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क्या अंतरिक्ष से धरती पर आया सोना? हैरान करते हैं वैज्ञानिकों के ये पक्के दावे

Fri, 17 Jan 2020 10:13 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 17 Jan 2020 10:13 AM IST
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Strange Facts about gold come to Earth through meteorites from space
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में सोना विशेष महत्व की धातु है। इस पीली धातु की उत्पति को लेकर तमाम तरह की कहानियां प्रचलित है। वैज्ञानिक समुदाय में भी एक राय नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों के एक बड़े तबके का मानना है कि धरती के भीतर मौजूद सोना धरती की संपत्ति नहीं है और यह अंतरिक्ष से उल्कापिंडों के जरिए आया है। 

Strange Facts about gold come to Earth through meteorites from space
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इस कीमती पीली धातु की उत्पति के बारे में वैज्ञानिक जो तर्क पेश कर रहे हैं उसपर शायद ही किसी को भरोसा हो, लेकिन वैज्ञानिकों के पास इसके ठोस सबूत हैं। मूल रूप से मुलायम धातु सोना के बारे में वैज्ञानिक जॉन एमस्ली का दावा है कि यह धातु अंतरिक्ष से उल्का पिंडों के रूप में धरती पर आया और इसी कारण यह धरती के बाहरी हिस्से में पाया जाता है। 

Strange Facts about gold come to Earth through meteorites from space
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैसे सोने की उपलब्धता के बारे में पिछले कुछ दशकों से चर्चा में आए इस सिद्धांत पर वैज्ञानिक समुदाय को मुहर लगानी है। इस सिद्धांत की वकालत करने वालों का कहना है कि धरती के बाहरी तह, जो करीब 25 माइल मोटा है, में घूलने वाले हर 1000 टन धातुओं में केवल 1.3 ग्राम सोना था। करीब साढ़े चार अरब साल पहले धरती की उत्पति के बाद इसकी सतह ज्वालमुखी और पिघले हुए चट्टानों से भरी पड़ी थी। इसके बाद लाखों सालों में धरती के बाहरी परत में घुलते हुए लोहा धरती के केंद्र में पहुंच गया है। संभवतः इसके साथ सोना भी पिघलकर धरती के बाहरी परत में मिल गया। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के भूगर्भशास्त्री मथिया विलबोल्ड का कहना है कि इस तर्क पर इतनी आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता था इसलिए विज्ञान को इसकी विवेचना करनी पड़ी। विलबोल्ड का कहना है, 'सिद्धांत यह है कि धरती के मुख्य हिस्से के गठन के बाद उल्का पिंडों की बौछार हुई जो धरती से टकराए। इन उल्का पिंडों में कुछ मात्रा में सोना था और इसने धरती के बाहरी सतह को सोने से भर दिया।' विलबोल्ड ने कहा कि यह सिद्धांत उल्का पिंडों की गतिविधियों से मेल खाता है, जैसा कि वैज्ञानिक समझते हैं। यह घटना करीब 3.8 अरब साल पहले घटी होगी। 

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चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media

दरअसल, सन 1970 के दशक में आपोलो के चंद्रमा पर उतरने के बाद उल्कापिंडों के जरिए धरती पर सोना आने का सिद्धांत दिया गया। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर चट्टानों से लिए गए नमूनों में उसकी सतह से लिए गए नमूनों की तुलना में कम रेडियम और सोना पाया। यह धरती की सतह और चट्टानों में पाए जाने वाले सोने से भी कम था। इससे यह माना गया कि धरती और चांद पर अंतरिक्ष से रेडियम युक्त उल्कापिंड गिरे थे। उल्कापिंडों की इस बारिश के बाद ये तत्व चांद पर तो वे वैसे ही पड़े रहे लेकिन धरती की आंतरिक गतिविधियों के कारण वे उसमें समाहित हो गए। इस विचार को 'लेट वेनीर हाइपोथेसिस' कहा गया और यह ग्रहीय विज्ञान का एक मूलभूत सिद्धांत बन गया। 

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