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मतीरे की राड़: जब महज एक तरबूज के लिए दो रियासतों में हुई थी खूनी लड़ाई, मारे गए थे हजारों सैनिक

Wed, 03 Jun 2020 10:36 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 03 Jun 2020 10:36 AM IST
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Matire Ki Rad Story of a strange war between Bikaner and Nagaur principality for a watermelon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

भारत के इतिहास में ऐसी कई लड़ाईयां लड़ी गई हैं, जिनके किस्से आज भी बड़े गर्व के साथ सुनाए जाते हैं। वैसे तो अधिकतर लड़ाईयों का मुख्य कारण दूसरे राज्यों पर अधिकार जमाना ही होता था, लेकिन आज से करीब 375 साल पहले एक बेहद ही अजीब वजह से युद्ध हुआ था। अजीब इसलिए, क्योंकि यह युद्ध महज एक तरबूज के लिए हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस भयानक युद्ध में हजारों सैनिक मारे गए थे। 

Matire Ki Rad Story of a strange war between Bikaner and Nagaur principality for a watermelon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

यह लड़ाई दुनिया की एकमात्र ऐसी लड़ाई है, जो सिर्फ एक फल की वजह से लड़ी गई थी। इतिहास में इस युद्ध को 'मतीरे की राड़' के नाम से जाना जाता है। दरअसल, राजस्थान के कुछ हिस्सों में तरबूज को मतीरा कहा जाता है और राड़ का मतलब झगड़ा होता है।   

Matire Ki Rad Story of a strange war between Bikaner and Nagaur principality for a watermelon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'मतीरे की राड़' नामक लड़ाई 1644 ईस्वी में लड़ी गई थी। यह कहानी कुछ इस तरह है कि उस समय बीकानेर रियासत का सीलवा गांव और नागौर रियासत का जाखणियां गांव एक दूसरे से सटे हुए थे। ये दोनों गांव दोनों रियासतों की अंतिम सीमा थे। हुआ कुछ यूं कि तरबूज का एक पौधा बीकानेर रियासत की सीमा में उगा, लेकिन उसका एक फल नागौर रियासत की सीमा में चला गया। 

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Matire Ki Rad Story of a strange war between Bikaner and Nagaur principality for a watermelon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अब बीकानेर रियासत के लोगों का मानना था कि तरबूज का पौधा उनकी सीमा में है तो फल भी उनका ही हुआ, लेकिन नागौर रियासत के लोगों का कहना था कि जब फल उनकी सीमा में आ गया है तो वो उनका हुआ। इसी बात को लेकर दोनों रियासतों में झगड़ा हो गया और धीरे-धीरे ये झगड़ा एक खूनी लड़ाई में तब्दील हो गया। 

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Matire Ki Rad Story of a strange war between Bikaner and Nagaur principality for a watermelon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कहते हैं कि इस अजीबोगरीब लड़ाई में बीकानेर की सेना का नेतृत्व रामचंद्र मुखिया ने किया था जबकि नागौर की सेना का नेतृत्व सिंघवी सुखमल ने। हालांकि दोनों रियासतों के राजाओं को तब तक इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था, क्योंकि उस समय बीकानेर के शासक राजा करणसिंह एक अभियान पर गए हुए थे जबकि नागौर के शासक राव अमरसिंह मुगल साम्राज्य की सेवा में थे। दरअसल, दोनों राजाओं ने मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार कर ली थी। जब इस युद्ध के बारे में दोनों राजाओं के पता चला तो उन्होंने मुगल दरबार से इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की। हालांकि तब तक बहुत देर हो गई। बात मुगल दरबार तक पहुंचती, उससे पहले ही युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में भले ही नागौर रियासत की हार हुई, लेकिन कहते हैं कि इसमें दोनों तरफ से हजारों सैनिक मारे गए। 

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