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भारत में भी एक जगह ऐसी जहां बॉल से नहीं, अंडों से खेलते हैं खिलाड़ी
बिजार डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 08 Jan 2018 10:14 AM IST
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egg fight
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अंडा जिसे मांसाहारी लोग तो खाना पसंद करते ही हैं, कुछ शाकाहारी भी इसे खा लिया करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अंडों को उबालकर उन्हें तोड़ देते हैं और ऐसा करना उन्हें मजेदार लगता है। बात करें उन्हीं लोगों की, जो नॉर्थ-ईस्ट इंग्लैंड में डरहम के पीटरली में रहते हैं।
पीटरली एक ऐसा शहर है, जहां 'जारपिंग' खेलना पसंद किया जाता है। इसे कई और नामों से जैसे एग फाइट, एग टैपिंग, शैकलिंग से इंग्लैंड में जाना और खेला जाता है। इस खेल को खेलने का नियम एकदम साधारण होता है।
दो लोगों के बीच खेला जाने वाले इस खेल में दोनों प्रतिभागियों के हाथ में हार्ड बॉयल्ड एग होते हैं और दोनों ही एक-दूसरे के अंडे पर टैप करते हैं। दोनों को ही इस बात का ध्यान रखना होता है कि वह टैपिंग में अपना अंडा बचाएं और दूसरे का अंडा तोड़ें।
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पीटरली एक ऐसा शहर है, जहां 'जारपिंग' खेलना पसंद किया जाता है। इसे कई और नामों से जैसे एग फाइट, एग टैपिंग, शैकलिंग से इंग्लैंड में जाना और खेला जाता है। इस खेल को खेलने का नियम एकदम साधारण होता है।
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दो लोगों के बीच खेला जाने वाले इस खेल में दोनों प्रतिभागियों के हाथ में हार्ड बॉयल्ड एग होते हैं और दोनों ही एक-दूसरे के अंडे पर टैप करते हैं। दोनों को ही इस बात का ध्यान रखना होता है कि वह टैपिंग में अपना अंडा बचाएं और दूसरे का अंडा तोड़ें।
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egg fight
यूरोप में 14वीं सदी में शुरू होने वाले इस खेल को पहले आपस में मजे के तौर पर खेला जाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसे अन्य खेलों के साथ शामिल किया गया। आज डरहम के पीटरली शहर में 'वर्ल्ड जारपिंग चैम्पियनशिप' खेला जाता है।
इंग्लैंड में अंडे को रीबर्थ या रीइन्कार्नेशन का सिंबल मानकर ही इस खेल को खेला जाता है। मरकर दोबारा जीवन पाना ही रीबर्थ नहीं है, बल्कि हमें इससे शक्ति मिलती है कि कैसे जीवन में अन्य परेशानियों से लड़कर हम गिरे नहीं। उन परेशानियों से लड़कर हम दोबारा खड़े हों।
इस खेल को अन्य देशों में भी खेला जाता है। भारत में असम में इसे अप्रैल में खेला जाता है। असम में इसे 'कोनीजुज' नाम से जाना जाता है। वहीं सेंट्रल यूरोपियन कैथोलिक्स में 'एपर' एक परंपरा है, जिसे वहां त्याग और बलिदान के रूप में मनाते और खेलते हैं।
इंग्लैंड में अंडे को रीबर्थ या रीइन्कार्नेशन का सिंबल मानकर ही इस खेल को खेला जाता है। मरकर दोबारा जीवन पाना ही रीबर्थ नहीं है, बल्कि हमें इससे शक्ति मिलती है कि कैसे जीवन में अन्य परेशानियों से लड़कर हम गिरे नहीं। उन परेशानियों से लड़कर हम दोबारा खड़े हों।
इस खेल को अन्य देशों में भी खेला जाता है। भारत में असम में इसे अप्रैल में खेला जाता है। असम में इसे 'कोनीजुज' नाम से जाना जाता है। वहीं सेंट्रल यूरोपियन कैथोलिक्स में 'एपर' एक परंपरा है, जिसे वहां त्याग और बलिदान के रूप में मनाते और खेलते हैं।