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The Shortest War: क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे छोटा युद्ध कौन सा था? कुछ मिनटों में ही हो गया था फैसला

Tue, 21 Apr 2026 07:41 PM IST
Sankalp Prakash Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sankalp Prakash Singh Updated Tue, 21 Apr 2026 07:41 PM IST
सार

क्या आप दुनिया के सबसे छोटे युद्ध के बारे में जानते हैं? इस युद्ध का अंत महज कुछ मिनटों में ही हो गया था। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से 

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The Shortest War in History Know Interesting Facts In Hindi
Shortest War In History - फोटो : AI Generated

विस्तार

इतिहास में ऐसे कई युद्ध हुए हैं, जो काफी लंबे समय तक चले हैं। इन युद्धों में कई लोगों की जानें गईं। वहीं क्या आपको इस बारे में पता है कि दुनिया का सबसे छोटा युद्ध कौन सा है? इसके बारे में जानने के बाद आपको काफी हैरानी होगी। यह घटना 27 अगस्त 1896 की है, जब ब्रिटेन और जांजीबार की सल्तनत के बीच एक ऐसा संघर्ष हुआ जो सिर्फ कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया। यह टकराव सत्ता के विवाद से शुरू हुआ था और इतनी तेजी से खत्म हुआ कि इसे आज भी दुनिया का सबसे छोटा युद्ध माना जाता है। यह युद्ध महज 45 मिनट में ही खत्म हो गया। इतिहास में इस युद्ध को लेकर एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हुआ, जिसे आज भी पढ़कर लोग चकित रह जाते हैं।

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यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब जांजीबार के सुल्तान हमद बिन थुवैनी की अचानक मृत्यु हो गई। इसके बाद खालिद बिन बरघाश ने बिना ब्रिटिश मंजूरी के खुद को वहां का सुल्तान घोषित कर दिया। उस समय जांजीबार पर ब्रिटेन का प्रभाव काफी मजबूत था और किसी भी नए शासक को उनकी स्वीकृति लेनी जरूरी होती थी। खालिद द्वारा उठाया गया यह कदम ब्रिटेन को नागवार गुजरा और हालात तेजी से टकराव की ओर बढ़ने लगे।

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ब्रिटेन ने खालिद को स्पष्ट चेतावनी दी कि वह अपनी कुर्सी छोड़ दें। इसके लिए ब्रिटेन ने सुबह 9 बजे तक का समय दिया। खालिद ने ब्रिटेन द्वारा दिए गए इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। समय सीमा जैसे ही खत्म हुई, ब्रिटिश नौसेना ने हमला शुरू कर दिया। उनके युद्धपोत पहले से ही बंदरगाह पर तैनात थे, जिससे हमला बेहद तेजी और ताकत के साथ किया गया।

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यह युद्ध पूरी तरह एकतरफा था। ब्रिटिश सेना की ताकत के सामने जांजीबार ज्यादा देर टिक नहीं पाया। गोलाबारी के दौरान सुल्तान का महल और उसकी शाही नाव पूरी तरह तहश नहश हो गई। इस संघर्ष में जांजीबार के सैकड़ों लोग घायल हुए, जबकि ब्रिटेन की ओर से नुकसान बहुत कम हुआ। यह असमान लड़ाई जल्द ही अपने अंत की ओर बढ़ने लगी।

करीब 9 बजकर 40 से 45 मिनट के बीच सुल्तान का झंडा नीचे गिरा और लड़ाई समाप्त हो गई। इसके बाद खालिद वहां से भाग गया और ब्रिटेन ने अपनी पसंद का शासक स्थापित किया। इस कारण यह घटना सबसे छोटे युद्ध के रूप में जानी जाती है। यह युद्ध यह भी दर्शाने का काम करता है कि उस दौर में साम्राज्यवादी ताकतें कितनी शक्तिशाली थीं।

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