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वो खुफिया एटमी ठिकाने, जहां रखी गई थीं सात मंजिल ऊंची परमाणु मिसाइलें

Sun, 23 Feb 2020 02:52 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 23 Feb 2020 02:52 PM IST
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USA Secret Nuclear Base which would have become the reason for the destruction of world
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Social media

बीसवीं सदी में दुनिया ने करीब आधी सदी का वक्त जबरदस्त डर के माहौल में बिताया। इसकी वजह थी अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध। 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के खात्मे से पहले ही अमेरिका और सोवियत संघ में तनातनी बढ़ गई थी। अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटम बम गिराकर दुनिया को उसकी ताकत और उसके खतरों का अहसास करा दिया था। इसके बाद से ही अमेरिका और सोवियत संघ में एटमी हथियारों की होड़ मच गई थी। दोनों एक से एक एटम बम और एटमी मिसाइलें बनाने में जुट गए थे। एक वक्त ऐसा था जब दोनों देशों के पास इतने एटमी हथियार थे कि दुनिया को कई बार मिटाया जा सकता था। 



USA Secret Nuclear Base which would have become the reason for the destruction of world
खुफिया परमाणु ठिकाना - फोटो : Social media

उस दौर में अमेरिका और सोवियत संघ, दोनों ने कई खुफिया एटमी ठिकाने बनाए हुए थे, जहां पर बड़ी-बड़ी न्यूक्लियर मिसाइलें छुपाकर रखी गई थीं। दोनों ही देश एक-दूसरे के इन खुफिया एटमी ठिकानों को जानते थे। इसलिए चाहे कोई भी देश पहले हमला करता, पूरी दुनिया का तबाह होना तय था। ये खुफिया एटमी ठिकाने ही दुनिया की तबाही की वजह बनते। चलिए आज आपको अमेरिका के खुफिया एटमी ठिकाने की सैर पर ले चलते हैं। 

USA Secret Nuclear Base which would have become the reason for the destruction of world
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ये न्यूक्लियर बेस, अमेरिका के एरिजोना सूबे में टक्सन नाम के शहर के करीब रेगिस्तानी इलाके में था। मेक्सिको की सीमा से ये जगह महज कुछ किलोमीटर दूर थी। ऊपर से देखने पर किसी को बिल्कुल भी अहसास नहीं हो सकता था कि जमीन के नीचे दुनिया की तबाही का सामान छुपा है। इस न्यूक्लियर बेस पर तैनात रहीं इवोन मॉरिस बताती हैं कि सोवियत संघ को तो पक्का इस जगह के बारे में पता रहा होगा। मगर उनके अपने देश में, यहां तक कि टक्सन शहर के लोगों को भी भनक नहीं रही होगी कि यहां न्यूक्लियर बेस है। इवोन, यहां 1980 से 84 तक तैनात रही थीं। वो बताती हैं कि इस एटमी बेस में जाने के लिए तहखानों की कई सीढ़ियों से गुजरना होता था, जिस दौरान उन्हें कई बार सुरक्षा कोड बताना होता था। इस दौरान वो लगातार कैमरे की निगरानी में रहती थीं ताकि कहीं ऐसा न हो कि बंदूक की नोक पर कोई जबरदस्ती एटमी बेस के भीतर घुस आए। 

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USA Secret Nuclear Base which would have become the reason for the destruction of world
परमाणु बेस - फोटो : Social media

इवोन कहती हैं कि ऐसे खुफिया एटमी ठिकानों का मकसद था दुश्मन को डराकर तीसरा विश्व युद्ध छेड़ने से रोकना। मगर, यहां पर दुनिया की तबाही का अच्छा-खासा सामान जमा था। इस न्यूक्लियर बेस पर अमेरिका की टाइटन 2 एटमी मिसाइलें रखी गई थीं। ये मिसाइलें करीब सात मंजिल ऊंची थीं। इनमें इतनी ताकत थी कि पलक झपकते ही सोवियत संघ का सफाया हो जाता। 

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USA Secret Nuclear Base which would have become the reason for the destruction of world
परमाणु बम विस्फोट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

अगर सोवियत संघ पहले एटमी मिसाइल से अमेरिका पर हमला करता तो इवोन और उनके साथियों के पास सिर्फ तीन मिनट होते जवाबी हमला करने के लिए। इस दौरान उन्हें सीढ़ियों से भागकर एटमी बेस के कंट्रोल रूम में जाना था। वो अकेले वहां नहीं जा सकती थीं। उनके साथ एक और साथी होता। दोनों को कई बार सिक्योरिटी चेक का सामना करना पड़ता। इसके बाद भी दोनों को मिसाइल लॉन्च के ऑर्डर का मिलान फोन पर एक कोड डायल करके लेना होता। फिर राष्ट्रपति से मिसाइल लॉन्च का जो आदेश कोड के तौर पर आता, उसे इवोन और उनका दूसरा साथी मिलाता। कम से कम तीन बार कोड का मिलान करने के बाद ही इवोन और उनके साथी एटमी मिसाइल लॉन्च कर सकते थे और इसके लिए उनके पास सिर्फ तीन मिनट का वक्त होता। 

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