एक्टिविटी बनी रहती है।
- उन्होंने बताया कि मौत के समय इंसान का दिमाग अचानक बंद नहीं होता, बल्कि उसमें अलग-अलग तरह की ब्रेन वेव्स एक्टिव हो जाती हैं ।
- इनमें गामा, थीटा, अल्फा और बीटा ब्रेन वेव्स शामिल हैं जो आमतौर पर सपनों, यादों और सोचने-समझने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं।
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क्या मौत के लिए दिमाग करता है तैयार?
- डॉ. अजमल ने बताया कि किसी का दिमाग संभवतः उसे मौत के लिए तैयार करता है और आखिरी समय में हमारे सबसे यादगार लम्हों को दोबारा जीने का मौका देता है।
- इसका मतलब यह हो सकता है कि मौत से ठीक पहले दिमाग जीवन की अहम घटनाओं और यादों को आखिरी बार दोहरा रहा होता है
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क्या दिखाई देती है सफेद रोशनी?
- वैज्ञानिकों ने बताया कि 'नियर डेथ एक्सपीरियंस' (NDE) से गुजरने वाले लोग सुरंग जैसी अंधेरी गली और उसके आखिरी में तेज सफेद रोशनी देखने का दावा करते हैं
- हालांकि, हार्ट काम करना बंद करता है, दिमाग में खून जाना बंद होता है और ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, तो ऐसी स्थिति में आंखों के रेटिना और दिमाग के विजुअल कॉर्टेक्स के बीच का संपर्क टूटने लगता है जिससे एक सुरंग जैसा दृश्य पैदा होता है। इसकी वजह से लोगों को लगता है कि वे किसी अंधेरी सुरंग से उजाले की ओर जा रहे हैं।